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Manish Kashyap Arrest: एक यूट्यूबर से क्यों डर गयी बिहार सरकार?

यूट्यूबर मनीष कश्यप उर्फ त्रिपुरारी तिवारी के खिलाफ 15 मार्च को पटना के कोर्ट ने गिरफ्तारी का वारंट जारी किया था। वारंट जारी करने के लिए बिहार पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई ने कोर्ट में अर्जी दी थी।

Manish Kashyap Arrest: Why was the Bihar government scared of a YouTuber

32 वर्षीय मनीष कश्यप बिहार के पश्चिम चंपारण जिले के बहुत ही छोटे से गांव डुमरी महनवा (मझौलिया) से हैं। यह गांव बूढ़ी गंडक नदी के किनारे हैं। इसलिए बाढ़ गांव के लिए आम समस्या है। पिता उदित कुमार तिवारी भारतीय सेना में कार्यरत थे। मनीष के एक्टिविस्ट बनने की कहानी सावित्रीबाई फुले विश्वविद्यालय पुणे से सिविल इंजीनियर की डिग्री लेकर 2016 में बिहार लौटने के बाद शुरू होती है।

बेतिया छावनी के पास एक पुल निर्माण को लेकर उनकी बहुत बहस हुई। वहां के लोग बताते हैं कि पुल गलत तरीके से बन रहा था। मनीष इंजीनियरिंग की डिग्री लेकर आए थे। उन्होंने सारी गड़बड़ी पकड़ ली। विवाद बहुत बढ़ गया था। यह तब की बात है, जब उनके पास यूट्यूब नहीं था।

बाद में मनीष को लगा कि यूट्यूब बिहार में परिवर्तन का एक औजार बन सकता है। उसने 2018 में 'सच तक' न्यूज़ के नाम से चैनल प्रारंभ कर लिया। 2020 में चनपटिया से निर्दलीय चुनाव लड़ा और तीसरे नंबर पर रहे। चुनाव में चाहे वह तीसरे नंबर पर रहा लेकिन उसके शपथ पत्र की पूरे बेतिया में चर्चा हुई। मनीष ने लिखा - ''मेरे द्वारा किये गए वादे अगर पूरा करने में असफल रहा तो जनता मुझ पर मुकदमा कर सकती है।''

चुनाव में चाहे हार हुई हो लेकिन उसके बाद यूट्यूब पर उसने पीछे मुड़कर नहीं देखा। वह अपने चैनल पर बिहार में परिवर्तन की लड़ाई लड़ता हुआ दिखाई देता रहा। इसलिए उसे 'सन आफ बिहार' की नई पहचान मिली।

मनीष के पीछे क्यों पड़ी है बिहार पुलिस?

यूट्यूबर मनीष कश्यप उर्फ त्रिपुरारी कुमार तिवारी के खिलाफ 15 मार्च को पटना के कोर्ट ने गिरफ्तारी का वारंट जारी किया था। वारंट जारी करने के लिए बिहार पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई ने कोर्ट में अर्जी दी थी। उसके बाद ईओयू ने तमिलनाडु फेक वीडियो मामले में मनीष कश्यप की गिरफ्तारी के लिए एक स्पेशल टीम बनाई, जो बिहार से बाहर दूसरे राज्यों में जाकर मनीष की तलाश करने वाली थी।

इस बीच फरार चल रहे मनीष के घर की कुर्की का आदेश आ गया और 18 मार्च को बेतिया पुलिस पूरे दल बल के साथ उसके घर पहुंच गई। यह खबर मनीष तक पहुंची होगी। इधर पुलिस उनके घर पर कुर्की कर रही थी और दूसरी तरफ मनीष थाने में पहुंचकर सरेंडर करने के लिए पुलिस का इंतजार कर रहे थे। पश्चिम चंपारण के जगदीशपुर थाने से उनकी तस्वीर वायरल हुई। जिसमें वे थाना प्रभारी के कक्ष के बाहर अकेले ही खड़े दिखाई पड़ रहे हैं।

भ्रामक रिपोर्टिंग से निकल चुकी है बात आगे

मनीष लगातार सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहे हैं। उन्होंने अपनी मां के साथ खड़े होकर एक वीडियो भी बनाया। इसमें उन्होंने तमिलनाडु मामले में दूसरे मीडिया संस्थानों की रिपोर्टिंग दिखाते हुए पूछा कि जब सब रिपोर्ट कर रहे थे तो फिर सिर्फ उन पर कार्रवाई क्यों?

जिस प्रकार बिहार पुलिस मनीष कश्यप के मामले में नई नई धाराएं जोड़ती चली जा रही है। उसे देखकर लगता है कि यह पूरा मामला भ्रामक रिपोर्टिंग से कहीं आगे बढ़ चुका है। जैसे बिहार सरकार मनीष के माध्यम से उन तमाम मीडियाकर्मियों और यू ट्यूबरों को एक संदेश देना चाहती है कि आलोचना करोगे तो मनीष जैसा हाल कर दिया जाएगा।

बिहार पुलिस को अच्छे से पता है कि मनीष पर जिस वीडियो को लेकर धाराएं उन्होंने लगाईं हैं, वो न्यायालय में टिकने वाली नहीं हैं। इसलिए बिहार पुलिस अपने ट्वीट थ्रेड में नए नए आरोप जोड़ती जा रही है। इतना कुछ जुड़ चुका है कि तमिलनाडु से जुड़े वीडियो का मामला बहुत पीछे छूट गया है। अब बिहार पुलिस वित्तीय अनियमितताओं की बात करते हुए अवैध होर्डिंग लगाने तक पहुंच गई है।

बिहार पुलिस ने पहले मनीष के मामले में सबसे पहले भ्रामक वीडियो की बात की थी। अगले दिन उनके सभी खाते फ्रीज करके वित्तीय अनियमितता की बात की। जब लगा कि ये भी नहीं चल पाएगा तो होर्डिंग की शिकायत लेकर सामने आ गई। बिहार पुलिस ने लिखा- ''अनुसन्धान के क्रम में यह बात भी सामने आयी है कि अभियुक्त श्री मनीष कश्यप द्वारा पटना के विभिन्न कोचिंग संस्थानों को अपने पक्ष में ब्रांडिंग कराने हेतु पटना के कई एडवरटाइजर के माध्यम से अवैध रूप से बिना अनुमति के होर्डिंग्स लगाये गये हैं।"

निजता के अधिकार का भी नहीं रखा ध्यान

ईओयू द्वारा मनीष के एक एक खाते की जानकारी सार्वजनिक कर दी गई। उन्होंने बताया कि मनीष के एसबीआई बैंक के खाते में तीन लाख 37 हजार 496 रुपये, आइडीएफसी बैंक के खाते में 51, 069 रुपये और एचडीएफसी बैंक के खाते में तीन लाख 37 हजार 463 रुपये जमा हैं। वहीं, सचतक फाउंडेशन के एचडीएफसी बैंक के खाते में 34 लाख 85 हजार 909 रुपये जमा हैं। इसे मीडिया में इस तरह पेश किया गया, जैसे ईओयू ने कोई बड़ी खोज की हो। जबकि यह पैसा छुपाया हुआ नहीं था। उसके खाते में जमा था। जिस पर आयकर भी दिया जाता होगा।

इस तरह बिहार पुलिस ने एक नई शुरूआत कर दी है। इस पहल का असर कल को अगर उत्तर प्रदेश में दिखाई दे जाए तो क्या होगा? रवीश कुमार, अजीत अंजुम, पुण्य प्रसून वाजपेयी जैसे कई सेलीब्रिटी बिहारी यूट्यूबर उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद और नोएडा में रहते हैं तो क्या उनके किसी वक्तव्य पर कार्रवाई करते समय उनकी कमाई का ब्यौरा भी सार्वजनिक किया जाएगा?

यू ट्यूब की समझ रखने वाले कुछ लोगों से बातचीत से पता चला कि जितने पैसे मनीष के खातों से मिले और यूट्यूब पर जितनी उनकी लोकप्रियता है। उसके हिसाब से यह कमाई ज्यादा नहीं है। बिहार पुलिस ने जिन खातों की जानकारी दी है, उन तीन खातों को मिलाकर भी बहुत बड़ी राशि नहीं हो रही है। उन्होंने अब तक यूट्यूब पर लगभग 12 हजार वीडियो डाले हैं। उनके वीडियो को करोड़ों बार देखा जा चुका है।

बिहार सरकार की खामियों को उजागर करने की सजा?

यह बात सही है कि मनीष पत्रकार नहीं हैं लेकिन बिहार में उनकी लोकप्रियता उस निकम्मेपन को दर्शाती है, जिसने मनीष को अपने लिए जगह बनाने दी। आप उनके यूट्यूब चैनल 'सच तक' पर जाकर देखें तो पाएंगे कि वे आम आदमी की समस्या को उठा रहे हैं। मनीष अपने वीडियो में भी कहते हैं कि उन्होंने सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। इसलिए खराब सड़क, पुल, नाले से जुड़े उनके दर्जनों वीडियो मिल जाएंगे। बिहार के विश्वविद्यालयों में पढ़ाई ठीक हो और परीक्षाएं सही समय पर हो, सत्रों में देरी ना हो। इसे लेकर मनीष लंबे समय से जमीन पर संघर्ष करते हुए दिखाई देते हैं। वह बिहार को बदलने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इस बात पर सबकी सहमति होगी।

मनीष जबसे यूट्यूब पर सक्रिय हुए हैं, लगातार विवादों से घिरे रहे। उन पर बेतिया में ही सात मुकदमे दर्ज हैं। इसके अलावा भी उन पर कई आरोप लगते रहे हैं लेकिन इस वक्त जिस तरह बिहार पुलिस उनके साथ व्यवहार कर रही है। उसके बाद बहुत से लोग जो मनीष से कभी सहमत नहीं रहे, उनके पक्ष में लिखने और बोलने लगे हैं। सच यही है कि इस गिरफ्तारी के बाद बिहार पुलिस की किरकिरी हो रही है।

बिहार पुलिस की कार्रवाई पर किरकिरी

इस बात का अंदाजा बिहार पुलिस को भी नहीं था कि बिहार में अपराधियों और माफियाओं को छोड़कर एक यूट्यूबर के पीछे हाथ धोकर पड़ने से हर तरफ उसकी आलोचना होगी। बिहार पुलिस के ट्विटर हैंडल पर लोग अपनी आपत्ति दर्ज करा रहे हैं। टवीटर पर #मनीष_कश्यप_को_रिहा_करो हैश टैग चल पड़ा है। मनीष की गिरफ्तारी को लेकर लोगों में इतना गुस्सा है कि बिहार पुलिस को लिखना पड़ा कि कमेन्ट करते हुए मर्यादा का ध्यान रखिए। यह मनीष कश्यप की आवाज की लोकप्रियता ही है कि आगामी 23 मार्च को मनीष के समर्थकों ने बिहार बंद का आह्वान भी किया है।

(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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