Chhath Puja 2021: 'खरना' आज, सूर्यदेव को लगेगा गुड़ के खीर का भोग, फिर शुरू होगा 36 घंटे का निर्जला व्रत

नई दिल्ली, 09 नवंबर। लोकआस्था के पर्व 'छठ' की शुरुआत सोमवार से हो चुकी है। आज व्रत का दूसरा दिन है, जिसे कि 'खरना' कहा जाता है। आज सूर्यदेव को भोग लगाने के बाद से 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू हो जाएगा। आज प्रसाद के रूप में गुड़ के खीर खाने की परंपरा है साथ में उपवास करने वाले लोग मोटी रोटी भी खाते हैं। आज लोग चूल्हे पर खाना बनाते हैं। 'छठ' का व्रत काफी संयम वाला है, इसमें स्वच्छता का विशेष ख्याल रखा जाता है। आज के प्रसाद में खीर के अलावा मूली, केला, साठी के चावल प्रयोग होता है और लोग खाना बनाने के लिए सूखी लकड़ी का प्रयोग करते हैं।

36 घंटे का कठिन व्रत शुरू होगा

36 घंटे का कठिन व्रत शुरू होगा

ये पर्व है आस्था का,तपस्या का और भरोसे का, आज का प्रसाद ग्रहण करने के बाद 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू हो जाता है, जो कि उगते सूर्य अर्ध्य देने के बाद ही खत्म होता है। इसमें उपवास करने वाले को फर्श पर कंबल या चादर बिछा कर सोना होता है। महिलाओं को साड़ी, जबकि पुरुषों को धोती पहनकर व्रत करना होता है। कुल मिलाकर जो भी ये व्रत करता है वो पारंपरिक लिबास में ही करता है क्योंकि ये व्रत हमारी संस्कृति को भी प्रदर्शित करता है।

डूबते और उगते दोनों सूरज की होती है पूजा

डूबते और उगते दोनों सूरज की होती है पूजा

आपको बता दें कि ये अकेले ऐसा व्रत है, जिसमें डूबते हुए सूरज और उगते हुए सूर्य की पूजा की जाती है। लोग अपनी संतान की लंबी उम्र के लिए ये व्रत रखते हैं। कहते हैं कि डूबता हुआ सूरज जहां आपको जीवन चक्र के बारे में बताता है, वहीं दूसरी ओर उगता हुआ सूरज आपको आशा, उम्मीद और नई सोच के बारे में बताता है।

खरना के अगले दिन छठ पूजा का मुख्य दिन होता है.

खरना के अगले दिन छठ पूजा का मुख्य दिन होता है.

'खरना' आज है, जिसका मतलब है शुद्धिकरण। इस दिन को लोहंडा भी कहते हैं। माना जाता है कि इसी दिन से घर में छठी मइया का आगमन होता है। 'खरना' के अगले दिन छठ पूजा का मुख्य दिन होता है। इस दिन छठी मैया और सूर्य देव की पूजा की जाती है।

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    उगते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा

    उगते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा

    इस साल छठ की मुख्य पूजा 10 नवंबर को है। इस दिन डूबते सूर्य को पहला अर्घ्य दिया जाएगा। इसके अगले दिन छठ पूजा का समापन होगा, इस दिन उगते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है और इसके बाद पारण करते व्रत खोला जाता है।

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