February Temperature: फरवरी में कहां से आ गयी इतनी गर्मी?
फरवरी के महीने में रिकार्ड तोड़ गर्मी पड़ रही है। देश के कई हिस्सों में मौसम सामान्य से अधिक गर्म हो गया है। इससे इस साल गर्मी अधिक पड़ने और लू चलने की स्थिति लंबे समय तक रहने की संभावना बन रही है।

February Temperature: हालांकि देश के कुछ इलाकों खासकर उत्तर व पश्चिम के इलाकों में गर्म वातावरण होने से आगामी गर्मी के बारे में अनुमान लगाना ठीक नहीं है। गर्मी का मौजूदा झोंका दो-चार दिनों में चला जाएगा, पर भारतीय मौसम विभाग का कहना है कि उसके बाद भी तापमान सामान्य से अधिक रहेगा।
फरवरी महीने में अधिकतम तापमान पूरे देश के औसत की गणना करने पर करीब 28 डिग्री सेंटिग्रेड रहता है। यह गणना तीस साल के आंकड़ों के आधार पर की गई है। इसे सामान्य तापमान माना जा सकता है। इस दौरान न्यूनतम तापमान 15 डिग्री सेंटीग्रेड रहता है। हालांकि अधिकतम और न्यूनतम तापमान में इलाकेवार विभिन्नता रहती है। उत्तर-पश्चिम, पश्चिम, केंद्रीय और पूर्वी प्रदेशों में सामान्य तापमान अधिक रहता है।
पिछले सप्ताह भर से समूचे उत्तरी व पश्चिमी राज्यों में तापमान सामान्य से 5 से 11 डिग्री अधिक देखा गया। राजस्थान, गुजरात व महाराष्ट्र आश्चर्यजनक रूप से गरम रहे। कहीं-कहीं तापमान 40 डिग्री सेंटिग्रेड तक पहुंच गया। राजधानी दिल्ली में भी तापमान 33 डिग्री सेंटिग्रेड से अधिक हो गया जो सामान्य अधिकतम तापमान से 5 डिग्री सेंटिग्रेड अधिक है। हालांकि तापमान में अधिक बदलाव अपेक्षाकृत ठंडे प्रदेश जैसे उत्तराखंड व हिमाचल प्रदेश में देखा गया जहां कुछ जगहों पर तापमान सामान्य से 10-11 डिग्री सेटिग्रेड अधिक आंका गया।
इस तरह अधिकतम तापमान में बढ़ोतरी को लू चलने जैसी स्थिति माना जाता है। अगर मैदानी इलाके में तापमान 40 डिग्री सेंटिग्रेड से अधिक या सामान्य से 4.5 डिग्री सेंटिग्रेड अधिक हो तब कहा जाता है कि लू चल रही है। पहाड़ी इलाकों के लिए यह सीमा 30 डिग्री सेंटिग्रेड है और तटीय इलाकों के लिए 37 डिग्री सेंटिग्रेड। इस परिभाषा के आधार पर कहें तो पिछले कुछ दिनों से देश के कई इलाकों में लू चल रही है। हालांकि भारतीय मौसम विभाग लू चलने की घोषणा केवल अप्रैल से जुलाई के बीच करता है, फरवरी-मार्च में नहीं।
इन दिनों मौसम से संबंधित किसी असामान्य परिघटना का जिम्मेवार जलवायु परिवर्तन को ठहरा दिया जाता है। हर असामान्य परिघटना के पीछे जलवायु परिवर्तन की भूमिका रहती भी है। हालांकि मौसम की सभी असामान्य घटना किसी सामान्य सिध्दांत पर आधारित नहीं होती। असामान्य घटना के पीछे कई स्थानीय कारण हो सकते हैं।
मौसम विभाग ने गर्मी के मौजूदा दौर को कई कारणों से हुआ बताया है। पश्चिमी विक्षोभ का पूरे फरवरी नहीं होना प्रमुख कारण है जिसकी वजह से हल्की वर्षा हो जाती है। इस वर्ष जनवरी-फरवरी में ज्यादातर इलाके में तनिक भी वर्षा नहीं हुई है। वर्षा होने से तापमान अधिक बढ़ नहीं पाता। देश के 717 जिलों में से केवल 110 जिलों अर्थात छठे हिस्से में फरवरी में सामान्य वर्षा हुई है। मैदान कमोबेश सूखे रहे, पहाड़ों पर भी वर्षा या बर्फबारी बहुत कम हुई।
मौसम विभाग के अनुसार, दक्षिण गुजरात में तूफान-रोधी परिस्थिति बनना भी तापमान बढ़ने का एक कारण है। अभी गुजरात के विभिन्न इलाकों में सर्वाधिक तापमान देखा गया है। इसका प्रभाव पश्चिमी तट के निकटवर्ती राज्यों राजस्थान व महाराष्ट्र में भी देखा जा रहा है। दिल्ली, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक में इसका प्रभाव है। महाराष्ट्र और गोवा के इलाके में सामान्य से हल्की समुद्री हवा तूफान-रोधी परिस्थिति का प्रभाव बढ़ा रहा है। लेकिन अगले दो-तीन दिन में इस पूरे इलाके में तापमान दो-तीन डिग्री कम हो जाने की संभावना है।
वैश्विक स्तर पर इस वर्ष को पिछले दो वर्षों के मुकाबले थोड़ा अधिक गर्म रहने की संभावना जताई जा रही है। इसका कारण ला नीना परिघटना के समाप्त होने की संभावना है। ला नीना में प्रशांत महासागर की उपरी सतह अपेक्षाकृत ठंडी रहती है। इसका असर वैश्विक जलवायु पर होता है। ला नीना का प्रभाव पृथ्वी के वातावरण पर शीतलीकारक होता है।
पिछले वर्ष 2022 का औसत तापमान पूर्व औद्योगिक स्थिति से 1.15 डिग्री सेंटिग्रेड अधिक था, जिससे यह भारत में अब तक का पांचवा सबसे गर्म वर्ष रहा। विश्व मौसम संगठन का कहना है कि अगर अल नीना प्रभाव नहीं रहता तो यह वर्ष उल्लेखनीय रूप से गर्म होता। अल नीना का प्रभाव अगले दो महीने में एकदम खत्म हो जाएगा। इसलिए इस वर्ष गर्मी अधिक रहने की पूरी संभावना बन रही है। रिकार्ड के अनुसार वर्ष 2016 अब तक का सबसे गर्म वर्ष रहा है जब वैश्विक तापमान पूर्व औद्योगिक स्थिति से 1.28 डिग्री सेंटिग्रेड अधिक रहा था। वर्ष 2015 से 2022 के कालखंड अब तक सबसे गर्म रहा है।
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असामान्य ढंग से ऊंचा तापमान और दूसरी चरम मौसमी घटनाएं अब आश्चर्यजनक नहीं रह गई हैं। हर महीने या साल रिकार्ड बनते-बिगड़ते हैं। वैश्विक गर्मी ने मौसम-चक्र को असामान्य ढंग से बदल दिया है। इसलिए हर जगह तापमान बढ़ना ही दर्ज नहीं हो रहा, कई जगह असामान्य ढंग से ठंढ़े का दौर भी देखा गया है। केवल सूखे का दौर नहीं आ रहा, असामान्य ढ़ंग से अतिवृष्टि भी होने लगी है। मौसम के नए चक्र के बारे में कोई पूर्वानुमान लगाना कठिन हो गया है। यह कठिनाई दुनिया भर में मौसम से जुड़ी सभी वैज्ञानिक संस्थाओं के सामने है।
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(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)
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