Basant Panchami 2022: जानिए सरस्वती पूजा का महत्व, पूजा विधि और शुभ-मुहूर्त
नई दिल्ली, 03 फरवरी। ज्ञान- बुद्धि, कला और विद्या की देवी मां सरस्वती की पूजा अर्चना का दिन बसंत पंचमी 05 फरवरी को है। इस दिन माघ शुक्ल पंचमी तिथि 05 फरवरी को प्रात: 03 बजकर 47 मिनट से शुरू हो रही है, यह 06 फरवरी को प्रात: 03 बजकर 46 मिनट तक है। मां सरस्वती की पूजा का मुहूर्त 05 फरवरी को प्रात: 07 बजकर 07 मिनट से दोपहर 12 बजकर 35 मिनट तक का है।

ऋषि पंचमी
बसंत का आगमन खुशी का प्रतीक माना जाता है। धरा पर खुशियों की जोश दिखाई पड़ता है। लोगों को सर्दी से राहत मिलती ही। आपको बता दें कि बसंत पंचमी होलिका और होली की तैयारी की शुरुआत का भी मानक है, जो चालीस दिन बाद होती है। शास्त्रो में इस दिन को ऋषि पंचमी के नाम से संबोधित किया है। इस दिन लोग पीले वस्त्र धारण करके मां सरस्वती की पूजा करते हैं क्योंकि इस दिन को कला और ज्ञान की माता सरस्वती का जन्मदिवस माना जाता है।

मां सरस्वती की बहन मां शारदे की भी पूजा होती है
स्कूलों में इस दिन विशेष रूप से मां सरस्वती की पूजा होती है। लोग इस दिन मां सरस्वती की बहन मां शारदे की भी पूजा करते हैं और उनसे ज्ञान और बुद्दि का वरदान मांगते हैं।
पौराणिक महत्व
अगर पौराणिक महत्व की बात करें तो ऐसा कहा जाता है कि अपने वनवास के दौरान भगवान श्रीराम अपने अनुज लक्ष्मण संग मां शबरी के आश्रम में जिस दिन पहुंचे थे वो दिन बसंत पंचमी का था। मां शबरी का आश्रम जहां था वो दंडकारण्य क्षेत्र था, जो कि एमपी और गुजरात के बीच का एरिया है, इसलिए इस क्षेत्र के वनवासी आज भी बसंत पंचमी के दिन शबरी आश्रम के एक शीला की पूजा करते हैं क्योंकि वो ऐसा मानते हैं कि इसी शीला पर प्रभु श्रीराम आकर बैठे थे।

ऐतिहासिक महत्व
तो वहीं इस दिन का ऐतिहासिक महत्व भी है। इसी दिन युद्द में 16 बार मोहम्मद गोरी को हराने वाले महान वीर पृथ्वीराज चौहान ने इसी दिन मोहम्मद ग़ोरी का मार गिराया था और खुद को भी खत्म कर दिया था। .ये दिन उनकी वीरता और आत्मबलिदान की कहानी कहता है इसलिए बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण है।
सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' का जन्मदिवस
यही नहीं बसंत पंचमी हिन्दी साहित्य की अमर विभूति महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' का जन्मदिवस भी है इसलिए ये दिन साहित्य के भी लिहाज से भी बहुत ज्यादा खास है।

पूजा विधि
- बसंत पंचमी के दिन छोटे बच्चों का विद्यारंभ करवाया जाता है।
- इस दिन प्रात:काल स्नानादि से निवृत होकर साफ-स्वच्छ वस्त्र पहनकर पूजा करनी चाहिए।
- एक चौकी पर श्वेत वस्त्र बिछाकर देवी सरस्वती का चित्र या मूर्ति स्थापित कर पूजन संपन्न करें।
- देवी को सफेद पुष्प और सफेद प्रसाद जैसे खीर और पेड़ा अर्पित करें।
- और इसके बाद मां सरस्वती की वंदना करनी चाहिए।
- और उनसे क्षमा याचना करने के बाद ज्ञान और बुद्दिका आशीष मांगना चाहिए।












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