Bhai Dooj के दिन बहनों का व्रत और अनुष्ठान, भाइयों की लंबी उम्र की प्रार्थना, जानिए व्रत-कथा-आरती
Bhai Dooj की शुरुआत से जुड़े कई किस्से हैं, लेकिन सबसे लोक प्रचलित कथा भगवान कृष्ण और यमराज से जुड़ी है। bhai dooj pooja vrat katha brother sister yamraj sister yamuna
Bhai Dooj दीपावली के पांच दिवसीय त्योहार का अंतिम दिन दिन है। कई प्राचीन हिंदू धर्मग्रंथों में भाई दूज का उल्लेख भाइयों और बहनों के बीच बंधन और शाश्वत प्रेम के उत्सव के रूप में किया गया है। Bhai Dooj की शुरुआत से जुड़े कई किस्से हैं, लेकिन सबसे लोक प्रचलित कथा भगवान कृष्ण और यमराज से जुड़ी है। रक्षा बंधन और भाई दूज में एक हद तक काफी समानता है, लेकिन भाई दूज पर बहनें अपने भाइयों की कलाई पर धागा या राखी नहीं बांधती हैं। रक्षा बंधन में बहनें भाइयों को राखी बांधती हैं, आरती उतारती हैं, उपहार दिए जाने की परंपरा भी है। भाई दूज पर भी गिफ्ट का प्रचलन शुरू हो गया है। इस आधार पर दोनों त्योहारों में काफी समानता भी है। जानिए भाई दूज से जुड़ी कथा और पूजा-परंपरा-

भाई के बहन के घर जाकर भोजन करने की परंपरा
भाई दूज के दिन बहन भाई की लंबी आयु की कामना के साथ व्रत रखती है। धार्मिक प्रक्रियाओं को पूरा करने के बाद भाई बहन भोजन करते हैं। संस्कृत भाषा में इस दिन 'भगिनी गृहे भोजनम्' यानी भाई के बहन के घर जाकर भोजन करने की परंपरा है। भाई दूज त्योहार की शुरुआत के बारे में दिलचस्प कथा है। हर साल हिन्दू पंचांग के अनुसार कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीय तिथि को भैय्या दूज मनाया जाता है।

भाई दूज के कई नाम, जानिए पवित्र मुहूर्त
भौबीज, भाई फोन्टा, यम द्वितीया और भाई टीका जैसे नामों से भी प्रचलित भैया दूज इस साल 26 और 27 अक्टूबर को पड़ रहा है। जानकारों के मुताबिक भाई दूज के अनुष्ठान के लिए पवित्र काल 26 अक्टूबर (बुधवार) को दोपहर 02:43 बजे शुरू होकर गुरुवार दोपहर 12:45 बजे तक चलेगा।

भाई की लंबी आयु और समृद्ध जीवन की कामना
भाई दूज के दिन बहनें अपने भाई के माथे पर तिलक लगाती हैं। उपवास, पूजा जैसे अन्य अनुष्ठानों का पालन करके भाई की लंबी आयु और समृद्ध जीवन की कामना करती हैं। बदले में भाई अपनी बहनों को उपहार देते हैं और हमेशा उनकी रक्षा करने का वचन देते हैं।

Bhai Dooj Vrat Katha
पौराणिक मान्यता-कथा के अनुसार सूर्य की पत्नी का नाम संज्ञा है। संज्ञा की दो संतानों का नाम पुत्र यमराज और पुत्री यमुना है। यमुना भाई यमराज से अटूट स्नेह का प्रतीक हैं। कालांतर की कथा के मुताबिक यमुना भाई यमराज को अपने घर पर आने का निमंत्रण देती थीं, लेकिन व्यस्त होने के कारण यमराज यमुना के घर जाने में सफल नहीं हो पाते थे।

यमुना ने यमराज को भोजन कराया
कथा के मुताबिक कार्तिक शुक्ल द्वितीया तिथि के दिन यमराज बहन यमुना के घर अचानक पहुंचे। कथा के मुताबिक बहन के पास जाते समय यमराज ने नरक में निवास करने वाले जीवों को मुक्त कर दिया। बहन यमुना ने भाई यमराज के स्वागत और आवभगत में कोई कसर बाकी नहीं रखी। दिल से आदर-सत्कार के बाद यमुना ने तरह-तरह के व्यंजन बनाए और यमराज को भोजन करा कर उन्हें तृप्त किया। भोजन के बाद यमुना ने भाई यमराज के भाल पर तिलक भी लगाया।

यमुना ने भाई यमराज से क्या मांगा ?
प्रफुल्लित होकर बहन के घर से विदा लेते समय भाई यमराज ने यमुना से मनोवांछित वर मांगने को कहा। कथा के मुताबिक यमुना ने कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष में द्वितीया तिथि को हर साल घर आने की विनती की। यमुना ने कहा, जो भाई बहनों के घर जाकर आतिथ्य स्वीकार करे और बहन भाई को तिलक लगाकर भोजन कराए, ऐसे भाइयों के मन से यमराज का भय निकल जाए।

यमराज से मिला वरदान
बहन की बात सुनकर यमराज खुश हुए और यमुना को वरदान दिया। उन्होंने कहा, कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष में द्वितीया तिथि यानी भाई दूज के दिन अगर भाई-बहन यमुना नदी में डुबकी लगाएं तो उन पर यमराज का प्रकोप नहीं रहेगा। मान्यता है कि जब से यमराज ने यमुना को वर दिया उसी समय से बहन-भाई के अटूट बंधन का प्रतीक भाई दूज यह त्योहार मनाया जाने लगा। मान्यता है कि यम द्वितीया के दिन बहन के हाथ का खाना खाने वाले भाइयों को विविध सुख मिलते हैं।

यमुना मंत्र
भाई दूज के पूजा अनुष्ठान में यमुना माता की आरती भी शामिल है। मान्यता है कि आरती यमुना मां की पूजा-आरती से 'यमराज' के भय से मुक्ति मिलती है। अकाल मृत्यु के दोष का भी अंत होता है। यमुना जी की विशेष आरती और मंत्रों का जाप करने से भगवान श्री कृष्ण भी प्रसन्न होते हैं। भाई दूज पर यमुना चालीसा का पाठ भी किया जाता है। यमुना की आराधना के लिए मंत्र--
यमुना मंत्र---
- यमस्वसर्नमस्तेऽसु यमुने लोकपूजिते।
- वरदा भव मे नित्यं सूर्यपुत्रि नमोऽस्तु ते॥
- ऊँ नमो भगवत्यै कलिन्दनन्दिन्यै सूर्यकन्यकायै यमभगिन्यै श्रीकृष्णप्रियायै यूथीभूतायै स्वाहा।'
- ऊँ हीं श्रीं, क्लीं कालिन्द्यै देव्यै नम:'

यमुना आरती
ॐ जय यमुना माता, हरि ॐ जय यमुना माता, नो नहावे फल पावे सुख सुख की दाता
ॐ पावन श्रीयमुना जल शीतल अगम बहै धारा, जो जन शरण से कर दिया निस्तारा
ॐ जो जन प्रातः ही उठकर नित्य स्नान करे, यम के त्रास न पावे जो नित्य ध्यान करे
ॐ कलिकाल में महिमा तुम्हारी अटल रही, तुम्हारा बड़ा महातम चारों वेद कही
ॐ आन तुम्हारे माता प्रभु अवतार लियो, नित्य निर्मल जल पीकर कंस को मार दियो
ॐ नमो मात भय हरणी शुभ मंगल करणी, मन 'बेचैन' भय है तुम बिन वैतरणी
ॐ ॐ जय यमुना माता, हरि ॐ जय यमुना माता।
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