Sharad Purnima 2023: शरद पूर्णिमा पर लगा चंद्र ग्रहण, जानिए कब बनाएं खीर?
Sharad Purnima 2023: अश्विनमास की पूर्णिमा से ही शरद ऋतु प्रारंभ होती है और इसी कारण इसे शरद पूर्णिमा कहा जाता है। इस पूर्णिमा का खास महत्व है, कहते हैं कि इस दिन मां तुलसी विचरण करने के लिए धरती पर आती हैं और इसी दिन आकाश से अमृत वर्षा भी होती हैऔर इसी कारण लोग इस दिन खीर बनाकर रात भर खुले आकाश के नीचे रखते हैं।

लेकिन इस बार की पूर्णिमा पर ही खंडग्रास चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है ऐसे में इसका सूतक काल 9 घंटे पहले लागू हो जाएगा और इस काल में पूजा पाठ नहीं करते हैं, ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर खीर कब बनेगी और कैसे उसे रात भर आकाश के नीचे रखा जाएगा?
आप खीर को सूतक काल से पहले बना लें
तो आपको बता दें कि इसका सीधा सा समाधान ये है कि आप खीर को सूतक काल से पहले बना लें और ग्रहण शुरू होने से पहले इसमें तुलसी का पत्ता डालकर चांद की रोशनी में खुले आकाश में रख लें और इसका सेवन ग्रहणकाल के बाद करें।
ग्रहण का समय और सूतक काल का क्या वक्त है?
चंद्र ग्रहण का टाइम 28 को भारत में रात 11.30 बजे से आरंभ होगा और 29 अक्टूबर की रात 02 बजकर 24 मिनट तक का है और इसका सूतक काल 28 अक्टूबर को दोपहर 02:52 बजे शुरू होगा। ग्रहण की अवधि एक घंटा 19 मिनट की है।
शरद पूर्णिमा की तिथि और मुहूर्त
शरद पूर्णिमा 28 अक्टूबर को 04 बजकर 17 मिनट से शुरू होकर 29 अक्टूबर को रात 01 बजकर 53 मिनट पर समाप्त होगी। पूर्णिमा की पूजा इस दौरान कभी भी की जा सकती है। इस दिन लोग पवित्र नदियों में स्नान करते हैं और दान-पुण्य करते हैं।
महत्व
शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से युक्त होता है। पौराणिक कथाओं के मुताबिक शरद पूर्णिमा की रात को श्रीकृष्ण ने ब्रज की धरती में गोपियों संग रास रचाया था। इसलिए ये पूर्णिमा प्रेंमी युगल और दांपत्य जीवन के लिए काफी खास है। इस दिन राधा कृष्ण की पूजा करने से इंसान के प्यार की उम्र बहुत लंबी होती है।
इंसान को धन और यश की प्राप्ति होती है
तो वहीं विष्णुप्रिया मां लक्ष्मी की पूजा करने से इंसान को धन और यश की प्राप्ति होती है तो वहीं इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से इंसान को सुख-शांति की प्राप्ति होती है जबकि चंद्रमा की पूजा करने से इंसान सुंदर काया का भागीदार बनता है।












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