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Basant Panchami 2020: बसंत पंचमी पर इस विधि से करें पूजा, पढ़ना ना भूलें सरस्वती वंदना

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नई दिल्ली। बसंत पंचमी का त्योहार कला और संगीत की देवी मां सरस्वती को समर्पित होता है। इस दिन मां सरस्वती की वंदना की जाती है। लोग अपने घरों में माता की प्रतिमा की पूजा-अर्चना करते हैं, इस पर्व को मुख्य रूप से बसंत यानि नई फसलों पर फूल आने के दिन के रूप में मनाया जाता है। इस बार ये त्योहार 29 जनवरी और 30 जनवरी को यानी दो दिन पड़ रहा है। लेकिन ज्योतिषविदों का मानना है कि गुरुवार को बसंत पंचमी मनाना श्रेष्ठ और शास्त्रों के अनुसार अधिक बेहतर होगा।

    Basant Panchami 2020: बसंत पंचमी पर पीले रंग का क्या है महत्व | Oneindia Hindi

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    इसके पीछे की वजह बताते हुए एक ज्योतिषविद का कहना है, शास्त्रों की मानें तो बसंत पंचमी का पूजन सूर्योदय के समय ही किया जाता है। इसलिए जिस दिन पंचमी तिथि सूर्योदय के समय उपस्थित होती है, उसी दिन बसंत पंचमी का अधिक महत्व होता है। 29 जनवरी को पंचमी तिथि सूर्योदय के समय उपस्थित नहीं होगी बल्कि दोपहर 10.45 बजे शुरू होगी। जबकि 30 जनवरी को सूर्योदय के समय से ही पंचमी तिथि उपस्थित रहेगी, इसलिए 30 जनवरी को बसंत पंचमी मनाना मान्य और श्रेष्ठ होगा।

    कैसे करें मां सरस्वती की पूजा?

    बसंत पंचमी के दिन सुबह के समय स्नान करने के बाद पूजा स्थल पर मां सरस्वती की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। इसके बाद गणेश जी और नवग्रह की पूजा करें। फिर मां सरस्वती की पूजा करें। सबसे पहले उनका गंगा जल से स्नान कराएं, फिर उन्हें सफेद और पीले फूल तथा माला अर्पित करें। मां सरस्वती सफेद वस्त्र पहनती हैं, इसलिए उन्हें श्वेत वस्त्र अर्पित करें या पहनाएं। माता को पीले रंग के फल चढ़ाएं और उनके चरणों में गुलाल अर्पित करें। इसके साथ ही उन्हें सिंदूर और श्रृंगार की वस्तुएं भी चढ़ाएं। फिर धूप और दीप से उन्हें सुशोभित करें।

    सरस्वती वंदना जरूर पढ़ें-

    या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता,

    या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना।

    या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता,

    सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥

    शुक्लां ब्रह्मविचार सार परमामाद्यां जगद्व्यापिनीं,

    वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्‌।

    हस्ते स्फाटिकमालिकां विदधतीं पद्मासने संस्थिताम्‌,

    वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम्‌॥

    पूजा के बाद हवन भी करना चाहिए-

    पूजा करने के बाद हवन भी करना चाहिए। इसके लिए सबसे पहले गणेश जी और नवग्रह के नाम से हवन करें। इसके बाद 'ओम श्री सरस्वत्यै नम: स्वहा' मंत्र से 108 बार माता सरस्वती के लिए हवन करें। फिर सरस्वती माता की आरती करें और उन्हें अपनी मनोकामना बताएं।

    Basant Panchami 2020: आज और कल है बसंत पंचमी, जानिए किस दिन मनाना बेहतर

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    English summary
    Basant Panchami 2020: know all about worship of goddess saraswati, puja vidhi , vandana and hawan mantra.
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