Yogi Government 2: सपने साकार लेकिन चुनौतियां बरकरार
दूसरे कार्यकाल के पहले साल में भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पिछले पांच साल के कार्यकाल की तर्ज पर ही संकल्पों को पूरा करते हुए दिखाई दे रहे हैं लेकिन कुछ चुनौतियां जस की तस बरकार हैं।

Yogi Government 2: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दूसरे कार्यकाल का भी एक वर्ष पूरा हो गया। योगी अब प्रदेश के ऐसे पहले राजनेता बन गए हैं जो छह वर्ष से लगातार मुख्यमंत्री की कुर्सी संभाल रहे हैं।
दूसरे कार्यकाल के पहले एक साल में मुख्यमंत्री योगी पहले से ज्यादा परिपक्व, आक्रामक, मंझे हुए राजनेता की पहचान बनाते दिख रहे हैं। लगातार दो विशाल आकार के बजट लाकर और ''ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट' में उद्योगपतियों के साथ लगभग 33.50 लाख करोड़ रुपये से अधिक के समझौतों पर सहमति बनाकर संदेश दिया गया कि प्रदेश को संपन्न राज्य की श्रेणी में स्थान दिलाने के लिए तेजी से काम हो रहा है। इससे बेरोजगारी पर भी नियंत्रण लगेगा, लोगों का आर्थिक जीवन स्तर भी सुधरेगा। पर, इसके लिए केंद्र व राज्य दोनों में डबल इंजन (भाजपा की) सरकारें होना जरूरी हैं।
इस आवश्यकता को ठीक से समझाने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी समिट में आए। उन्होंने 2014 से लेकर 2017 तक प्रदेश में गैर भाजपा सरकार होने के कारण केंद्र की योजनाओं को प्रदेश में साकार करने में आड़े आई अड़चनों को गिनाकर 'डबल इंजन सरकार' की जरूरत समझाई। प्रधानमंत्री ने बताया भी कि पहले अपराधियों को बढ़ावा मिलने के कारण प्रदेश में उद्योग नहीं लगते थे। उस माहौल को योगी सरकार ने बदला है। पर, यह काम पूरा तभी होगा जब केंद्र में भी भाजपा की सरकार ही रहेगी ।
बजट से समीकरण साधने की कोशिश
बजट के जरिये भी 2024 के मद्देनजर यूपी की राजनीतिक जमीन पर भाजपा को मजबूती देने की कोशिश हुई है, जिससे देश में सबसे ज्यादा 80 लोकसभा सीटों वाले प्रदेश में 2024 की चुनावी बिसात पर भाजपा की चाल कमजोर न दिखे। इसके लिए बदलते उत्तर प्रदेश के नारे को चरितार्थ करने के लिए 'आत्म निर्भर भारत के लिए आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश' के मंत्र पर बजट का फोकस दिखा।
इस साल के बजट में 19 प्रतिशत विकास दर की बढ़ोतरी का लक्ष्य रखकर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को एक ट्रिलियन डॉलर बनाने की घोषणा को अमली जामा पहनाने की कोशिशों को दिखाया गया। अर्थशास्त्री प्रो. ए.पी. तिवारी कहते हैं कि बजट में 2022 के विधानसभा चुनाव में किए गए 130 वादों में 110 को पूरा करने के लिए इस बजट में 66 हजार करोड़ रुपये की व्यवस्था यह समझाने का प्रयास है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं हुआ है बल्कि व्यवस्था भी बदलने का प्रयास हो रहा है। वो सिर्फ चुनाव में वादे नहीं करते बल्कि उन्हें पूरा करने पर ईमानदारी से काम भी करते हैं।
सबको संतुष्ट करने की कोशिश
योगी सरकार के दूसरे कार्यकाल के पहले एक वर्ष के कार्यों को देखने से पता चलता है कि भाजपा के रणनीतिकार 2024 में सबसे ज्यादा लोकसभा सीटों वाले उत्तर प्रदेश के विकास व बदलाव के संदेश के साथ चुनावी मैदान में उतरना चाहते हैं। साथ ही सबकी फिक्र का संदेश भी देना चाहते हैं। शायद इसीलिए बजट में किसानों के निजी नलकूपों के बकाया बिजली बिलों की माफी, विभिन्न क्षेत्रों के लिए शुरू की जा रही नई योजनाओं के लिए 32,721 करोड़ रुपये की व्यवस्था, 'पूर्वांचल एक्सप्रेस वे' और 'बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे' के लोकार्पण का उल्लेख करते हुए मेरठ से प्रयागराज के लिए बन रहे 'गंगा एक्सप्रेस वे' को 2025 में प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ से पहले निर्मित करा लेने का संदेश दिया गया। एयरपोर्ट व फ्लाई ओवर के कामों को रफ्तार के लिए धन की व्यवस्था, उद्योगों से लेकर शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में अवस्थापना के साथ अन्य जरूरी सुविधाएं मुहैया कराने के प्रयासों से विकास और बदलाव पर भरोसा बढ़ाने की कोशिश दिखी।
'एक जिला-एक उत्पाद', 'एक जिला-एक मेडिकल कॉलेज' की तर्ज पर 'एक जिला-एक खेल' योजना से जिलों के पारंपरिक ग्रामीण खेलों को प्रोत्साहन के संदेश से युवाओं को भी साधने का प्रयास है। प्रत्येक ग्राम पंचायत में खेल मैदान का संकल्प, टैबलेट और स्मार्ट फोन वितरण के लिए धन की व्यवस्था भी युवाओं की भाजपा के साथ लामबंदी बढ़ाने का प्रयास ही है ।
'ब्रांड योगी' पर मोदी की मुहर
आजमगढ़ व रामपुर लोकसभा सीटों के उपचुनाव में भाजपा की जीत तथा विधानसभा की रामपुर सीट के उपचुनाव में विजय से भाजपा को मिली मनोवैज्ञानिक व रणनीतिक बढ़त का श्रेय भी योगी के खाते में जाएगा। राष्ट्रपति चुनाव में विपक्षी खेमे में सेंधमारी तथा ओमप्रकाश राजभऱ जैसे नेताओं को विपक्षी खेमे के ही खिलाफ खड़़ा करने में कामयाबी से वह यह संदेश देने में भी कामयाब रहे कि वे सफल प्रशासक के साथ मंझे हुए राजनेता भी बन चुके हैं।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बार-बार उनकी पीठ थपथपा कर यह संदेश दे दिया है कि यूपी में 2024 की जंग उनके (मोदी) के चेहरे और 'ब्रांड योगी' के मुद्दे पर भी लड़ी जाएगी। कानून-व्यवस्था पर नियंत्रण को योगी के बुलडोजर वाली कार्यशैली तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती के लिए 'एक जिला एक उत्पाद' जैसे कामों को केंद्र का समर्थन मिला है। इसकी वजह से दूसरे राज्यों में भी बुलडोजर व 'एक जिला-एक उत्पाद' जैसे कामों को लोकप्रियता मिल रही है जो भाजपा को मनोवैज्ञानिक बढ़त दिलाता हुआ दिखता है।
कानून-व्यवस्था पर सख्त संदेश, पर चुनौतियां भी
मुख्तार अंसारी पर शिकंजा कसकर तथा उन्हें पहली बार दो मामलों में सजा दिलाना इस सरकार की एक साल में खास उपलब्धि है। अतीक अहमद सहित अन्य आपराधिक छवि वालों को कानून के शिकंजे में जकड़ने की कामयाबी भी कानून-व्यवसथा पर मुख्यमंत्री की साख बढ़ाती है। पर, प्रयागराज का उमेश पाल हत्याकांड सरकार के लिए नई चुनौती भी बना। इसने बताया कि अपराधियों का मनोबल तोड़ने के लिए कुछ और उपायों की जरूरत है।
किसानों के मुद्दे पर छुट्टा जानवर से फसलों को होने वाला नुकसान तथा कृषि उत्पादों का भंडारण एवं उनकी लाभदायक मूल्यों पर बिक्री की व्यवस्था भी बड़ी चुनौती है। सरकार को इस एक वर्ष के दौरान मंत्रियों और अधिकारियों के बीच सार्वजनिक हुए मनमुटाव की पुनरावृत्ति रोकनी होगी। आर्थिक मुद्दों पर लगभग 33.50 लाख करोड़ के निवेश प्रस्तावों को जमीन पर उतारकर आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश के संदेश को साकार करना भी बड़ी चुनौती है।
एजेंडे को धार देकर समीकरण साधने का प्रयास
अयोध्या में 2017 से लगातार हो रहे दीपोत्सव में 2022 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को बुलाया गया। मोदी ने भी राम जन्मभूमि मंदिर की प्रगति जानने में रुचि लेकर संदेश देने की कोशिश की कि विपक्ष के विरोध के बावजूद सनातन संस्कृति का सम्मान व गौरव वापस लाने के एजेंडे पर कोई समझौता नहीं होगा। सरकार ने अयोध्या, मथुरा, काशी से लेकर विंध्याचल शक्तिपीठ, शाकुंभऱी देवी, देवी पाटन सहित सांस्कृतिक सरोकारों से जुड़े सभी स्थलों के विकास के लिए हो रहे कामों में तेजी तथा प्रयागराज में 2025 में होने वाले महाकुंभ के लिए बजट में 2500 करोड़ रुपये एवं नैमिषारण्य में 'वेद अध्ययन केंद्र' तथा 'अयोध्या को मॉडल सोलर सिटी' बनाने के लिए धन की व्यवस्था करके भी एजेंडे से समझौता न करने का संदेश दिया है।
सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य की रामायण पर टिप्पणी पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सदन से लेकर सड़क तक कड़े तेवर दिखाए। रामचरित मानस के मुद्दे पर झुकने के बजाय प्रदेश भर में अखंड रामायण के पाठ कराने की घोषणा कर दी। इस पर समाजवादी पार्टी जिस तरह अपना बचाव करती दिखी, उससे भी योगी सरकार के हिंदुत्व के एजेंडे पर कोई समझौता न करने का संदेश निकला है।
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(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)
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