TLP Pakistan: क्या अब तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान पर राज करेगा?
TLP Pakistan: दर्जनों लोगों की हत्या करने, पुलिस और रेजंर्स को अगवा करने और अब तक आठ बार पाकिस्तान में बवाल मचाने के लिए सीधे जिम्मेदार टीएलपी को पाकिस्तान की मौजूदा सरकार ने न सिर्फ क्लीन चिट दे दी है, बल्कि यह लिख कर दिया है कि टीएलपी आतंकवादी संगठन नहीं है बल्कि चुनाव आयोग में रजिस्टर्ड एक राजनीतिक पार्टी है और उसे चुनाव लड़ने, अपना प्रचार करने और मीडिया में आने का पूरा हक है। इसी टीएलपी को अप्रैल 2021 में पाकिस्तान की सरकार ने ही आंतकवादी संगठन घोषित कर उस पर प्रतिबंध लगा दिया था। लेकिन अब 18 जून 2023 को शाहबाज शरीफ की सरकार ने एक समझौता कर टीएलपी की 12 मांगों को मान लिया है और उनके साथ आगे मिलकर चुनाव लड़ने का संकेत भी दिया है।
दरअसल टीएलपी की मांग मानने के पीछे पाकिस्तान मुस्लिम लीग 'नवाज' की एक तीर से दो शिकार करने की मंशा है। एक तो टीएलपी वोट बैंक के सहारे अक्टूबर या नवंबर में होने वाले चुनाव में जीत हासिल कर फिर से सत्ता में आना और दूसरा इमरान खान के ऊपर आतंकवादी निरोधक कानून के तहत मुकदमा चला कर उन्हें जेल में डाले रखना। टीएलपी ने जिन 12 मांगों पर सरकार के साथ समझौता किया है, उसमें सबसे उपर इस्लाम की निंदा करने वालों को आंतकवाद निरोधी कानून के तहत मुकदमा चलाना है।

इमरान खान पर पहले ही इस्लाम की निंदा का एक केस दायर है। उन पर आरोप है कि मार्च 2022 में जब प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ और उनके कुछ साथी सऊदी अरब हज करने गए थे तो इमरान की पार्टी तहरीक ए इंसाफ के लोगों ने उनकी वहां बेइज्जती की थी। अब टीएलपी से समझौते के बाद सरकार शीघ्र ही इस्लाम निंदा के खिलाफ दायर केस की सुनवाई के लिए एक मजबूत अदालती निजाम कायम करेगी और दोषियों को जल्द से जल्द सजा भी दिलवाएगी। पाकिस्तान में नबी या इस्लाम की निंदा के दोषियों को मौत तक की सजा दी जा सकती है।
इन दिनों टीएलपी नामूस-ए-रिसालत के नाम पर पाकिस्तान में जबर्दस्त मुहिम चला रहा है। नामूस ए रिसालत का मतलब है पैगंबर की शान में कसीदे पढ़ना। दुनिया में कहीं भी पैगंबर की आलोचना में कुछ कहा जाता है तो टीएलपी इसे पैंगंबर की शान में गुस्ताखी मानता है और उसके लिए मरने मारने पर तैयार हो जाता है। "गुस्ताख ए रसूल की एक ही सजा सर तन से जुदा" का नारा टीएलपी ने ही दिया था। टीएलपी के बैनर तले खौफनाक मंजर का नजारा पाकिस्तान खूब देख चुका है। 2015 में खादिम हुसैन रिजवी ने टीएलपी की स्थापना की थी। तब से अभी तक 8 बार यह संगठन पाकिस्तान की सड़कों पर खूनी हंगामा कर चुका है। अक्टूबर 2018 में इस टीएलपी ने पूरे पाकिस्तान को तब जाम कर दिया था जब सुप्रीम कोर्ट ने एक ईसाई महिला आसिया बीवी को नबी निंदा के आरोप से बरी कर दिया था।
आसिया की कोर्ट से रिहाई को टीएलपी ने इतना बड़ा मुद्दा बना दिया कि सरकार और सेना दोनों पस्त होकर टीएलपी के आगे घुटने पर बैठ गईं। टीएलपी ने पंजाब प्रांत की सभी प्रमुख सड़कों को जाम कर दिया। कारों और बसों में आग लगा दी। पुलिस अधिकारियों पर हमले किए और स्कूल और व्यापारिक प्रतिष्ठानों में जमकर तोड़ फोड़ की। यही नहीं टीएलपी प्रमुख खादिम हुसैन रिजवी ने सोशल मीडिया और सार्वजनिक भाषणों के जरिए यह फतवा जारी किया कि पाकिस्तान के मुसलमान उन जजों को कत्ल कर दें जिन्होंने आसिया को नबी निंदा के आरोप से बरी किया है। पूरी दुनिया में पाकिस्तान की थू थू हुई, आसिया को रातों रात कनाडा भगाया गया। पर टीएलपी के खिलाफ कार्रवाई की हिम्मत पाकिस्तान की सेना और सरकार की नहीं हुई।
फिर आया नवंबर 2020। इस बार टीएलपी ने मुद्दा बनाया फ्रांस में प्रकाशित पैगंबर के एक कार्टून को। टीएलपी ने केवल सड़के जाम नहीं की, सिर्फ तोड़ फोड़ ही नहीं की, बल्कि कत्लेआम और कोहराम मचा दिया। टीएलपी के लाहौर से इस्लामाबाद मार्च के आह्वान ने पूरे पाकिस्तान को जाम कर दिया। मजहबी उन्माद से लबरेज टीएलपी को रोकने के लिए पाकिस्तान ने सारे उपाय कर लिए। उनके रास्ते में 300 कंटेनर खड़े किए गए। पुलिस से लेकर सेना तक के हजारों जवान तैनात किए गए, फिर भी टीएलपी को खूनी खेल खेलने से रोक नहीं पाए।
टीएलपी के कारकूनों ने चार पुलिस अधिकारियों के कत्ल कर दिए, सैकड़ों को ईट और पत्थर से मार मार कर घायल कर दिया। तब इमरान खान की सरकार ने टीएलपी को आतंकवादी संगठन घोषित करते हुए प्रतिबंध लगा दिया, लेकिन टीएलपी को काबू में नहीं कर सके। आखिर पाकिस्तानी फौज की मध्यस्थता से टीएलपी और पाकिस्तान सरकार के बीच एक गुप्त समझौता हुआ, जिसकी जानकारी आज भी किसी को नहीं है। इसी टीएलपी के वर्तमान चीफ और खादिम हुसैन रिजवी के बेटे साद रिजवी ने नुपूर शर्मा प्रकरण में प्रधानमंत्री मोदी को यह खुलेआम धमकी दी थी कि यदि तब की प्रवक्ता के खिलाफ कार्रवाई नहीं करते तो टीएलपी कुछ ही घंटों में दिल्ली के लाल किले पर चढ़ाई कर देगा।
इसी टीएलपी के साथ पाकिस्तान की मौजूदा सरकार समझौता कर चुनाव लड़ने जा रही है। पाकिस्तान के इंटिरियर मिनिस्टर राना सनाउल्लाह ने 12 सूत्री मांग पत्र पर हस्ताक्षर किया है। जिसके तहत सरकार नबी निंदा के आरोपियों को जल्दी से जल्दी सजा देगी। पाकिस्तान में सोशल मीडिया पर नबी या कुरान की आलोचना को अब आतंकी गतिविधि माना जाएगा। पाकिस्तान की सरकार सभी मीडिया हाउस को लिखकर यह देगी कि टीएलपी कोई आतंकवादी संगठन नहीं है, लिहाजा इनके बयान और भाषणों पर कोई पाबंदी नहीं लगाई जाए। जिन टीएलपी कारकूनों के खिलाफ आतंकवाद निरोध कानून के तहत मुकदमा दर्ज हैं, उन्हें वापस लिए जाए। उर्दू भाषा का सरकारी काम काज में अधिक से अधिक प्रयोग हो और विदेश मंत्रालय अमेरिका की जेल में बंद अफगानिस्तान में आतंकवाद की आरोपी डा आफिया सिद्दीकी को छुड़ाने के लिए तुंरत कार्रवाई करे।
टीएलपी के साथ शाहबाज शरीफ की पार्टी का समझौता पाकिस्तान में उस शेर की सवारी जैसा है जिस पर चढ़ा तो जा सकता है लेकिन उस पर से उतरा नहीं जा सकता। अगर उतरे तो इस बात का पूरा खतरा रहता है कि शेर ही खा जाएगा। शाहबाज शरीफ की पार्टी पीएमएल एन की छवि अभी तक पाकिस्तान में अपेक्षाकृत एक सेकुलर पार्टी की रही है। लेकिन टीएलपी के साथ समझौते के बाद वह एक ऐसी कट्टर जमात के साथ जा रही है जो पाकिस्तान में सच्ची इस्लामिक हुकूमत का स्वप्न देखती है। एक ऐसी हुकूमत जिसका ढांचा पाकिस्तान के तालिबान जैसा होगा।
यह जानते हुए भी अगर पीएमएल एन तहरीक ए लब्बैक को बाड़े से आजाद कर रही है तो इसका संकेत साफ है कि भविष्य में पाकिस्तान का भी कल वही हाल होनेवाला है जो आज अफगानिस्तान का है।
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)
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