UP MLC Election: यूपी विधान परिषद में भाजपा का नया 'मास्टर स्ट्रोक'
इस समय यूपी विधान परिषद में सबसे अधिक मुसलमान एमएलसी भाजपा से हैं जो सभी पसमांदा समुदाय से आते हैं। यह यूपी में भाजपा का 'नया मास्टर स्ट्रोक' है।

UP MLC Election: 100 सदस्यीय उत्तर प्रदेश विधान परिषद में इसी हफ्ते राज्यपाल की ओर से छह सदस्य नामित हुए हैं। इसके साथ ही विधान परिषद में भाजपा के 80 सदस्य हो गए है। खास बात यह है कि सबसे ज्यादा चार मुसलमान एमएलसी भाजपा के ही होंगे। पार्टी के पास तीन मुस्लिम एमएलसी पहले से हैं। इनमें अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री दानिश आजाद अंसारी, मोहसिन रजा और बुक्कल नवाब शामिल हैं। अब अलीगढ मुस्लिम युनिवर्सिटी के वाइस चांसलर प्रो. तारिक मंसूर को एमएलसी बनाकर सर्वाधिक चार मुस्लिम एमएलसी बनाने का मास्टर स्ट्रोक मारा है।
पसमांदा मुसलमानों के बीच पैठ बनाने में जुटी भाजपा ने प्रो. मंसूर को उच्च सदन में भेजकर विरोधियों के साथ खुद मुस्लिमों को भी चौंकाया है। प्रो. तारिक मंसूर की पहचान उदारवादी मुस्लिम विद्वान के तौर पर है। उनके कार्यकाल के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी ने दिसंबर 2020 में एएमयू के शताब्दी समारोह को संबोधित किया था।
मुस्लिम विश्वविद्यालय के कुलपति रहते प्रो. तारिक मंसूर ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय को कट्टरपंथ का केंद्र नहीं बनने दिया। सबसे महत्व की बात यह भी है कि प्रो.तारिक मंसूर के संघ के साथ भी संबंध बहुत मधुर रहे है और संघ के वरिष्ठ नेताओं से उनकी मुलाक़ात होती रही है। संघ के एक अधिकारी ने बताया कि उनके ज्ञान को देखते हुए हो सकता है सरकार उनको कोई बड़ी ज़िम्मेदारी दे या उन्हें किसी आयोग का अध्यक्ष बनाया जा सकता है।
भारतीय मुस्लिमों में पसमांदा मुस्लिमों की आबादी 80 से 85 प्रतिशत के आसपास है। भाजपा मानती है कि पसमांदा मुसलमानों का एक वर्ग भाजपा को वोट दे रहा है। उत्तर प्रदेश के 45% मुस्लिम आबादी वाली रामपुर लोकसभा सीट पर उपचुनाव में भाजपा को 42 हजार वोटों से जीत और मुस्लिमों के गढ़ माने जाने वाले आजमगढ़ उप-चुनाव में भी 13 साल बाद भाजपा कमल खिलाने में कामयाब रही है। इस जीत के बाद भाजपा ने दावा किया था कि विधानसभा चुनाव में 8% पसमांदा का वोट भाजपा को मिला था।
इसके अलावा सीएसडीएस लोकनीति सर्वे 2022 ने भी अपने रिपोर्ट में बताया है कि 8% पसमांदा मुस्लिमों ने उत्तर प्रदेश विधानसभा में भाजपा को वोट दिया था। पसमांदा मुसलमानों की वजह से भाजपा कई सीटों पर जीतने में सफल रही थी। यूपी विधानसभा चुनाव 2022 में 34 मुस्लिम विधायक जीतकर लखनऊ पहुंचे हैं, जिनमें से 30 विधायक पसमांदा हैं।
उत्तर प्रदेश की कुल आबादी में पसमांदा मुस्लिम 18% हैं। ऐसे में साफ है कि भाजपा न सिर्फ 80 लोकसभा वाले यूपी बल्कि बिहार, बंगाल, झारखंड जैसे राज्यों में भी इस समुदाय को अपनी ओर लाने की रणनीति पर काम कर रही है।
प्रो. तारिक मंसूर को विधान परिषद भेजने के अलावा प्रधानमंत्री मोदी के पहले कार्यकाल में मोदी के प्रधान सचिव रह चुके नृपेंद्र मिश्रा के बेटे साकेत मिश्रा को भी उच्च सदन भेजना भाजपा की दीर्घकालीन रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। पिछले लोकसभा चुनाव में उनका श्रावस्ती सीट से टिकट तय माना जा रहा था। उस समय अमित शाह ने अपने यूपी प्रवास के दौरान साकेत मिश्रा से यूपी में ध्यान देने को कहा था। तब से यह तय माना जा रहा था कि आने वाले दिनों में साकेत मिश्रा को उत्तर प्रदेश में सक्रिय किया जाएगा। अब उन्हें विधान परिषद भेजकर उसकी शुरुआत की गयी है।
साकेत मिश्रा ने दिल्ली के सेंट स्टीफेंस कॉलेज से इकॉनोमिक्स में ग्रेजुएशन की पढ़ाई की है। इसके बाद वे आईआईएम कलकत्ता पहुंचे। आईआईएम से पढ़ाई के बाद उन्होंने यूपीएससी की तरफ रुख किया, वर्ष 1994 के सिविल सर्विसेज परीक्षा में साकेत मिश्रा ने सफलता दर्ज की। वे आईपीएस बने, लेकिन सिविल सर्विसेज उन्हें रास नहीं आई। यूपी पूर्वांचल बोर्ड के सदस्य रहे साकेत मिश्रा अब विधान परिषद के जरिए यूपी में राजनीति करेंगे। इसकी बहुत कम लोगों को जानकारी है कि साकेत मिश्रा वित्त के अच्छे जानकार हैं। वो कई अंततराष्ट्रीय बैंकों के साथ काम कर चुके हैं। प्रधानमंत्री मोदी के पहले कार्यकाल में उन्होंने मोदी को कई वित्तीय सुझाव दिए थे जिसे मोदी ने नीति आयोग से लागू करने के लिए भी कहा था।
जानकारों का कहना है कि साकेत मिश्रा को उच्च सदन में भेजकर भाजपा आने वाले दिनों में ब्राह्मण चेहरे के रूप में प्रोजेक्ट कर सकती है। भाजपा के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि आने वाले समय में साकेत मिश्रा ब्राह्मणों के भाजपा में सबसे बड़े नेता बनकर उभरेंगे। सूत्र यह भी बता रहे हैं कि नृपेंद्र मिश्र के बेटे को योगी कैबिनेट में आर्थिक प्रबंधन संबंधी अहम जिम्मेदारी भी मिल सकती है।
पेशे से अधिवक्ता आजमगढ़ के रामसूरत राजभर को उच्च सदन भेजकर भाजपा ने एक तीर से कई शिकार करने की कोशिश की है। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर के सियासी पैंतरों से निपटने के लिए भाजपा ने रामसूरत राजभर को यह ओहदा देकर राजभर समुदाय को तवज्जो दी है। रामसूरत राजभर भाजपा की राजनीति में अहम किरदार निभाने वाले पिछड़ा वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं। पूर्वांचल की राजनीति को साधने के लिए उन्हें एमएलसी बनाया गया है।
उत्तर प्रदेश में भाजपा छोटी से छोटी पिछड़ी जाति को साथ लेकर अपना वोट बैक को मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है। लोकसभा चुनाव में एक साल से भी कम समय बचा है ऐसे में भाजपा की विधान परिषद में भेजे गए नाम बताते हैं कि भाजपा सोशल इंजीनियरिंग को बेहद महत्व दे रही है और बेहद योजनाबद्ध तरीके से उसे साध रही है। इसमें एक और अहम नाम हंसराज विश्वकर्मा का है।
कभी पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के करीबी रहे हंसराज विश्वकर्मा काशी के भाजपा जिलाध्यक्ष भी हैं। उनको उच्च सदन भेजना इसी रणनीति का हिस्सा है। प्रधानमंत्री के लोकसभा क्षेत्र में भाजपा के संगठनात्मक दायित्वों को बेहतर ढ़ग से निभाने के साथ बढ़ई लोहार समाज को भी सकारात्मक संदेश देने की भाजपा ने कोशिश की है। हांलाकि वोट के रूप में यह समाज यूपी में कोई बड़ी ताकत नहीं रखता है लेकिन भाजपा ने महत्व देकर इस समाज को अपने साथ जोड़ने का प्रयास किया है।
दलित मतदाताओं को ध्यान में रखते हुए भाजपा ने दलित चेहरे के रूप में पहचान बनाने वाले लालजी निर्मल को विधान परिषद भेजा है। लालजी निर्मल आंबेडकर महासभा ट्रस्ट के अध्यक्ष होने के साथ ही राजधानी में निर्माणाधीन आंबेडकर डॉ.भीमराव आंबेडकर स्मारक एवं संस्कृति केंद्र की प्रबंध समिति के अध्यक्ष भी हैं। उप्र अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी निभा रहे निर्मल का उच्च सदन में जाना भाजपा की दीर्घकालीन रणनीति का हिस्सा है। इसके अलावा वैश्य समाज से ताल्लुक रखने वाले रजनीकांत माहेश्वरी को भी उच्च सदन भेजा गया है।
मनोनयन द्वारा चयन में भी भाजपा ने सधी रणनीति के तहत और सभी वर्गो को ध्यान में रखकर उच्च सदन में एमएलसी का चयन किया है। इससे इतना साफ है कि वह जहां एक ओर अपने परंपरागत वोटरों को बांधकर रखना चाहती है, वहीं दूसरी ओर नये वोटबैंक को भी अपने साथ जोड़ने के लिए प्रयासरत है।
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(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)












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