Haryana Land Price: जमीन के छोटे-छोटे टुकड़ों का बाजार भाव तय करेगी हरियाणा सरकार, मिलेंगे फायदे

गुरुग्राम। राज्य सरकार गुरुग्राम, फरीदाबाद सहित हरियाणा में जमीन के छोटे-छोटे टुकड़ों का बाजार भाव तय करेगी। एक अधिकारीने बताया कि, हरियाणा सरकार दो विकास परियोजनाओं के बीच में आने वाली बेकार पड़ी जमीन की खरीद के लिए नीति बनाएगी। हरियाणा सरकार तीन मूल्यांकनकर्ताओं से रिपोर्ट लेकर जमीन का औसत मूल्य (मार्केट मूल्य) तय किया जाएगा।

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जनसंपर्क एवं सूचना विभाग के अनुसार, हरियाणा में विकास परियोजनाओं को गति प्रदान करने के लिए प्रदेश सरकार ने हर जिले, शहर और गांव में जमीनों की बाजार दरें तय करने का निर्णय लिया है। जमीनों के रेट तय करने के लिए प्रदेश सरकार ने नीति बनाई है। यह नीति उन जमीनों की खरीद के लिए सबसे अधिक कारगर होगी, जो दो विकास परियोजनाओं की जमीन के बीच में आती हैं और उसका खास उपयोग नहीं हो पाता। लोग ऐसी जमीन के मुंह मांगे दाम वसूलने की फिराक में रहते हैं, लेकिन रेट तय हो जाने के बाद वह ऐसा नहीं कर सकेंगे और उन्हें बाजार रेट पर सरकार को यह जमीन देनी ही होगी।

सरकार ने सभी विभागों, बोर्डों, निगमों, पंचायती राज संस्थाओं और शहरी स्थानीय निकायों के लिए भूमि की बाजार दर के निर्धारण के लिए नीति तैयार की है। वित्तायुक्त और राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव संजीव कौशल ने बताया कि भूमि के दरें निर्धारित करने के समितियों का गठन हो रखा है, लेकिन उनके द्वारा अलग-अलग मापदंड अपनाए जाने से कानूनी जटिलताएं बढ़ रही हैं। भूमि का बाजार भाव निर्धारित करने में एकरूप मापदंड बनाने के उद्देश्य से यह नीति बनाई गई है।

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संजीव कौशल के अनुसार निजी निकायों की परियोजनाओं की भूमि के बीच में कई बार अप्रयुक्त (बेकार) जमीन आ जाती है। इस जमीन की खरीद की कोई स्पष्ट नीति नहीं है। कई बार तो ऐसी जमीनों की बहुत अधिक कीमत चुकानी पड़ती है, जिससे विकास परियोजनाओं में तो देरी होती ही है, साथ ही राजस्व का भी नुकसान हो रहा है। राजस्व और आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से संबंधित आयकर विभाग, भारतीय स्टेट बैंक और सरकारी स्वामित्व वाली बीमा कंपनियों के पंजीकृत मूल्यांकनकर्ताओं को सूचीबद्ध करेगा। पैनल में शामिल मूल्यांकनकर्ताओं के लिए आचार संहिता को भी अधिसूचित किया जाएगा, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि मूल्यांकनकर्ता सही निर्णय दें और ऐसा नहीं करने पर उन्हें पैनल से हटाया जा सके।

तीन मूल्यांकनकर्ताओं द्वारा रिपोर्ट प्राप्त की जाएगी, जिसके सात दिनों के भीतर स्थायी समिति की बैठक होगी। डिविजनल कमिश्नर की अध्यक्षता में बनी स्थायी समिति में तीनों मूल्यांकनकर्ताओं के रेट रखे जाएंगे और उनका औसत निकाला जाएगा। स्थायी समिति इस प्रक्रिया के अनुसार भूमि के बाजार मूल्य का निर्धारण करेगी। इससे न तो सरकार को परेशानी होगी और न ही जमीन बेचने वालों को किसी तरह की दिक्कत उठानी पड़ेगी।

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