Maharashtra BJP: महाराष्ट्र में भाजपा के सामने टिकट बंटवारे का 'महासंकट'

Maharashtra BJP: उम्मीदवारों की दूसरी सूची जारी करने की तैयारी में जुटी भाजपा की राह में सबसे बड़ा रोड़ा उसके सहयोगी दल बन रहे हैं। इसका कारण यह है कि पहली सूची जारी करते समय उसे उम्मीदवार चयन करने के लिए अपने सहयोगी दलों पर निर्भर नहीं रहना था।

बिहार में नीतीश 2019 की तरह 17 सीटों पर लड़ने का दबाव भारतीय जनता पार्टी पर बना रहे है, वहीं महाराष्ट्र में भाजपा के सहयोगी एकनाथ शिंदे की शिवसेना और अजीत पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी भी भाजपा से लोकसभा सीटों को लेकर किसी तरह का लिहाज करने के मूड में नहीं है।

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उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों के बाद महाराष्ट्र से सबसे ज्यादा 48 लोकसभा सीटें आती हैं। उद्धव ठाकरे की शिवसेना और शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को दो फाड़ कर महाराष्ट्र में भाजपा के साथ सत्ता का स्वाद चख रहे एकनाथ शिंदे और अजीत पवार सीटों के बंटवारे में बीजेपी से अपने योगदान का पूरा हिस्सा मांग रहे हैं।

एकनाथ शिंदे चाहते हैं कि 2019 की तर्ज पर 23 सीटें उनकी शिवसेना के लिए छोड़ी जाएं और अजीत पवार भी पश्चिम महाराष्ट्र में अपने दबदबे के आधार पर 10 से कम सीटों पर मानने को तैयार नहीं हैं। शिंदे और अजीत पवार की मांग और अपने रूख पर अड़े रहने के कारण मंगलवार को महाराष्ट्र के दौरे पर रहे गृह मंत्री अमित शाह ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओंं के साथ बैठक की।

अमित शाह ने इस बैठक में साफ कह दिया है कि शिवसेना और अजीत पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को उनकी हैसियत से ज्यादा पहले ही दिया जा चुका है। ऐसे में लोकसभा चुनाव को लेकर वह ज्यादा महत्वकांक्षा न पाले। भाजपा का तर्क है कि 40 विधायकों वाले एकनाथ शिंदे को मुख्यमंत्री और 40 विधायकों वाले अजीत पवार को उपमुख्यमंत्री के साथ वित्त मंत्रालय जैसा भारी मंत्रालय दिया जा चुका है। भाजपा का मानना है कि लोकसभा चुनाव मोदी के नाम और मोदी के काम पर लड़ा जाएगा ऐसे में ज्यादा से ज्यादा सीटों पर लड़ने का उनका नैतिक अधिकार है।

शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के साथ सीटों के फंसे पेच को सुलझाने और जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं में शिंदे और अजीत पवार को लेकर मचे घमासान को साधने के लिए अमित शाह ने विवाद की सीटों पर विस्तार से बात की और नेताओं से साफ कहा कि जितनी ज्यादा सीटें हम जीतेगें उतना विपक्ष कमजोर होगा और मोदी उतने मजबूत होंगे। शाह ने कार्यकर्ताओं से कहा कि कई बार अच्छे स्वास्थ्य के लिए कड़वी दवाई निगलनी पड़ती है। उसी तरह सत्ता के लिए कई बार विचारधारा के विपरीत जाकर गठबंधन करने पड़ते है।

अमित शाह ने एकनाथ शिंदे और अजित पवार को भी संदेश भेज दिया है कि गठबंधन में सीटें हारने के लिए नहीं दी जा सकती। शाह ने एकनाथ शिंदे की शिवसेना को 8 सीटें और अजीत पवार को 4 सीटें देने का प्रस्ताव दिया है। भाजपा अपने लिए खुद 36 सीटें रखना चाहती है। महादेव जानकर, राजू शेट्टी और प्रकाश अंबेडकर की वंचित बहुजन अघाड़ी जैसे छोटे दलोें के साथ यदि कुछ बात बनती है तो भाजपा इनको अपने कोटे से सीट देगी।

अमित शाह ने एकनाथ शिंदे के उस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है जिसमें शिवसेना ने 2019 के तर्ज पर अविभाजित शिवसेना को दी गई 22 सीटों पर दावा ठोका था। भाजपा का मानना है कि 2019 के बाद परिस्थितियां भाजपा के पक्ष में है और सिर्फ 2019 में सीट बंटवारे के फार्मूले को 2024 में आधार नहीं बनाया जा सकता। भाजपा ने एकनाथ शिंदे और अजीत पवार से पूछा है कि पहले वह बताएं कि उनके पास उनकी मांगी जा रही सीटों पर कौन से जिताऊ उम्मीदवार हैं।

शाह ने एकनाथ शिंदे और अजीज पवार से यह भी कहा है कि आपके साथ आपकी पार्टी का मूल वोटर भी आया है कि नहीं, लोकसभा चुनाव में इसका फैसला भी हो जाएगा। शाह ने एकनाथ शिंदे और अजीत पवार को यह प्रस्ताव भी दिया है कि मोदी के चेहरे और मोदी की लोकप्रियता पर हो रहे इस चुनाव में कुछ सीटों पर आपके उम्मीदवार भाजपा के चुनाव चिन्ह पर भी मैदान में उतारे जा सकते हैं।

महाराष्ट्र में जिन सीटों को लेकर विवाद है उनमें अमरावती, मुम्बई दक्षिण, मुम्बई दक्षिण मध्य और मुम्बई उत्तर पश्चिम और ठाणे की सीटें शामिल हैं। भाजपा अमरावती से निर्दलीय सांसद नवनीत राणा को समर्थन देना चाहती है, वहीं शिवसेना नेता आनंद राव अडसुल अमरावती सीट छोडने को तैयार नहीं है। मुम्बई की छह सीटों में से तीन सीटों पर शिवसेना का सांसद है और एकनाथ शिंदे इन तीनों सीट को अपने लिए मांग रहे हैं जबकि भाजपा मुम्बई की छह सीटों मे से सिर्फ एक सीट एकनाथ शिंदे को देना चाहती है।

भाजपा ने एकनाथ शिंदे से साफ कहा है कि ठाणे की सीट अगर वह अपने बेटे श्रीकांत के लिए चाहते हैं तो कल्याण डोंबिवली सीट भाजपा को देनी होगी। शिंदे के साथ समस्या यह है कि अगर वह भाजपा के सामने ज्यादा झुकते हुए दिखते हैं तो उनके सांसद और नेता उद्धव ठाकरे खेमे का रूख कर सकते हैं और अगर वह भाजपा के सामने कठोर बनते हैं तो गठबंधन टूटने का खतरा सामने खड़ा है।

इसलिए भाजपा महाराष्ट्र की वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों का पूरा लाभ उठाना चाहती है और ऐसे में अधिक से अधिक सीटों पर लड़ने की योजना पर काम कर रही है। राष्ट्रीय स्वयसेवक संघ भी नहीं चाहता कि एकनाथ शिंदे और अजीत पवार को कुछ ज्यादा स्पेस महाराष्ट्र में दिया जाए। भाजपा की रणनीति लोकसभा चुनाव के लिए महाराष्ट्र में बड़ा भाई बनने और उसके बाद होने वाले विधानसभा चुनाव में एकनाथ शिंदे और अजीत पवार को सम्मानजनक सीटों के साथ जोड़े रखने की है।

लेकिन महाराष्ट्र में भाजपा की समस्या सिर्फ सहयोगी दलों के साथ सीटों के बंटवारे को लेकर नहीं है। भाजपा नहीं चाहती कि मनोज जरांगे के मराठा आंदोलन के बाद मराठाओं को दिए गए आरक्षण के बाद उसका मूल ओबीसी वोटर उससे दूरी बनाए। महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे और अजीत पवार जैसे मराठा नेताओं को भाजपा में मिल रही तवज्जो से भाजपा के मूल ओबीसी वोटर्स में बैचेनी है। भाजपा इसको भांप रही है। महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे और शरद पवार को जमीनी स्तर पर मिल रहे भावनात्मक सपोर्ट को भी भाजपा समझ रही है। ऐसे में भाजपा सबको साध कर सभी सीटें जीतने की रणनीति पर काम कर रही है।

(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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