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Jharkhand Politics: बीजेपी की गुगली पर चंपई सोरेन का छक्का

झारखंड में खेला होने के कयासों के विपरीत चंपई सोरेन सरकार ने विधानसभा में आसानी से अपना बहुमत सिद्ध कर दिया। हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी के बाद उनकी जगह पर मुख्यमंत्री बनाए गए चंपई सोरेन ने 81 सदस्यों की विधानसभा में 47 सदस्यों के समर्थन का दावा किया था, जो कि बिल्कुल सही निकला।

झारखंड मुक्ति मोर्चा के 29 और कांग्रेस के 17 विधायक तो एकजुट रहे ही, राष्ट्रीय जनता दल का एक विधायक भी विपक्षी गठबंधन के साथ ही रहा।

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इस राजनीतिक घटनाक्रम को बीजेपी की गुगली पर विपक्ष के छक्के के रूप में देखा जा रहा है, जिससे कि विपक्षी गठबंधन को कम से कम छह बड़े फायदे होते दिखाई दे रहे हैं।

लोकसभा चुनाव तक सरकार को कोई खतरा नहीं

चंपई सोरेन सरकार ने जिस आसानी से सदन में अपना बहुमत साबित किया है, उससे लगता है कि अब कम से कम लोकसभा चुनाव तक तो उसे कोई खतरा नहीं है। झारखंड में विधानसभा के चुनाव भी इसी साल के अंत में होने वाले हैं। ऐसे में यदि लोकसभा चुनाव में विपक्षी गठबंधन का प्रदर्शन ठीक-ठाक रहता है, तो उसमें टूट-फूट आसान नहीं होगी और संभव है कि विधानसभा के चुनाव में भी विपक्षी खेमा ऊंचे मनोबल के साथ उतरे।

विपक्ष को एकजुट होने का मौका मिला

कथित ज़मीन घोटाले में हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी ने विपक्षी कैम्प के लिए एक अलार्म जैसा काम किया। उन्हें लगा कि अगर मुख्यमंत्री की गिरफ्तारी हो सकती है, तो फिर विपक्ष का कोई भी नेता सुरक्षित नहीं है। चाहे इसे एक किस्म का डर कहें या बचाव की तैयारी, इसने विपक्षी खेमे में चट्टान जैसी एकजुटता ला दी। एक तरफ जहां झारखंड मुक्ति मोर्चा और कांग्रेस दोनों मुख्य विपक्षी पार्टियों ने अपने-अपने विधायकों को संभालकर रखने के लिए अतिरिक्त सतर्कता दिखाई, वहीं इन दोनों पार्टियों ने अपना तालमेल भी बढ़ाया है।

कांग्रेस ने झारखंड मुक्ति मोर्चा को पूर्ण नैतिक समर्थन दिया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने जहां अपने ट्वीट में सख्त भाषा का इस्तेमाल करते हुए कहा कि "झारखंड ने मोदी-शाह के षड्यंत्रकारी मंसूबों को तगड़ा झटका दिया है", वहीं राहुल गांधी ने भी हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन से मुलाकात करके उन्हें अपने पूर्ण समर्थन का भरोसा दिलाया।

परिवारवाद के आरोप से साफ बच गए

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई दिग्गज भाजपा नेता विपक्षी पार्टियों में व्याप्त परिवारवाद पर तीखा हमला करते रहे हैं, लेकिन चंपई सोरेन के मुख्यमंत्री बनने से हेमंत सोरेन पर अब परिवारवाद का आरोप चस्पा करना आसान नहीं होगा। चंपई सोरेन झारखंड मुक्ति आंदोलन के समय से ही शिबू सोरेन परिवार के वफादार हैं। उन्हें मुख्यमंत्री बनाकर झारखंड मुक्ति मोर्चा ने यह संदेश दे दिया है कि हमेशा ज़रूरी नहीं कि शिबू सोरेन परिवार के किसी सदस्य को ही आगे किया जाए, बल्कि झारखंड मुक्ति मोर्चा में पार्टी का एक साधारण कार्यकर्ता भी मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंच सकता है।

हेमंत सोरेन परिवार की कलह टल गई

कई मीडिया रिपोर्ट्स में मुख्यमंत्री की कुर्सी और सत्ता के बंटवारे को लेकर हेमंत सोरेन परिवार में कलह की बात भी कही जा रही थी। खास कर जबसे ऐसी ख़बरें सामने आईं कि गिरफ्तारी की स्थिति में हेमंत सोरेन अपनी पत्नी कल्पना सोरेन को मुख्यमंत्री बनवाना चाहते हैं, तब से उनकी भाभी सीता सोरेन की नाराज़गी बहुत छिपी हुई नहीं रह पाई थी। लेकिन अंत में चंपई सोरेन को मुख्यमंत्री बनाकर हेमंत ने जैसे सब कुछ संभाल लिया।

हेमंत के लिए पैदा हो सकती है सहानुभूति

चंपई सोरेन सरकार के विश्वास मत के दौरान हेमंत सोरेन ने सदन में भावुकता भरा भाषण दिया। एक तरफ जहां उन्होंने सदन में चुनौती दी कि जिस साढ़े आठ एकड़ ज़मीन के कथित घोटाले को लेकर उन्हें गिरफ्तार किया गया है, अगर उसकी मिल्कियत उनके नाम से साबित कर दी जाए तो वे राजनीति छोड़ देंगे, वहीं उन्होंने अपने खिलाफ की गई कानूनी कार्रवाई को संपूर्ण आदिवासी समाज के खिलाफ अत्याचार से भी जोड़ने की कोशिश की।

बिना नाम लिये एक टीवी एंकर की कही बातों को उन्होंने बीजेपी की मंशा से जोड़ दिया और कहा कि ये लोग चाहते हैं कि आदिवासी समाज फिर से जंगलों में चला जाए, जैसे कि वह सौ-पचास साल पहले रहा करता था। ज़ाहिर है कि हेमंत सोरेन अपनी गिरफ्तारी से आगामी चुनावों में सहानुभूति लहर पैदा करना चाहते हैं।

बीजेपी के हिन्दुत्व में सेंध लगाने की कोशिश

हेमंत सोरेन न केवल आदिवासी समाज को निशाना बनाये जाने का आरोप लगा रहे हैं, बल्कि यह भी कह रहे हैं कि जिस तरह की परिस्थितियों में बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर को अपने अनुयायियों के साथ हिन्दू धर्म छोड़कर बौद्ध धर्म अपनाना पड़ा था, फिर से आदिवासियों और दलितों के लिए उसी तरह की परिस्थितियां पैदा करने की कोशिशें की जा रही हैं।

मतलब साफ है कि एक तरफ जहां द्रौपदी मुर्मू को देश की राष्ट्रपति बनाकर बीजेपी आदिवासी समाज को देश और हिन्दुत्व की मुख्य धारा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बताना चाहती है, वहीं झारखंड की राजनीति में आदिवासियों को हिन्दुत्व से अलग राह चलने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

बीजेपी के गढ़ में सेंध लगाने की कोशिश

चंपई सोरेन को मुख्यमंत्री बनाकर झारखंड मुक्ति मोर्चा ने एक तरह से बीजेपी का गढ़ समझे जाने वाले कोल्हान क्षेत्र में भी सेंधमारी करने की कोशिश की है। कोल्हान क्षेत्र में पूर्वी और पश्चिमी सिंहभूम के अलावा सरायकेला खरसावां ज़िले आते हैं।

इसी इलाके से बीजेपी के दो पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा और रघुवर दास भी आते हैं। चंपई सोरेन सरायकेला विधानसभा सीट से पांच बार विधायक चुने जा चुके हैं और मुख्यमंत्री बनने से पहले विभिन्न सरकारों में कई बार मंत्री भी रह चुके हैं। झारखंड मुक्ति मोर्चा को उम्मीद है कि चंपई सोरेन को मुख्यमंत्री बनाने से इस इलाके के लोगों का रुझान उनकी पार्टी के प्रति कुछ न कुछ अवश्य बढ़ेगा।

साफ है कि कानूनी दृष्टि से इस वक्त हेमंत सोरेन भले ही घिरे हुए दिखाई दे रहे हैं, लेकिन राजनीतिक दृष्टि से विपक्ष ने झारखंड में बेहतर प्रबंधन का परिचय दिया है।

(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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