Azad on Rahul: कब तक गुलाम नबी करेंगे नेहरू परिवार की भक्ति
राहुल गांधी को गुलाम नबी आज़ाद की चुनौती स्वीकार करके उन्हें कहना चाहिए कि वह उनकी विदेशों में हुई मुलाकातों का खुलासा करें।

Azad on Rahul: राहुल गांधी के ट्विटर हेंडल को मेनेज करने वाले या उनका मैटर तैयार करने वाले राहुल की सोच के अनुरूप ही ट्विट बना रहे हैं| राहुल गांधी ने अपनी भारत जोड़ो यात्रा के दौरान एक बार कहा था कि पप्पू की छवि वाला राहुल गांधी मर गया है| उनका मतलब यह था कि इस भारत जोड़ो यात्रा से वह राजनीतिक तौर पर परिपक्व हो गए हैं| हालांकि उनके इस बयान की भी खिल्ली उड़ी थी, क्योंकि उनका यह बयान भी उनकी छवि जैसा ही था| लेकिन अगर वह उसे अपने जीवन में सचमुच ढाल कर दिखाते, तो उनकी छवि में बदलाव आता|

कांग्रेस उन्हें प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार मानती है, वह खुद भी यह मानते हैं कि गांधी परिवार के वारिस होने के नाते कांग्रेस से वही प्रधानमंत्री पद के दावेदार हो सकते हैं| तो उनकी टीम को पूर्व प्रधानमंत्रियों के भाषणों और उनके बयानों को पढना चाहिए, और राहुल गांधी के भाषण, बयान और ट्विट उसी स्तर के बनाने चाहिए| आए दिन उनका कोई न कोई ऐसा ट्विट या बचकाना बयान आ जाता है, जिससे उनकी परिपक्वता पर सवाल उठता है|
सोमवार को किसी कंपनी के "लोगो" जैसे उनके ट्विट ने सिर्फ उनकी परिपक्वता पर ही सवाल नहीं उठाया है, बल्कि उन्हें नई मुसीबत में डाल दिया है| जिसमें अडानी नाम के स्पेलिंगस का इस्तेमाल कर कांग्रेस छोड़ने वाले पांच नेताओं के नाम लिख कर उन सब का अडानी के धंधों में बेनामी पैसा लगे होने का आरोप लगा दिया है| यानि वह कहना यह चाहते हैं कि जो भी कांग्रेस के साथ नहीं, वह अडानी के साथ है|
राहुल गांधी और कांग्रेस के नेता यह उम्मीद पाले बैठे थे कि उनकी भारत जोड़ो यात्रा के बाद सब कुछ ठीक हो जाएगा| राहुल गांधी की छवि बदलेगी, कांग्रेस से पलायन रूक जाएगा, भाजपा विरोधी विपक्षी दल उन्हें नेता मान लेंगे और वह नरेंद्र मोदी के विकल्प के रूप में उभर जायेंगे| लेकिन इनमें से कुछ भी नहीं हुआ है| सब कुछ वैसे का वैसे ही चल रहा है, बल्कि कांग्रेस से पलायन और तेज हो गया है|
पंजाब से केरल तक और दिल्ली से तमिलनाडु तक बड़े बड़े नेता कांग्रेस छोड़ कर भाजपा में या अन्य दलों में शामिल हो रहे हैं| राहुल गांधी ने जिन पर अडानी की कंपनियों में कालाधन लगे होने का आरोप लगाया है, उनमें तीन दिन पहले कांग्रेस छोड़ने वाले अनिल एंटनी का नाम भी है और 2016 में उनके कांग्रेस अध्यक्ष रहते कांग्रेस छोड़ने वाले हेमंत बिस्व सरमा का नाम भी है| इनके अलावा मध्यप्रदेश की कांग्रेस सरकार गिराने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया, दो दिन पहले भाजपा में शामिल हुए आंध्र प्रदेश के आख़िरी कांग्रेसी मुख्यमंत्री किरण कुमार रेड्डी का नाम भी शामिल हैं|
राहुल गांधी के इस ट्विट में कोई गंभीरता नहीं है| राहुल गांधी 24 मार्च की अपनी प्रेस कांफ्रेंस के आखिर में कह चुके थे कि अडानी की कंपनियों में नरेंद्र मोदी का 20 हजार करोड़ रुपया लगा हुआ है| लेकिन अपना यही पसंदीदा आरोप अब उन्होंने इन सब नेताओं के सिर मढ़ दिया है| हैरानी है कि छह अप्रेल को भाजपा में शामिल होने वाले अनिल एंटनी और सात अप्रेल को भाजपा में शामिल होने वाले किरण कुमार पर भी यह आरोप मढ़ दिया है|
इंदिरा गांधी का वह जमाना जरुर याद आ गया है, जब राजनीतिक नेता एक दूसरे पर सीआईए और केजीबी का एजेंट होने का आरोप लगाया करते थे| कांग्रेस के दो बड़े नेताओं ने राहुल गांधी पर बहुत ही गंभीर टिप्पणी की है। हेमंत बिस्व शर्मा ने तो राहुल गांधी को कोर्ट में घसीटने की धमकी दी है| राहुल गांधी पर मनी लांड्रिंग समेत कम से कम दस केस पहले ही अदालतों में चल रहे हैं| ललित मोदी ने लन्दन में केस दर्ज करने की धमकी दी थी और हेमंत बिस्व शर्मा गुवाहाटी में केस दर्ज करवा रहे हैं| आरएसएस को कौरवों की सेना बताने वाला केस हरिद्वार में दर्ज हुआ है और "सारे मोदी चोर" का एक और केस पटना में चल रहा है|
गुलामनबी आज़ाद ने राहुल गांधी को अदालत में घसीटने की धमकी तो नहीं दी, लेकिन उन्होंने उलटे राहुल गांधी के बारे में खुलासा कर दिया है कि वह अपनी विदेश यात्राओं के दौरान आपराधिक किस्म के व्यापारियों से मिलते हैं| गुलामी नबी आज़ाद ने कहा कि राहुल गांधी जो कुछ उनके बारे में कह रहे हैं, वह शर्मनाक है। आजाद ने कहा कि उनका कभी भी किसी व्यापारी से कोई एसोसिएशन नहीं रहा, जबकि राहुल गांधी के पूरे परिवार का हमेशा से बड़े व्यापारियों से एसोसिएशन रहा है, जिसमें राहुल गांधी खुद भी शामिल हैं| उन्होंने कहा- "मैंने हमेशा इस परिवार का सम्मान किया है, मुझे बहुत कुछ पता है, लेकिन मैं कुछ बोलना नहीं चाहता| वरना मुझे पता है कि वह विदेशों में जाकर किन किन अवांछित व्यापारियों से मिलते रहे हैं|"
गुलामनबी आज़ाद ने राहुल गांधी पर बहुत बड़ा आरोप लगा दिया है| पहले तो भाजपा के नेता उन पर विदेशी ताकतों से मिल कर मोदी सरकार को अपदस्थ करने की कोशिशों का आरोप लगाते थे, लेकिन अब तो उनके राजदार ने ही उन पर आपराधिक किस्म के व्यापारियों के साथ विदेशों में जाकर सांठगाँठ करने का आरोप लगाया है| हाल ही में यह बात भी सामने आई थी कि राहुल गांधी ने अपनी लन्दन यात्रा के दौरान जार्ज सोरोस से मुलाक़ात की थी, जिसने 2024 में मोदी को हराने के लिए अपनी तिजोरी खोलने का एलान किया हुआ है| हो सकता है कि गुलामनबी आज़ाद का इशारा भी इसी ओर हो|
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राहुल गांधी और गुलाम नबी में वाकयुद्ध लंबा चल सकता है, क्योंकि कांग्रेस इस का जवाब देगी ही| लेकिन राहुल गांधी को गुलाम नबी आज़ाद की चुनौती स्वीकार करके उन्हें कहना चाहिए कि वह उनकी विदेशों में हुई मुलाकातों का खुलासा करें| वैसे ही गुलाम नबी आज़ाद को भी नेहरू परिवार की भक्ति छोड़ कर राष्ट्रहित में राहुल गांधी की उन मुलाकातों का खुलासा करना चाहिए, ताकि राहुल गांधी के प्रधानमंत्री बनने से पहले देश उनकी इस हकीकत को भी जान सके|
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(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)












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