Udupi Horror: उडुपी का वह डरावना सच क्या है जिसे छिपाना चाहते हैं कुछ लोग?
Udupi Horror: उडुपी के अंबलपाडी में बने नेत्र ज्योति कॉलेज छात्रावास के बाथरूम में गुप्त कैमरा लगा है, यह बात मीडिया में आई खबरों के अनुसार सिर्फ तीन मुस्लिम लड़कियों को पता थी। हिडन कैमरे से कॉलेज की लड़कियों का वीडियो बनाया जा रहा था। बाथरूम के अंदर मोबाइल कैमरा फिट किया गया था। कैमरे की तस्वीरें लड़कों के दर्जनों वाट्सएप ग्रुप में शेयर की गईं। अब जब ये तीनों मुस्लिम लड़कियां पकड़ ली गई हैं तो दावा कर रही हैं कि वे सिर्फ प्रैंक कर रही थीं। पकड़े जाने के बाद वे तीनों माफी मांग रही हैं। कॉलेज प्रबंधन इस पूरे मामले को रैगिंग का नाम देकर रफा दफा करना चाहता है।
शेष हैं कई प्रश्न
इस पूरे मामले में कई प्रश्न हैं, जिनका जवाब सामने आना बाकी है। रैगिंग देश में जब पूरी तरह से प्रतिबंधित है, फिर कथित रैगिंग के इस पूरे मामले को कॉलेज प्रशासन इतने हल्के में क्यों ले रहा है? सवाल यह भी है कि यह किस तरह की रैगिंग है,जिसमें लड़कियों की निजी तस्वीरें सार्वजनिक कर दी गईं? छिपे हुए कैमरे से वीडियो शूट किस तरह की रैगिंग में होता है? इस तरह की रिकॉर्डिंग से लेकर उसे शेयर करने तक की सारी हरकतें आपराधिक हैं। फिर भी कॉलेज के अंदर हुए इस अपराध की शिकायत पुलिस के पास लिखवाने में कॉलेज प्रशासन ने इतनी देरी क्यों की?

यह पूरा मामला हिन्दू मानवाधिकार कार्यकर्ता और ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी में छात्र संघ की अध्यक्ष रहीं रश्मि सामंत की वजह से सामने आया। उन्होंने उडुपी की इस कहानी को सोशल मीडिया के माध्यम से सबके सामने लाकर रखा। उडुपी हॉरर के हैशटैग से इस पूरी कहानी की परतें सोशल मीडिया पर खुल रहीं है। हैशटैग उडुपी हॉरर में बार-बार मोहम्मद जुबैर का नाम सामने आ रहा है। मोहम्मद जुबैर का दावा है कि वह सोशल मीडिया के कन्टेन्ट का 'फैक्ट चेक' करता है। बताया जा रहा है कि भाजपा नेत्री नुपूर शर्मा के मामले में इसी जुबैर ने एक एडिटेड वीडियो तैयार करके फेक नैरेटिव गढ़ा। उसने अफवाह के दम पर दुनिया भर में ऐसा झूठा नैरेटिव गढ़ा कि नुपूर शर्मा को अपना पक्ष तक रखने का मौका नहीं मिला। देश भर में राइट टु एक्सप्रेशन के सारे चैम्पियन मानों उन दिनों हज यात्रा पर थे।
जुबैर द्वारा फैलाई नफरत का परिणाम यह हुआ कि पिछले साल राजस्थान के उदयपुर में हिन्दू टेलर कन्हैयालाल की गला रेत कर हत्या कर दी गई। मोहम्मद रियाज और गौस मोहम्मद नाम के दो कट्टरपंथियों ने कन्हैयालाल की हत्या सिर्फ इसलिए की क्योंकि कन्हैयालाल कथित तौर पर भाजपा नेत्री नुपूर शर्मा के बयान का समर्थन कर रहे थे। नुपूर के बयान में ईश निंदा जैसा क्या था जो उन्हें इसका दोषी ठहराया गया? इस पर कभी किसी चैनल या समाचार पत्र की चर्चा की हिम्मत तक नहीं हुई। एक तरफ से नुपूर को गलत कहा जाने लगा लेकिन गूगल सर्च करके भी इस चर्चित घटना में यह तलाश पाना मुश्किल है कि नुपूर ने उस दिन टीवी की बहस में कहा क्या था और उसके कहे में विरोध कर रहे लोगों की आपत्ति क्या थी? इस पूरे प्रकरण में किसी एक व्यक्ति का मनोबल आसमान को छूने लगा तो उसका नाम मोहम्मद जुबैर है।
मोहम्मद जुबैर ने नुपूर शर्मा को ही चुप नहीं कराया। उसने अनेक निर्दोष लोगों की हत्या के लिए कट्टरपंथियों को भड़काया भी। अब उसे लगता है कि कट्टरपंथियों की उन्मादी भीड़ का डर दिखाकर वह किसी भी महिला को चुप करा सकता है। इस बार उसके निशाने पर रश्मि सामंत और सोशल मीडिया एक्टिविस्ट शेफाली वैद्य हैं। उसके ट्वीट की वजह से रश्मि और शेफाली को लगातार धमकियां मिल रहीं हैं। इस संबंध में शेफाली ने ट्वीट किया है कि मोहम्मद जुबैर उनके खिलाफ कितनी भी नफरत फैलाए, उससे वे डरने वाली नहीं हैं। पीछे हटने वाली नहीं हैं। इस घटनाक्रम के संबंध में जो भी उन्होंने ट्वीट किया है, उस पर वे अडिग हैं। बिना हिन्दू लड़की की अनुमति के, तीन मुस्लिम लड़कियां कॉलेज में लड़कियों के बाथरूम के अंदर कैमरा छुपाकर क्यों रखती हैं? उन तीनों पर आरोप है कि वे दूसरे समुदाय की लड़कियों के अश्लील वीडियो बना कर, अपने समुदाय के लड़कों के बीच वायरल करती थीं।
क्या अजमेर कांड जैसा ही है उडुपी का मामला?
19 जुलाई की इस खबर के सामने आने के बाद रश्मि सामंत ने 24 जुलाई की दोपहर में सोशल मीडिया पर लिखा कि आखिर अलीमातुल शैफा, शहबानाज़ और आलिया के बारे में बात क्यों नहीं की जा रही है? ये वही तीनों लड़कियां हैं जिन पर स्कूल की लड़कियों का वीडियो बनाकर ग्रुप्स में सर्कुलेट करने का आरोप है। उडुपी से ही संबंध रखनेवाली रश्मि सामंत ने लिखा है कि इन लड़कियों ने सैकड़ों हिन्दू लड़कियों के अश्लील वीडियो बनाएं हैं।
रश्मि के अनुसार कई ऐसी पीड़ित लड़कियाँ हैं जो इस कारण अवसाद में चली गई हैं। उनके मन में आत्महत्या के भी ख्याल आ रहे हैं। इतना सब होने के बावजूद इस घटना की निंदा नहीं की जा रही है। अजमेर में हुए सीरियल रेप कांड में भी घटना की जानकारी पूरे शहर में फैल गई थी। बच्चियां आत्महत्या कर रहीं थी लेकिन कोई भी लड़की डर की वजह से सामने आकर पूरे घटनाक्रम पर बात नहीं कर पा रही थी। अजमेर सीरियल रेप कांड में पीड़ित लड़कियों का सही-सही आंकड़ा आज भी किसी के पास नहीं है। बड़ी संख्या में लड़कियों ने बदनामी के डर से सामने आकर अपनी पीड़ा बताई ही नहीं। एक अनुमान के अनुसार यह संख्या कई हजार हो सकती है। अजमेर के इस कांड का खुलासा आखिर 1992 में हुआ, समाचार पत्रों में पीड़ितो की संख्या 250 ही लिखी गई। समाचार पत्रों ने लिखा कि अजमेर कांड में हिन्दू लड़कियों को ब्लैकमेल कर उनके साथ बलात्कार किया गया था। इस कांड में अजमेर शरीफ दरगाह के प्रभावशाली खादिम भी शामिल थे।
आरोपियों को छोड़कर मैसेंजर के पीछे पड़ी है कर्नाटक पुलिस
रश्मि सामंत द्वारा अजमेर कांड से उडुपी की घटना को जोड़ दिए जाने के बाद से कर्नाटक पुलिस उनके पीछे पड़ गई है। मतलब असली अपराधी मजे से सड़क पर घूमते रहें और उनके खिलाफ कार्रवाई करने की जगह, जो उनकी सूचना पुलिस को दे। पुलिस उसके ही पीछे पड़ जाए?
मिली जानकारी के अनुसार 24 जुलाई की रात 8 बजे कर्नाटक पुलिस के अधिकारी रश्मि सामंत के घर पहुँचे थे। उस समय वो घर से बाहर थीं। इसके बाद पुलिस वालों ने उनके माता-पिता से पूछताछ की और कई बार पूछा कि आखिर उनकी बेटी कहाँ है? बताया जा रहा है कि रश्मि के पिता को कई बार फोन कॉल करके परेशान किया गया और उनकी बेटी की लोकेशन के बारे में पूछा गया।
दूसरी ओर कट्टरपंथी इको सिस्टम की पूरी ट्रोल आर्मी जी जान लगाकर उन लोगों की पहचान करने में लगी हैं, जो सोशल मीडिया पर हैसटैग उडूपी हॉरर के साथ सच लिख रहे हैं। जो लोग भी सोशल मीडिया पर यह मुद्दा उठा रहे हैं, मोहम्मद जुबैर जैसे कट्टरपंथियों की सोशल मीडिया आर्मी उन पर हमलावर हो रही है। बावजूद इस विरोध के जब यह आलेख पूरा किया जा रहा है, ट्वीटर पर उडूपी हॉरर ट्रेंड कर रहा है।
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)












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