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Telangana Elections: भाजपा के एक फैसले ने तेलंगाना की बाजी पलट दी

Telangana Elections: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तेलंगाना में जाकर कहा कि मुख्यमंत्री के. चन्द्रशेखर राव अपनी पार्टी भारत राष्ट्र समिति (पूर्व नाम टीआरएस) को एनडीए में शामिल करवाना चाहते थे, लेकिन उन्होंने मना कर दिया| अगले ही दिन केसीआर के बेटे के.टी. रामाराव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी झूठ बोल रहे हैं, उलटे भाजपा के नेताओं ने उन्हें एनडीए में शामिल होने की पेशकश की थी, जिसे उन्होंने ठुकरा दिया था|

अब कौन झूठ बोल रहा है, यह तो पता नहीं लेकिन पिछले कुछ महीनों में केसीआर दिल्ली आए जरुर थे, लेकिन उन्होंने भाजपा के नेताओं में से सिर्फ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से ही मुलाक़ात की थी| लेकिन इन दोनों के परस्पर विरोधी दावों के बीच हैदराबाद में आम लोगों की धारणा यह है कि दोनों पार्टियों में गुप्त समझौता हो चुका है|

Telangana Elections 2023 narendra modi A decision of BJP changed the fate of Telangana

भारतीय जनता पार्टी ने तीसरी बार केंद्र में सरकार बनवाने के लिए बीआरएस के समर्थन की कीमत पर तेलंगाना की बलि दे दी है| क्या यह आश्चर्यजनक नहीं है कि केसीआर की नाक में दम करने वाले ओबीसी के बड़े नेता के रूप में उभर रहे बंडी संजय को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाकर अचानक रेड्डी समुदाय के कृष्ण रेड्डी को प्रदेश भाजपा का अध्यक्ष बना दिया गया| जबकि राज्य में ओबीसी वोट 52-53 प्रतिशत और रेड्डी समुदाय के वोट सिर्फ 6-7 प्रतिशत हैं|

बंडी संजय ओबीसी में सर्वाधिक प्रभाव रखने वाली मुनुरु कापू जाति से ताल्लुक रखते हैं| छह महीने पहले तक माना जा रहा था कि भाजपा केसीआर को सीधी टक्कर देगी| कांग्रेस को रेस से बाहर माना जा रहा था, लेकिन भाजपा के भीतर हुए इस घटनाक्रम से बाजी पलट गई है| कांग्रेस टक्कर में आ गई है, और भाजपा टक्कर से बाहर हो गई है|

Telangana Elections 2023 narendra modi A decision of BJP changed the fate of Telangana

बंडी संजय को प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पद से हटाए जाने के अलावा एक घटनाक्रम और हुआ है, जिसने भाजपा और बीआरएस में गोपनीय समझौते की धारणा बनाई है, वह घटनाक्रम है केसीआर की बेटी कविता को दिल्ली के शराब घोटाले में गिरफ्तार नहीं किया जाना| आम आदमी पार्टी के संजय सिंह को तो ईडी ने गिरफ्तार कर लिया, लेकिन कविता को अभी तक गिरफ्तार नहीं किया गया| जबकि मार्च में कई दौर की पूछताछ के बाद 15 सितंबर को भी कविता को पूछताछ के लिए बुलाया गया था|

इससे पहले कविता ने अपने सारे मोबाईल फोन भी ईडी को सौंप दिए थे| कविता के चार्टड अकाउंटेंट बुचीबाबू गोरान्ता ने ईडी की पूछताछ में पुष्टि की थी कि कविता की केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और संजय सिंह के साथ अच्छी समझ थी| तेलंगाना में यह धारणा जोर पकड़ रही थी कि कविता को जल्द ही शराब घोटाले की दलाली में गिरफ्तार कर लिया जाएगा|

बंडी संजय के प्रदेश भर के दौरों से जब भाजपा केसीआर के विकल्प के तौर पर देखी जाने लगी थी, तब हिन्दू वोटों का ध्रुवीकरण भी हो रहा था| तेलंगाना की लगभग 4 करोड़ आबादी में 52 प्रतिशत पिछड़े और अन्य पिछड़े हैं, जबकि मुस्लिम 12 प्रतिशत और ईसाई 1 प्रतिशत से कुछ ज्यादा हैं| बंडी संजय की लोकप्रियता बढ़ते ही पिछड़ा वर्ग उन्हें केसीआर के विकल्प के तौर पर देखने लगा था|

भाजपा ने बंडी संजय के राज्य की कमान छीन कर जैसे ही कृष्ण रेड्डी के हाथ में दी, कांग्रेस ने ओबीसी वोटों को लुभाने के लिए कम्युनिटी कनेक्ट ड्राईव शुरू कर दिया है| जिसमें अपने तीन बड़े ओबीसी नेताओं और अपने अपने राज्य के मुख्यमंत्रियों अशोक गहलोत, सिद्धारमैया और भूपेश बघेल को तेलंगाना चुनावों में ड्यूटी पर लगा दिया है|

पिछड़ों का वोट बैंक भाजपा की तरफ खिसकता देख केसीआर सरकार ने जून में पिछड़ों को लुभाने के लिए उनको आर्थिक मदद पहुँचाने की नई कल्याण योजना शुरू की थी, यह "100 प्रतिशत सब्सिडी के साथ आर्थिक सहायता योजना" है, जिसमें बीसी लाभार्थी परिवार के एक सदस्य को एक लाख रुपये की एकमुश्त सहायता का प्रस्ताव है| 23 जुलाई को, सरकार ने इसी योजना को मुसलमानों और ईसाइयों तक बढ़ा दिया, और सभी पात्र लाभार्थियों से आवेदन आमंत्रित किए|

2018 के चुनाव में तेलंगाना विधानसभा की 119 सीटों में से बीआरएस ने 88 सीटें जीती थीं| राज्य में 40 सीटें ऐसी हैं, जिनमें दस प्रतिशत या उससे ज्यादा मुस्लिम हैं| असदुद्दीन ओवैसी से बीआरएस का गठबंधन होने के कारण मुस्लिम वोटर बीआरएस के साथ एकमुश्त जाता है, नतीजतन ये सारी 40 सीटें पिछले विधानसभा चुनाव में बीआरएस जीती| इसके अलावा ओवैसी की ऑल इंडिया मजलिस इ मुसलमीन भी 12 सीटें जीतीं|

ओवैसी अभी भी केसीआर के साथ हैं और मुस्लिम प्रभाव वाली सीटों पर आज भी केसीआर की भारत राष्ट्र समिति का पलड़ा भारी है| कांग्रेस ने जातीय समीकरण बनाने के लिए जहां एससी, एसटी का अलग घोषणापत्र जारी किया है, वहीं ओबीसी, मुसलमानों और ईसाईयों को लुभाने के लिए भी अलग अलग घोषणा पत्र तैयार कर रही है|

केसीआर सरकार की मुस्लिमों को आर्थिक लाभ पहुँचाने वाली योजना के मुकाबले उससे भी ज्यादा लुभाने वाली योजना बनाने का काम कांग्रेस ने अपने वरिष्ठ नेता मोहम्मद अली शब्बीर को सौंपा है| तेलंगाना कांग्रेस के उपाध्यक्ष एम रवि ने कहा कि वे अल्पसंख्यकों से संबंधित मुद्दों की गहरी समझ रखने वाले पार्टी में सबसे प्रमुख मुस्लिम नेता के रूप में शब्बीर पर भरोसा कर रहे थे, और इसलिए उन्हें अल्पसंख्यक घोषणा तैयार करने के लिए समिति का नेतृत्व करने के लिए चुना गया था| शब्बीर का कहना है कि घोषणापत्र तैयार करने के लिए वह मुस्लिम और ईसाई धार्मिक संगठनों के साथ-साथ पेशेवरों, अल्पसंख्यक संस्थानों के प्रबंधन से फीडबैक ले रहे हैं|

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी की बहन शर्मीला रेड्डी का ईसाईयों में अच्छा खासा प्रभाव है| कांग्रेस ने शर्मीला को उनकी पार्टी का कांग्रेस में विलय करवाने और उनके समर्थकों को टिकट देने की पेशकश की है| कर्नाटक के उप मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने इस संबंध में शर्मीला रेड्डी से कई दौर की बातचीत की है, वह जल्द ही अपनी पार्टी का कांग्रेस में विलय कर सकती हैं| जिस समय बंडी संजय प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष थे, उस समय शर्मिला रेड्डी ने भाजपा के साथ जाने के संकेत दिए थे, अप्रेल महीने में बंडी संजय और शर्मिला रेड्डी की मुलाक़ात भी हुई थी| लेकिन अगस्त में उन्होंने आरोप जगाया कि बीआरएस और भाजपा में सांठगाँठ हो गई है|

(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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