Lareb Hashmi: प्रयागराज की घटना के दुर्भाग्यपूर्ण संकेत
प्रयागराज में 24 नवंबर को लारेब हाशमी नामक एक नौजवान ने एक बस कंडक्टर को पहले तेज धारदार हथियार से मारकर लहुलहान कर दिया, उसके बाद उसने एक वीडियो बनाया और दावा किया कि उसने एक ऐसे काफिर को मार दिया है जिसने उसके नबी की शान में गुस्ताखी की थी।
घटना राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित हुई और कुछ लोगों ने इसे कन्हैयालाल 2 कहना भी शुरु कर दिया। लेकिन सवाल यह है कि क्या लारेब हाशमी सही बोल रहा है?

यूपी पुलिस ने पूरे घटनाक्रम के बारे में जो जानकारी दी है उसके मुताबिक हाशमी का उस बस कंडक्टर से एक दिन पहले किराये को लेकर झगड़ा हो गया था। कंडक्टर हरिकेश विश्वकर्मा ने उसे किराये को लेकर काफी डांट दिया। उस समय उस बस में उसके ही इंजीनियरिंग कालेज में पढ़नेवाली लड़कियां भी बैठी हुई थीं। उसने अपने आप को अपमानित महसूस किया और कंडक्टर को सबक सिखाने का फैसला किया। अगले दिन वह उसी बस में सवार हुआ और तेज धारदार हथियार से उसकी गर्दन पर जानलेवा हमला कर दिया। बस कंडक्टर बुरी तरह से घायल है और आखिरी खबर आने तक मौत से संघर्ष कर रहा है।
इस बीच लारेब हाशमी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर उभरा जिसमें वह आश्चर्यजनक रूप से कुछ और ही बात कर रहा है। लारेब हाशमी अपने वीडियो में कह रहा है कि "यहां से लेकर फ्रांस तक ये गरीब नवाज के दर का कुत्ता पैगाम दे रहा है कि जिसने हुजुर के खिलाफ बात की है वो बचेगा नहीं। लब्बैक या रसूल अल्लाह। हम जियेंगे आपके लिए और मरेंगे आपके लिए। इंशाल्लाह मार देंगे।" अपने वीडियो मैसेज में वह आगे कहता है कि "कोई ये न समझे कि हुकुमत योगी की है या मोदी की है। हमारे दिलों पर राज सिर्फ हमारे मुस्तफा का चलता है। लब्बैक लब्बैक लब्बैक या रसूल अल्लाह।"
इसके बाद वह मुसलमानों से अपने नबी के नाम जान माल कुर्बान करने की अपील करता है। खादिम हुसैन रिजवी का नाम लेता है और उसका हवाला देता है। थोड़ी बहुत पंजाबी भी बोलता है और वीडियो बंद हो जाता है। इस वीडियो को देखने के बाद एकबारगी यकीन करना मुश्किल है कि इसे बनानेवाला कोई प्रयागराज का लड़का हो सकता है। जिस तरह से वह पंजाबी में बात करता है और पाकिस्तानी पंजाबी तरीके की पगड़ी बांधे हुए है उससे एकबारगी शक होता है कि हो न हो यह पाकिस्तानी पंजाब का हो। लेकिन ऐसा नहीं है।
वह प्रयागराज के ही सोरांव थाने के असवा हाजीगंज गांव का रहने वाला है। परिवार का गुजारा मुर्गी फार्म से चलता है लेकिन मां बाप उसका बेहतर भविष्य बनाने के लिए प्राइवेट इंजीनियरिंग कालेज में पढ़ा रहे हैं। कुल जमा 20-22 साल की उम्र है। लेकिन इस उम्र में ही उसने जिहाद करने की ठान ली और एक छोटी सी बात पर कंडक्टर की जान लेने का प्रयास किया। लेकिन जब उसने वीडियो बनाया तो सच्चाई को पूरी तरह छिपा ले गया। उसकी जगह उसने अपने नबी की शान में गुस्ताखी वाली बात कही और मुसलमानों को भड़काकर अपनी जान माल कुर्बान करने की बात भी कही। उसने ऐसा क्यों किया होगा इसे समझने से पहले थोड़ा खादिम हुसैन रिजवी को समझना जरूरी होगा जिसके वीडियो देखकर उसके जिहाद का जुनून जागा।
खादिम हुसैन रिजवी पाकिस्तानी पंजाब में बरेलवी मशलक का मौलाना था जिसका उभार मुमताज कादरी को लेकर हुआ। मुमताज कादरी पाकिस्तानी पंजाब के गवर्नर सलमान तासीर का अंगरक्षक था और उसने 2011 में उनकी हत्या कर दी थी। मुमताज कादरी का कहना था कि सलमान तासीर नबी निंदक आशिया बीबी का बचाव कर रहे थे। इसके बाद मौलाना खादिम हुसैन रिजवी ने ही मुमताज कादरी के बचाव में खूब कैम्पेन किया। उसे इस्लाम का सर्वोच्च योद्धा 'गाजी' घोषित किया और कहा कि मुमताज कादरी ने जो किया इसके लिए उसका सर्वोच्च इस्लामिक सम्मान किया जाना चाहिए। हालांकि गवर्नर की हत्या का दोषी मानते हुए पाकिस्तानी अदालत ने 2016 में मुमताज कादरी को फांसी दे दी।
लेकिन खादिम हुसैन रिजवी यहीं रुका नहीं। चाहे फ्रांस में कार्टून का विवाद हो या पाकिस्तान को सच्चा इस्लामिक मुल्क बनाने की कोशिशें, उसकी सक्रियता और लोकप्रियता दोनों ही बढ़ती गयी। मूलत: पाकिस्तानी पंजाब का रहनेवाला खादिम खुलेआम हिन्दुओं और सिक्खों की तुलना लैट्रिन से करता था और उनसे कोई भी रिश्ता न रखने के लिए मुसलमानों को उकसाता था। वह ठेठ पंजाबी में बात करता था जिसका असर स्थानीय लोगों पर भी खूब होता था।
हालांकि नवंबर 2020 में उसकी कोरोना से मृत्यु हो गयी लेकिन खुद कभी मोबाइल का इस्तेमाल न करनेवाले खादिम के वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल होते रहे। स्वाभाविक है उसका असर भारत में भी मुसलमानों के एक वर्ग पर हुआ खासकर उन पर जो बरेलवी मशलक के माननेवाले हैं। लारेब हाशमी भी उन्हीं लोगों में से एक है। लेकिन लारेब ने जिस तरह से अपने अपराध को छिपाने के लिए अपने नबी की शान में गुस्ताखी का झूठ बोला वह चौंकानेवाला है।
अभी तक निजी रंजिश या अपने अपराध को छिपाने के लिए इस तरह के झूठ पाकिस्तान में ही बोले जाते रहे हैं। पेशावर युनिवर्सिटी के कम्युनिस्ट छात्र मशाल खान को निजी रंजिश की वजह से कुछ लड़कों ने 2017 में घेरकर मार दिया था। बाद में उस पर आरोप लगा दिया कि वह इस्लाम की तौहीन कर रहा था। इसी तरह श्रीलंकाई नागरिक प्रियांका कुमारा की 2021 में लिंचिंग कर दी गयी थी। प्रियांका सियालकोट की एक गारमेन्ट फैक्ट्री में जनरल मैनेजर थे। वो अक्सर मजदूरों से कड़ाई से पेश आते थे और समय से काम करने के लिए कहते थे। 3 दिसंबर को उन्हीं की फैक्ट्री के मजदूरों ने संगठित होकर उन पर इस्लाम की तौहीन का आरोप लगा दिया और सरेराह एक पगलाई भीड़ ने पीट पीटकर मार दिया।
यह पगलाई भीड़ भी उसी तहरीक ए लब्बैक की बताई जाती थी जिसकी शुरुआत खादिम हुसैन रिजवी ने की थी। इस तरह की और भी घटनाएं पाकिस्तान में आये दिन घटित होती रहती हैं जहां अपने निजी झगड़े या रंजिश को निपटाने के लिए सामनेवाले व्यक्ति पर इस्लाम की तौहीन या नबी की शान में गुस्ताखी का आरोप लगा दिया जाता है। फिर उसको या तो मार दिया जाता है या पुलिस द्वारा गिरफ्तार करवा दिया जाता है। लेकिन भारत में लारेब हाशमी द्वारा बस कंडक्टर की हत्या का प्रयास और उसके बाद उस पर इस्लाम के पैगंबर की तौहीन का आरोप लगाकर अपने आपको गाजी साबित करने की पहली घटना है।
निश्चय ही यह दुर्भाग्यपूर्ण है और एक खतरनाक ट्रेन्ड की शुरुआत भी। अपने अपराध को छिपाने के लिए अल्लाह और उसके रसूल की आड़ लेकर बचने की कोशिश संभवत: ये अपराधी इसलिए करते हैं क्योंकि इससे वो अपने आपको गाजी साबित करना चाहते हैं। लेकिन ऐसे लोग भूल जाते हैं कि आज की दुनिया में अरब देशों या पाकिस्तान जैसे इस्लामिक मुल्कों में भी यह संभव नहीं तो फिर भारत में तो सेकुलर लॉ है। जब सलमान तासीर का हत्यारा मुमताज कादरी हो या प्रियंका कुमारा के हत्यारे, उनको इस्लामिक हुकूमत पाकिस्तान में फांसी हो सकती सकती है तो भारत में गाजी बनने की ऐसी झूठी कोशिश कहां तक कामयाब होगी?
इसीलिए इस पूरे मामले को यूपी एटीएस ने अपने हाथ में ले लिया है। एटीएस ने न सिर्फ उससे पूछताछ की है बल्कि उसके घर पर भी दबिश दी है जिसके बाद से उसके पिता और भाई घर से फरार हैं।
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)












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