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George Soros: दुनिया के लिए जॉर्ज सोरोस जैसे पूंजीपति क्यों खतरनाक हैं?

जून 1993 में द इंडिपेंडेंट को दिए एक इंटरव्यू में जॉर्ज सोरोस ने कहा था कि मैं एक भगवान हूं जो सब कुछ कर सकता है।

Billionair

अमेरिका के राजनैतिक और आर्थिक जगत में जॉर्ज सोरोस एक बड़ा नाम है। वे अति लिबरल झुकाव वाले अरबपतियों के एक बड़े ग्रुप को लीड करते हैं जोकि दुनियाभर में अपने पैसे के दम पर कुछ भी करने की इच्छा रखते हैं। इस मुहिम को अमेरिका में शेडो पार्टी का नाम दिया गया है। यह पार्टी न कभी चुनाव नहीं लड़ेगी और न ही मतदाताओं को लुभाएगी। हालांकि, प्रत्येक चुनाव में इनका पूरा प्रभाव बना रहता है। जैसे साल 2004 में अमेरिका में इस शेडो पार्टी के लिबरल अरबपतियों ने 300 मिलियन अमेरिकी डॉलर खर्च करके डेमोक्रेटिक पार्टी को जिताने के भरसक प्रयास किये। इस दौरान, सोरोस ने जॉर्ज बुश को राष्ट्रपति पद से हटाने के लिए पूरा जोर लगा दिया था। वाशिंगटन पोस्ट को दिए एक इंटरव्यू के मुताबिक सोरोस ने खुद स्वीकार किया कि अगर कोई गारंटी लेता है बुश को सत्ता से हटाने की तो वह पैसा पानी की तरह बहाने के लिए तैयार हैं।

अधिकतर अमेरिकी लेखकों का मानना है कि सोरोस के काम करने का तरीका एकदम लेनिन जैसा है। वह लोगों को भड़काते हैं और तख्तापलट एवं क्रांति की मदद से सत्ता परिवर्तन करवाते हैं। सोरोन की ओपन सोसाइटी फाउंडेशन इसी काम में लगी है। गौरतलब है कि इसका 50 देशों में नेटवर्क फैल चुका है। जोर्जिया में साल 2003 के सत्ता परिवर्तन के लिए "रोज रेवोलुशन" में सोरोस ने ही पैसा लगाया था। इस बात की पुष्टि खुद सोरोस ने लॉस एंजिल्स टाइम्स में यह कहते हुए की, "जोर्जिया में जो कुछ हुआ, उससे मुझे खुशी है और मुझे इसमें योगदान करने में बहुत गर्व महसूस हो रहा है"।

सोरोस ने ओपन सोसाइटी फाउंडेशन के चेयरमैन पद के लिए अर्येह नाइएर नाम ने व्यक्ति को चुना। इस व्यक्ति के काम करने का तरीका बेहद खतरनाक है। इसने 1959 में छात्रों का एक ग्रुप - स्टूडेंट फॉर डेमोक्रेटिक सोसाइटी बनाया। इस दौर में अमेरिका और वियतनाम में युद्ध चल रहा था। इस संस्था ने अमेरिका की यूनिवर्सिटी में अमेरिका के खिलाफ आन्दोलन चलाया और बाद में अंडरग्राउंड होकर अमेरिका के खिलाफ ही वॉर छेड़ दिया। इसमें पेंटागन और कैपिटल पर बम हमलें भी शामिल थे। अर्येह नाइएर ने ओपन सोसाइटी के चेयरमैन पद पर 1993 से 2012 तक काम किया।

सोरोस की लिखी किताब 'द अल्केमी ऑफ फाइनेंस' में उन्होंने खुद लिखा है कि "मेरा सबसे बड़ा डर बुश की वह सोच है जिससे आतंकवादियों को खत्म किया जा रहा है।" इसलिए अमेरिका में आतंकवादियों की पैरवी करने वाली एक वकील लेनी स्टीवर्ट को ओपन सोसाइटी ने सितम्बर 2002 में 20000 अमेरिकी डॉलर दिए थे। खास बात यह है कि इस राशि का जिक्र न तो ओपन सोसाइटी की वार्षिक रिपोर्ट में है और न ही उसकी वेबसाइट पर। स्टीवर्ट ने अमेरिका के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर 1993 के हमलों के साजिशकर्ता आतंकवादियों की भी पैरवी की थी। खास बात यह है कि जो आतंकी 1993 में शामिल थे, वही 9/11 के हमले के मुख्य साजिशकर्ता थे। इस पूरी कवायद में अमेरिकन सिविल लिबर्टीज यूनियन (ACLU) का नाम भी सामने आता है जिसे ओपन सोसाइटी ने 1998 से 2004 तक 19 मिलियन अमेरिकी डॉलर दिए। एसीएलयू ने 9/11 के बाद अमेरिका में सुरक्षा के लिए अपनाये गए लगभग सभी उपायों का खुलकर विरोध किया था। आतंकवादियों के कथित मानवाधिकारों की हिमायती ह्यूमन राइट्स वाच (HRW) भी सोरोन की ओपन सोसाइटी का एक घटक है।

एक बात और ध्यान देने वाली है। सोरोस और हिलेरी क्लिंटन की बहुत पुरानी और गहरी दोस्ती है। सोरोस ने ओबामा के पहले चुनाव में आर्थिक सहायता की लेकिन ओबामा ने उन्हें ज्यादा अहमियत नहीं दी। इसलिए एक बार सोरोन ने द न्यूयॉर्क टाइम्स से कहा था कि ओबामा मेरी सबसे बड़ी निराशा साबित हुए। फिर 2010 के आसपास सोरोस ने कहा कि "अगर ओबामा हमें वह नहीं दे सकते जो हम चाहते है तो अब विकल्प खोजने का समय आ गया है। फिर इन्होने हिलेरी क्लिंटन की दावेदारी पर पैसा लगाना शुरू किया लेकिन उसमें भी कोई खास सफलता नहीं मिली। फिर जो बिडेन की दावेदारी को सोरोस ने खुलकर समर्थन दिया। साल 2020 में चुनावों से पहले, हंगरी के एक एमपी गेर्ग्ली गुल्येस ने कहा था, "हम डोनाल्ड ट्रम्प को समर्थन देते है क्योंकि जो बिडेन को जॉर्ज सोरोस का साथ मिला हुआ है जोकि अच्छी शुरुआत नहीं है।

ब्लैक लाइव्स मैटर आन्दोलन में भी ओपन सोसाइटी ने 220 मिलियन अमेरिकी डॉलर देने का वादा किया था। दरअसल वॉल स्ट्रीट प्रोटेस्ट से लेकर अमेरिका में जितने भी वामपंथी झुकाव वाले आन्दोलन हुए हैं, उसमें कहीं न कहीं सोरोस की उपस्थिति मिल जाएगी।

अमेरिका और हंगरी के अलावा सोरोस का सबसे अधिक प्रभाव युक्रेन में है। यूक्रेनियन समाचार पत्र वेस्ती हर साल युक्रेन के 100 प्रभावशाली लोगों की एक लिस्ट जारी करता है। साल 2019 में उसने प्रेसिडेंट जेलेंसकी के बाद सोरोस को स्थान दिया। दरअसल, सोरोस ने युक्रेन पर 1991 से अभी तक कई मिलियन अमेरिकी डॉलर खर्च कर दिए हैं। इसमें युक्रेन का ऑरेंज रेवोलुशन भी इसी पैसे की देन है।

साल 2010-11 में अरब स्पिंग के दौरान सोरोस ने इसे क्रांतिकारी सकारात्मक प्रक्रिया बताया था। जबकि यह बात सार्वजनिक रूप से सामने है कि अरब स्प्रिंग ने अलकायदा के वैचारिक संगठन मुस्लिम ब्रदरहुड को इस्लामिक जगत में बेहद प्रभावशाली बना दिया।

सत्ता के अलावा सोरोस का एक और शौक है। दरअसल, सोरोस ने जैसे एक बार ब्रिटेन की करेंसी पाउंड का अवमूल्यन किया था, ऐसे ही उन्होंने थाईलैंड की भात का भी हाल किया था। सोरोस के कारण ही थाई सेन्ट्रल बैंक ने अपनी मुद्रा की कीमत डॉलर के मुकाबले 20 प्रतिशत तक कम कर दी थी। इस बात पर मलेशिया के प्रधानमंत्री 1997 में ASEAN के विदेश मंत्रियों की एक बैठक में बहुत नाराज हुए थे। उन्होंने कहा कि सोरोन अपनी ओपन फाउंडेशन के माध्यम से इस क्षेत्र की मुद्राओं को कमजोर करने में लगे हुए हैं।

साल 1994 में सोरोस ने अमेरिकी केमिकल बैंक के साथ मिलकर भारत में किसी ग्रीनफिल्ड प्रोजेक्ट्स के लिए भी ऑफशोर वेंचर कैपिटल की शुरुआत की थी। इसकी राशि 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर थी। इसमें कुछ भारतीय जैसे प्रदीप शाह और एनके प्रसाद भी शामिल थे। इसका क्या हुआ इसकी जानकारी खास उपलब्ध नहीं है।

साल 2016 में एक वेबसाइट ने ओपन सोसाइटी के ईमेल का डाटा चुरा लिया था। इसमें करीब 2500 फाइल्स थी। जिसमें एंटी-इजरायल और प्रो-मुस्लिम संगठनों को फंडिंग देने जैसे सबूत मिले थे। इसमें एक डॉक्यूमेंट एक्सट्रीम पोलराईजेशन एंड ब्रेकडाउन इन सिविक डिसकोर्स नाम से भी था। सितम्बर 2018 में ईरान की पार्लियामेंट में ईरान के विदेश मंत्री मोहम्मद जावेद जरीफ ने बताया कि हमारी सरकार ओपन सोसाइटी के साथ कई सालों से काम कर रही है। इजरायल की स्ट्रेटिजिक अफेयर्स मिनिस्ट्री के मुताबिक सोरोस ने हमास से जुड़े कई संगठनों को पैसा दिया है।

(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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