Buddha Purnima 2022: बुद्ध पूर्णिमा आज, भक्तों ने गंगा में लगाई आस्था की डुबकी, जानें महत्व
देहरादून, 16 मई। आज हिंदू धर्म के अनुसार काफी पावन दिन है क्योंकि आज वैशाख माह की पूर्णिमा है, जिसे बुद्ध पूर्णिमा के रूप में जाना जाता है। मान्यता है कि आज के ही दिन भगवान विष्णु का अवतार कहे जाने वाले गौतम बुद्ध का जन्म हुआ था, आज एक और सुखद संयोग है क्योंकि आज सोमवार है और इस वजह से आज सोमवती पूर्णिमा भी हैं और इस वजह से आज के दिन का महत्व काफी बढ़ गया है। आज सुबह से ही भक्तगण गंगा में डुबकी लगा रहे हैं।
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सुबह से ही हरिद्वार में भक्तों का तांता लगा हुआ है। लोग सुबह से ही गंगा नदी में पवित्र स्नान कर रहे हैं। पूर्णिमा के दिन दान-पुण्य करने की भी प्रथा है, ऐसा करने से इंसान को सुख, शांति और वैभव की प्राप्ति होती है। आज के बाद से वैशाख माह का अंत होता है इसलिए जो लोग इस पूरे महीने पवित्र नदियों में स्नान नहीं कर पाते हैं, वो आज के दिन गंगा में स्नान करते हैं, ऐसा करने से इंसान को पुण्य की प्राप्ति होती है।
भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की विशेष पूजा
जो लोग गंगा स्नान नहीं कर पा रहे हैं, वो आज घरों में ही गंगाजल डालकर स्नान करें। इसके बाद साफ वस्त्र पहनकर सूर्यदेव को अर्घ्य दें और बहते पानी में तिल प्रवाहित करें। आज के दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की विशेष पूजा होती है। चूंकि आज सोमवार ही है इसलिए आज भोलेनाथ की भी पूजा होनी चाहिए और शिवलिंग को जल अर्पित करना चाहिए।
ये हैं भगवान बुद्द के उपदेश
- जो अपने ऊपर विजय प्राप्त करता है वही सबसे बड़ा विजयी है।
- मनुष्य क्रोध को प्रेम से, पाप को सदाचार से, लोभ को दान से और झूठ को सत्य से जीत सकता है।
- पुष्प की सुगंध वायु के विपरीत कभी नहीं जाती, लेकिन मानव के सद्गुण की महक सब ओर फैल जाती है।
- हजार योद्धाओं पर विजय पाना आसान है, लेकिन जो अपने ऊपर विजय पाता है, वही सच्चा विजयी है।
- अभिलाषा सब दुःखों का मूल है।
- घृणा घृणा से कभी कम नहीं होती, प्रेम से ही होती है।
- पाप का संचय ही दुःखों का मूल है।












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