Chaitra navratri 4th day: चैत्न नवरात्रि में चौथे दिन होती है मां 'कूष्मांडा' की पूजा, जानिए पूजा मुहूर्त
मां 'कूष्मांडा' को अष्टभुजा भी कहते हैं, इनकी पूजा करने से इंसान रोगमुक्त, मानसिक कष्ट और शारीरिक परेशानियों से मुक्त हो जाता है।

Chaitra navratri 4th day(मां 'कूष्मांडा'): चैत्र नवरात्रि का चौथा दिन मां 'कूष्मांडा' को समर्पित है, जिनका रूप काफी मोहक है, मां की आठ भुजाएं हैं। इनका सरस रूप हर किसी पर अपनी कृपा बरसाता है, इनका वाहन सिंह है। कहते हैं की मां की शरण में आने वाला हर जातक सुख और वैभव का भागीदार बनता है। मां की पूजा खास ढंग से करने पर इंसान के सारे कष्टों का अंत होता है और इंसान को मोक्ष की भी प्राप्ति होती है। कहते हैं मां की अराधना करने से इंसान रोगमुक्त और ताकतवर बनता है।
ये है शुभ मुहूर्त
चतुर्थी तिथी का प्रारंभ शुक्रवार को 03:29 PM से शुरू हो चुकी है और ये खत्म शनिवार को 02:53 PM पर होगी तो पूजा का शुभ मुहुर्त 25 मार्च को सुबह 06:15 AM से लेकर 11: 49 AM तक रहेगा।
इन मंत्रों से करें मां की पूजा
- या देवी सर्वभूतेषु माँ कूष्माण्डा रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
- सुरासम्पूर्ण कलशं रुधिराप्लुतमेव च।दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे॥
- जगतमाता जगतकत्री जगदाधार रूपणीम्।
- चराचरेश्वरी कूष्माण्डे प्रणमाम्यहम्॥
मां की आरती
- कूष्मांडा जय जग सुखदानी।
- मुझ पर दया करो महारानी॥
- पिगंला ज्वालामुखी निराली।
- शाकंबरी मां भोली भाली॥
- लाखों नाम निराले तेरे।
- भक्त कई मतवाले तेरे॥
- भीमा पर्वत पर है डेरा।
- स्वीकारो प्रणाम ये मेरा॥
- सबकी सुनती हो जगदम्बे।
- सुख पहुंचती हो मां अम्बे॥
- तेरे दर्शन का मैं प्यासा।
- पूर्ण कर दो मेरी आशा॥
- मां के मन में ममता भारी।
- क्यों ना सुनेगी अरज हमारी॥
- तेरे दर पर किया है डेरा।
- दूर करो मां संकट मेरा॥
- मेरे कारज पूरे कर दो।
- मेरे तुम भंडारे भर दो॥
- तेरा दास तुझे ही ध्याए।
- भक्त तेरे दर शीश झुकाए॥












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