Aditya L1: भारत ही नहीं इन जगहों पर भी पूजे जाते हैं सूर्य देव, जानें आस्था से जुड़े रोचक पहलू
Aditya L1: सूर्य भगवान को सात घोड़ों के रथ पर सवार धरती पर आकर प्रकाशमय और ऊर्जा से भर देते हुए हमने अपनी कल्पनाओं में देखा है, लेकिन अब धरती से PSLV रॉकेट पर सवार होकर आदित्य L1 सूर्य की ओर जा चुका है। जी हां ISRO अपने पहले सूर्य मिशन आदित्य L1 को सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया है जो 127 दिन बाद L1 प्वॉइंट पर पहुंचकर सूर्य पर स्टडी करेगा।
सूर्य का महत्व विज्ञान के अलावा आम इंसान के जीवन और उसकी आस्था से जुड़ा हैं। भारत ही नहीं दुनिया भर में विभिन्न सभ्यताओं, संस्कृतियों और धर्मो में सूर्य को देवता माना जाता है और प्रमुख रूप से सूर्य की पूजा की जाती है। आइए जानते हैं...

ब्रह्माण्ड की आत्मा 'सूर्य'
मानव सभ्यता की शुरूआत से दुनिया के कोने-कोने में सूर्य देवता पूजे जाते रहे हैं। सूर्य वैदिक देवता हैं और वैदिक काल से ही उनकी पूजा हो रही है। मानव सभ्यता के लिए ऊर्जा का स्रोत सूर्य ही है। अंधकार से डूबी धरती पर सूर्य ही रोशनी फैलाता हैं। वेदों में सूर्य को ब्रह्मांड की आत्मा कहा गया है क्योंकि ये ऊर्जा का स्रोत हैं। इसलिए तो दुनिया के हर कोने में सूर्य को विभिन्न तरीकों से पूजा जाता है।
ऋग्वैदिक युग से पूजे जा रहे सूर्य देवता
ऋग्वैदिक युग से सूर्य की पूजा होती आई है। ऋग्वेद की ऋचाओं में इसका वर्णन है। वेद में सूर्य को 'सविता' भी कहा गया है। जगत और जीवों की आत्मा सूर्य देवता सात घोड़े ( सप्ताह के सात दिन का प्रतीक हैं) जगत को प्रकाशित करते हैं।
सूर्य पूजा की हुई शुरूआत
कुछ रिपोर्ट के अनुसार सिकंदर के अभियानों के बाद सीरिया में सूर्य पूजा की शुरूआत हुई और ये ईरानी सम्राज्य था मिश्र यानी सूर्य की उपासना ईरान से रोम तक पहुंची और उसके बाद मिश्र और वहां पर पूजा के लिए सूर्य मंदिर बनाए गए। सूर्य देवता जिन्हें 'रे' कहा गया वो कई जगहों पर सृष्टिकर्ता के रूप में पूजे जाते हैं।
प्राचीन काल में सूर्य देवता की पूजा
मित्तनी, हित्ती, मिस्र के राजा भी पूजा करते थे लेकिन उनका सूर्यपूजा का माध्यम भारत ही था। मिस्र, एज्जेक और इंका सभ्यताओं, संस्कृतियों में सूर्य को एक दैवी शक्ति माना जाता है। जिनके पास जीविका और प्रजनन क्षमता की शक्ति है।
हिंदू धर्म में सूर्य देवता की पूजा
हिंदू धर्म जो कि दुनिया का सबसे पुराने धर्मों में एक है उसमें प्राचीन काल से ऊर्जा और सौर्य प्रदान करने वाले सूर्य देवता की पूजा होती आई है। बिहार में छठ पूजा में उगते ही नहीं ढलते सूर्य की पूजा की जाती है। वहीं उत्तर भारत से लेकर दक्षिण भारत तक मकरसंक्रान्ति समेत अन्य पर्व और त्यौहारों पर सूर्य देव की पूजे जाते हैं। सूर्य प्रकाश ऊर्जा और जीवन शक्ति का अवतार है। ये ही कारण है कि हिंदू धर्म में जीवनदायिनी ऊर्जा प्रदान करने वाले सूर्य को जल अर्पित कर नमस्कार करने का परंपरा है।
इस्लाम की सूर्य से जुड़ी आस्था
मुसलमान जब नमाज पढ़ते है तो मक्का में काबा की ओर अपना चेहरा रखते हैं और ये दिशा सूर्य की स्थिति से निर्धारित होती है। मक्का की दिशा बताते में सूर्य की भूमिका मुसलमानों को उनके धर्म के पालन के लिए लौकिक संदर्भ बिंदु के रूप में इसकी अहमियत दर्शाती हैं।
सिख और बौद्ध धर्म
सिख धर्म में सूर्य देवाता तो नहीं माने जाते है लेकिन आध्यत्मिक महत्व है। सिख धर्म में प्रकाश की अवधारणा परमात्मा के साथ समझ ओर संबंध का प्रतीक है। इसके अलावा बौद्ध धर्म में भी इसे पूजा जाता है।
अमेरिका में सूर्य से जुड़ी है ये अजीब मान्यता
'तोनातिहू' जो प्रकाश बिखेर रहे हैं जो मध्य अमेरिका के लोगों के सूर्य हैं। वो इंसानों को फसल देते हैं और इंसानों को जीवन देते हें। अमेरिकी गाथाओं में जिक्र है कि जब कई युगों तक दुनिया अंधेरे में डूबी थी तब सूर्य स्वर्ग में था इसके बाद सूर्य ने ब्रह्मांड में अवतार लिया और चार युगों से छाया अंधेरा छटा और प्रकाशमय हो गया। मान्यता है कि ये सूर्य का पांचवा रूप था और इससे पहले सूर्य का पांचवां रूप है और इससे पूर्व चार युगों में चार सूर्य आए और खत्म हुए। इस तरह धरती का भी संहार हो गया।
यूनान में सूर्य की पूजा
प्लेटो ने अपनी बुक "रिपब्लिक' में सूर्य उपासना का वर्णन किया है। यूनानी पूजा में सूर्य पूजा का विशेष महत्व हे। सूर्यदेव को 'हेलियोस' कहा जाता है। जो घोड़े के रथ पर सवार होकर खुशहाली और उन्नति प्रदान करते है।
जापान में माता के रूप में पूजे जाते हैं सूर्य
जापान में सूर्य को माता के रूप में पूजा जाता है। जापानी गाथाओं के अनुसार 'अमतेरासू-ओमिकानी' जो 'सूर्य माता' हैं और स्वर्ग से धरती पर रोशनी बिखेर रही हैं। जापान मं होनशू द्वीप के अलावा अन्य मंदिर हैं जहां पर अमतेरासू (सूर्य) के अन्य रूप जिंगू, इस्ले-जिंगू स्थापित किए जाते हैं। जापान के सम्राट को सूर्य का वाहक माना जाता है इसलिए उनका भी बहुत सम्मान किया जाता है।
इरान में सूर्य देव की पूजा
इरान में पौराणिक गाथाओं में सूर्यदेव मित्र के रूप में पूजे जाते हैं। भारतीय गाथाओं और वैदिक साहित्य में मिश्र को सूर्य का सहयोगी देवता माना गया है। इसके अलावा ग्रीक और रोमन लोग भी मित्र देव को सूर्य का प्रतीक मानकर पूजते हैं।
मिश्र में सूर्य से जुड़ी मान्यता
इसके अलावा मिश्र में उदय होते सूर्य को होरूम, दोपहर के सूर्य को रा ओर अस्त होते सूर्य को ओरिरिस कहते है। पौराणिम काल से यहां सूर्य देवता के रूप में पूजे जाते है। मान्यता है कि दुनिया पर रा यानी सूर्य देवता का ही राज हे वो पूरी दुनिया की रक्षा कर रहे और मनुष्यों का असुरों से संरक्षण कर रहे हैं।












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