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मध्यप्रदेश- लोकसभा चुनाव में भी कांग्रेस का किसान, बेरोजगार और हिन्दुत्व पर दांव

By जावेद अनीस
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नई दिल्ली। मध्यप्रदेश में लोकसभा चुनाव प्रचार की डफली बज चुकी है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी बीते आठ फरवरी को भोपाल के जंबूरी मैदान से प्रदेश में अपने चुनावी अभियान की शुरुआत कर चुके हैं जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आगामी 15 फरवरी को होशंगाबाद में होने वाली सभा से इसकी शुरुआत करने वाले हैं। ऐसे में भी एकबार फिर मध्यप्रदेश चुनावी मूड में अपने को तैयार कर रहा है।

लोकसभा चुनाव: कांग्रेस का किसान, बेरोजगार, हिंदुत्व पर दांव

विधानसभा चुनाव में जीत के बाद इसके प्रमुख शिल्पकार रहे राहुल गांधी ने अपने आभार सम्मेलन में भोपाल के उसी जंबूरी मैदान को चुना जहां मुख्यमंत्री के तौर पर कमलनाथ को शपथ दिलाई गयी थी। यह एक तरह से लोकसभा चुनाव के लिये सूबे में उनके चुनावी अभियान की शुरुआत भी थी। राहुल के इस सम्मलेन को “किसान आभार सम्मेलन” का नाम दिया गया और इसे किसानों की कर्जमाफी के लिये राहुल का अभिनंदन कार्यक्रम कहा गया है। इस सम्मेलन में पूरे प्रदेश के किसान भोपाल बुलाये गए। हालांकि इस सम्मलेन के लिये प्रदेश भर से दो लाख किसानों को लाने का लक्ष्य रखा गया था लेकिन बताया जाता है कि इसमें लगभग एक लाख लोग ही जुट सके। इन सब के बीच खास बात यह रही कि पूर्ववर्ती शिवराज सरकार की तरह भीड़ जुटाने के लिये इस सरकारी मशीनरी का उपयोग नहीं किया गया।

इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं द्वारा राहुल गांधी को हिन्दुत्व के पैरोकार और देश के भावी प्रधानमंत्री के तौर पर भी पेश किया गया। कार्यकर्ताओं द्वारा राजधानी भोपाल में कुछ ऐसे पोस्टर लगाये गये थे जिसमें राहुल को राम भक्त बताते हुये अयोध्या में राम मंदिर बनाने का वादा किया गया था। एक और विवादित पोस्टर में राहुल गांधी को राम का अवतार और नरेन्द्र मोदी को रावण के रूप में पेश किया गया था। इसी तरह से कांग्रेस के प्रदेश कार्यालय के बाहर एक पोस्टर लगाकर उन्हें देश का भावी प्रधानमंत्री बताया गया था। सभा के दौरान मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि “अभी तो मध्यप्रदेश की विधानसभा में कांग्रेस का झंडा लहराया है, अब मध्यप्रदेश की जनता दिल्ली की संसद भवन में कांग्रेस का झंडा लहरायेगी, राहुल गांधी देश के भावी प्रधानमंत्री हैं”। इस दौरान ज्योतिरादित्य सिंधिया भी पीछे नहीं रहे, उन्होंने कहा “आज देश सिर्फ राहुल गांधी की तरफ उम्मीद की नजरों से देख रहा है। हम 2019 के लोकसभा चुनाव में मध्य प्रदेश की सभी 29 सीटें जीतकर राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनाएंगे”।

किसान आभार सम्मेलन में राहुल गांधी ने मध्यप्रदेश की जनता को विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत के लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि 'कांग्रेस सरकार द्वारा की गई कर्जमाफी पहला कदम है, अभी बहुत कुछ किया जाना है।’ इस दौरान उनका पूरा फोकस किसानों, बेरोजगारों और कार्यकर्ताओं पर रहा। सभा के दौरान उन्होंने कमलनाथ सहित कांग्रेस के सभी मुख्यमंत्रियों को सन्देश देते हुये कहा कि 'वे किसानों और नौजवानों को नाराज करने वाले काम बिलकुल ना करें, किसान और नौजवान हमारे मालिक हैं। अगर कोई इस बात को भूलेंगे तो नया चीफ मिनिस्टर आ जाएगा।’ इस दौरान राहुल ने एकबार फिर ऐलान किया कि 'अगर केंद्र में कांग्रेस की सरकार बनी तो हर व्यक्ति के लिए न्यूनतम गारंटी इनकम सुनिश्चित किया जाएगा। ’राहुल किसानों को राजनीति के केंद्र में लाने का श्रेय लेते भी नजर आये। उन्होंने कहा कि 'जब हमने किसानों की कर्ज माफी की तो वो घबरा गए और इसके बाद मोदी जी ने किसानों को दिन के 17 रुपये देने का ऐलान कर दिया और इसके बाद उनके मंत्रियों द्वारा संसद में ऐसे ताली बजायी गयी जैसे कितना बड़ा काम कर दिया गया हो। ’किसान आभार सम्मेलन में कमलनाथ अपनी 45 दिन की सरकार का हिसाब-किताब भी पेश करते नजर आये और अपनी चुनौतियों को भी बताया। उन्होंने पिछली शिवराजसिंह चौहान की सरकार पर आरोप लगाते हुये कहा कि “जब मैंने पदभार संभाला तो यहां बीजेपी तिजोरी खाली कर चुकी थी, बीजेपी ने प्रदेश की व्यवस्था चौपट करके रखी थी, हमने लक्ष्य बनाया कि सबसे पहले हम अपने कृषि क्षेत्र को जीवित करें" गौरतलब है कि कमलनाथ सरकार ने अपने 'जय किसान ऋण माफी योजना’ के तहत करीब 55 लाख किसानों के दो लाख रूपए के कर्ज को माफ करने का फैसला किया है।

मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस “नरम हिन्दुत्व” के रास्ते पर चलते हुये भाजपा को टक्कर दे चुकी है। अपने वचन पत्र में कांग्रेस ने प्रदेश की हर पंचायत में गोशाला बनाने, 'राम पथ' के निर्माण करने जैसे वादे किये थे। अब जीत के बाद भी में कांग्रेस की कमलनाथ सरकार हिन्दुतत्व से जुड़े मुद्दों को आगे बढ़ा रही है। कमलनाथ सरकार अपने 'प्रोजेक्ट गौशाला’ के तहत अगले चार माह के भीतर 1000 गौशाला खोलने का निर्णय ले चुकी है। इसी तरह से पिछले दिनों खंडवा जिले में गोहत्या के आरोप में तीन लोगों और आगर मालवा में गौवंश की अवैध तस्करी के आरोप में दो लोगों पर राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (रासुका) के तहत कार्रवाई की गई है। जाहिर है हिन्दुत्व के रास्ते पर चलना कांग्रेस के लिये घाटे का सौदा नहीं लग रहा है, ऐसे स्थिति में तो और भी नहीं जब मध्यप्रदेश में भी अल्पसंख्यकों की आबादी काफी कम है। दूसरी तरफ विधानसभा चुनाव में हार के बाद भगवा खेमे में उथल-पुथल है। पूर्व मुख्यमंत्री और राज्य में पार्टी के सबसे लोकप्रिय नेता शिवराज सिंह चौहान को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपकर उन्हें एक तरह से जबरदस्ती प्रदेशबदर किया जा चुका है। दरअसल चुनाव हारने के बाद शिवराजसिंह लगातार इस बात को दोहरा रहे थे कि उनका इरादा केंद्र की राजनीति में जाने का नहीं बल्कि मध्यप्रदेश में ही रहने का है। लेकिन पार्टी आलाकमान द्वारा उन्हें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाकर केंद्रीय टीम में शामिल कर लिया गया है, फिलहाल उनकी ड्यूटी पश्चिम बंगाल और उत्तरप्रदेश जैसे राज्यों में लगा दी गयी है।

विधानसभा चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मध्यप्रदेश में अपेक्षाकृत बहुत कम सक्रिय थे और एक तरह से चुनाव अभियान की पूरी कमान शिवराज के हाथों में थी लेकिन ऐसा लगता है कि इस बार लोकसभा चुनाव के दौरान मध्यप्रदेश में चुनावी अभियान की कमान पूरी तरह से नरेंद्र मोदी और उनके सिपहसालार के हाथों में ही रहने वाली है। राहुल गांधी के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मध्यप्रदेश में अपने चुनावी अभियान की शुरुआत 15 फरवरी को होशंगाबाद से करने जा रहे हैं। मध्यप्रदेश में लोकसभा चुनाव के लिये कांग्रेस का एजेंडा तय है-किसान, बेरोजगार और नरम हिन्दुतत्व। कमलनाथ की सरकार इन्ही पर तेजी से काम करती हुई नजर आ रही है। वो हर हाल में लोकसभा चुनाव से पहले तक किसानों की कर्ज माफ़ी का वादा पूरा कर देना चाहती है। इसी के साथ ही राहुल के दौरे से ठीक पहले हुयी कमलनाथ सरकार की कैबिनेट बैठक में 'बिजली बिल माफी की योजना’, प्रदेश को युवाओं को 'बेरोजगारी भत्ता योजना’ की मंजूरी भी दी जा चुकी है। इसके बरक्स लोकसभा चुनाव के लिये भाजपा का एजेंडा का होगा यह अभी तक साफ नहीं है। शायद 15 फरवरी को होशंगाबाद में होने वाली नरेंद्र मोदी की रैली के साथ स्थिति साफ हो सके।

(ये लेखक के निजी विचार हैं)

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English summary
Lok Sabha Elections 2019: Congress Focus Farmers, Unemployed and Hindutva Issue in Madhya Pradesh.
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