भाजपा को नुकसान पहुंचा रहे हैं दूसरे दलों से आये दागी नेता
लोकसभा चुनाव 2024 में होने वाले हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश भाजपा संगठन और योगी आदित्यनाथ की सरकार ने अभी से कमर कस ली है। तैयारियों और नई रणनीतियों के जरिये संगठन के साथ सरकार भी जनता की नब्ज पहचानने की कोशिशों में जुटी हुई है। लेकिन योगी सरकार को विपक्ष से ज्यादा भीतरी चुनौतियों एवं साजिशों से जूझना पड़ रहा है। श्रीकांत त्यागी जैसे नेताओं की कारगुजारियों से आये दिन पार्टी एवं सरकार की किरकिरी हो रही है।

भाजपा अपने कार्यकर्ताओं की हरकतों के बाद भले ही उनसे पल्ला झाड़ लेने की बनी बनाई लीक पकड़ रही है, लेकिन नेताओं-कार्यकर्ताओं का अमर्यादित व्यवहार विपक्ष को सरकार एवं पार्टी पर हमला करने का पूरा मौका दे रहा है। योगी सरकार सुशासन का लक्ष्य लेकर चल रही है, लेकिन कानून को सबसे ज्यादा चुनौती पार्टी के उन कार्यकर्ताओं से मिल रही है जो किसी और दल से भाजपा में आये हैं।
स्थापित तथ्य है कि चुनावी आंकड़ों के लिहाज से उत्तर प्रदेश देश का सर्वाधिक महत्वपूर्ण राज्य है। यूपी को लेकर यह मुहावरा अक्सर नेताओं की जुबान पर रहता है कि दिल्ली की सत्ता का रास्ता लखनऊ से होकर गुजरता है। अतीत गवाह है कि यूपी में जिस भी सियासी दल ने सर्वाधिक सीटें हासिल की, दिल्ली की सत्ता में उसकी भागीदारी सुनिश्चित रही है। केंद्र की मौजूदा तथा पिछली मोदी सरकार भी इस तथ्य को बखूबी स्थापित करती है, लिहाजा भाजपा सरकार की वापसी के लिये उत्तर प्रदेश सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण एवं संभावनाओं वाला राज्य है। यहां की सीटें कम होने का सीधा प्रभाव केंद्र सरकार की ताकत पर पड़ेगा, लिहाजा भाजपा यूपी को लेकर बेहद सजग है।
लखनऊ में 29 मई को आयोजित भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति में पार्टी ने 75 लोकसभा सीटों को जीतने का लक्ष्य रखा था, लेकिन आजमगढ़ एवं रामपुर लोकसभा उपचुनाव में मिली जीत से उत्साहित भाजपा ने अब शत प्रतिशत जीत का लक्ष्य तय किया है। पार्टी प्रदेश की सभी 80 सीटों पर काबिज होने की रणनीति पर काम करने में जुट गई है। संगठन पदाधिकारी पार्टी द्वारा निर्धारित कार्यक्रमों के जरिये कार्यकर्ताओं एवं जनता के बीच जाकर सरकार की उपलब्धियां बता रहे हैं तो दूसरी तरफ मंत्री समूह मंडल एवं जिलों में जाकर विकास तथा प्रशासनिक कामों की रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं। भाजपा उन 22 हजार कमजोर बूथों को मजबूत करने में जुटी है, जिन पर यादव, दलित एवं मुसलमान वोटरों की बहुतायत है। वह इन सबको अपने साथ लाने की तैयारियों में लगी हुई है।
तैयारियों की अगली कड़ी में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अब खुद दोनों उपमुख्यमंत्रियों के साथ पूरे प्रदेश में जनता से फीडबैक लेने निकलेंगे। मंत्री समूह द्वारा दी गयी रिपोर्ट के आधार पर जमीनी हकीकत को परखा जायेगा। प्रदेश के 18 मंडलों के 75 जिलों में मुख्यमंत्री एवं दोनों उपमुख्यमंत्रियों के पास क्रमश: 6 मंडल एवं 25 जिलों का प्रभार रहेगा। तीनों नेता सभी जिलों में जायेंगे तथा स्थानीय स्तर पर संगठन, सरकार एवं प्रशासनिक स्तर पर आ रही परेशानियों को समझेंगे। विकास कार्यों की समीक्षा करेंगे। जनता के साथ कार्यकर्ताओं की शिकायतों को दूर करने का प्रयास भी होगा। पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों के कामों का कार्यकर्ताओं से फीडबैक लेकर सामंजस्य बनाने का प्रयास भी किया जायेगा।
इन तैयारियों के बीच भाजपा को श्रीकांत त्यागी जैसे अराजक कार्यकर्ताओं की कारगुजारियों से भी जूझना पड़ रहा है। यूपी में योगी 2.0 सरकार बनने के बाद शासन के सामने कई ऐसी चुनौतियां आई हैं, जिनसे पार्टी और सरकार दोनों की किरकिरी हुई है। श्रीकांत त्यागी भाजपा कैडर का कार्यकर्ता नहीं है, बावजूद इसके भाजपा में उसकी तूती बोल रही है। उसे पांच-पांच पुलिस सुरक्षाकर्मी मिले हुए थे। स्वामी प्रसाद मौर्य का नजदीकी बताया जाने वाला श्रीकांत इसके पहले भी विवादों में रहा है।
लखनऊ के गोमतीनगर थाने में उसकी पत्नी ने ही त्यागी का दूसरी महिला से अवैध संबंध होने को लेकर बवाल काटा था। हाई वोल्टेज ड्रामा के बाद मामले को रफा-दफा कर दिया गया, लेकिन पार्टी ने उसे बाहर करने की जहमत नहीं उठायी, जिसकी करतूतों के कारण अब एक बार फिर सरकार को बैकफुट पर आना पड़ा है।
नोएडा प्रकरण में किरकिरी होने के बाद भले ही भाजपा ने श्रीकांत त्यागी से पल्ला झाड़ लिया हो, लेकिन वह भाजपा में ऊंची पहुंच वाला व्यक्ति है। वीरेन्द्र सिंह मस्त जब किसान मोर्चा के अध्यक्ष थे तब वह धन बल का इस्तेमाल करके किसान मोर्चा में पहुंच गया। भाजपा में अक्सर ये आरोप लगते रहे हैं कि कई पदाधिकारी पैसे लेकर दूसरी पार्टी से आने वाले लोगों को संगठन में पद बांटते रहे हैं, जैसा कि श्रीकांत त्यागी के मामले में हुआ। लेकिन दूसरों दलों से आनेवाले ये दागी नेता अपने कर्मों से भाजपा को लाभ पहुंचाने की बजाय नुकसान ही कर रहे हैं। दूसरों दलों से आये दागी नेता यहां भी वही कर रहे हैं जिसकी वजह से सपा बसपा की सरकारें बदनाम हुई हैं।
दूसरे दलों से आये नेताओं की कारगुजारियों का सबसे ज्यादा असर योगी आदित्यनाथ सरकार की छवि पर पड़ रहा है। खासकर महिलाओं के साथ होने वाले अपराधों से सरकार भी कटघरे में खड़ी हो रही है। योगी सरकार महिलाओं की सुरक्षा एवं समृद्धि के लिये योजनाएं चला रही है तो दूसरी तरफ कुछ भाजपा नेता महिलाओं से अमर्यादित व्यवहार कर रहे हैं। श्रीकांत त्यागी के बाद बरेली में भाजपा व्यापार प्रकोष्ठ के नेता जितेंद्र रस्तोगी पर एक महिला को बुरी तरह मारने पीटने के आरोप लगे।
पुलिस ने रस्तोगी को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन ऐसे प्रकरण जनता के बीच सरकार की सकारात्मक छवि को धूमिल कर रहे हैं। आगरा में भी भाजपा नेता टिंकू भार्गव ने कानून को चुनौती देते हुए अपने साथी नवीन वर्मा की जघन्य हत्या कर सिर और धड़ अलग कर दिया। इन बड़ी एवं वीभत्स घटनाओं के अलावा थानों पर आये दिन होने वाले विवादों की लिस्ट लंबी है, जिसमें दूसरे दलों से भाजपा में आये कार्यकर्ताओं के नाम उछलते रहते हैं।
बहुतेरी ऐसी घटनायें हैं, जिनका दूसरा सिरा सपा-बसपा से आये नेताओं और समर्थकों से जुड़ जाता है। जौनपुर में बदलापुर से भाजपा विधायक रमेश मिश्र के प्रतिनिधि गंगा प्रसाद सिंह का एक दरोगा से विवाद हो गया। रमेश मिश्र बसपा से भाजपा में आये हैं। विधायक समर्थकों ने थाने पर इतना बवाल काटा कि सरकार की किरकिरी हुई। विवादित मामलों में भाजपा के मूल कैडर के नेताओं एवं कार्यकर्ताओं का नाम शायद कभी कभार आता हो, लेकिन दूसरे दलों से भाजपा में आये नेता व कार्यकर्ता आये दिन सरकार की किरकिरी करा रहे हैं।
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(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)
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