Karnataka BJP List: पहली सूची जारी करने में छूटे बीजेपी के पसीने
कर्नाटक में विधानसभा चुनाव हेतु टिकट को लेकर भाजपा के भीतर भारी उठा पटक चल रही थी। लंबे मंथन और खींचतान के बाद भाजपा ने पहली सूची तो जारी कर दी है लेकिन इससे विद्रोह और बगावत के सुर खत्म हो जाएंगे, ऐसा नहीं सोचना चाहिए।

Karnataka BJP List: कर्नाटक में 150 सीटों को जीतने का लक्ष्य लेकर चल रही भारतीय जनता पार्टी को पहली सूची जारी करने में पसीने छूट गए। सबसे अनुशासित माने जाने वाली पार्टी में कर्नाटक के शीर्ष नेताओं ने टिकट को लेकर पार्टी के भीतर ऐसा गदर मचाया कि भाजपा की सर्वाेच्च निर्णायक संस्था पार्लियामेंट्री बोर्ड की बैठक के बाद भी भाजपा को सूची में कई फेरबदल करने के लिए मजबूर होना पड़ा।
कर्नाटक विधानसभा चुनाव की घोषणा होने के बाद और भाजपा की पहली सूची 11 अप्रैल को आने के बीच के 11 दिनों में येदियुरप्पा सात बार, प्रदेश अध्यक्ष 8 बार और कर्नाटक प्रभारी अरूण सिंह 5 बार दिल्ली से बेंगलुरू और बेंगलुरू से दिल्ली नाप चुके थे, लेकिन उम्मीदवारों पर सहममि नहीं बन पाई। आखिरकार गृहमंत्री अमित शाह को हस्तक्षेप कर सभी नेताओं को साथ चलने और आपस में सामंजस्य बनाने के निर्देश देने पड़े।
इस दौरान कर्नाटक भाजपा के दिग्गज नेता येदियुरप्पा अपने बेटे और अपने समर्थकों को टिकट दिलाने के लिए अड़े रहे। पूर्व उपमुख्यमंत्री और भाजपा के महत्वपूर्ण दलित नेता ईश्वरप्पा ने अपनी सीट से अपने बेटे को टिकट देने का दबाव बनाया। ईश्वरप्पा शिवमोगा विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। पूर्व मुख्यमंत्री जगदीश शेट्टार ने टिकट न मिलने पर अन्य विकल्पों पर विचार करने की धमकी दी। पूर्व मुख्यमंत्री सदांनद गौड़ा टिकट वितरण में तवज्जो न मिलने से कोप भवन में चले गए।
भाजपा के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री और कर्नाटक से आने वाले बीएल संतोष भी येदियुरप्पा को मिल रहे महत्व से परेशान दिखे और अपने भरोसेमंद उम्मीदवारों को टिकट देने की पैरवी करते रहे। भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बेंगलुरू दक्षिण से सांसद तेजस्वी सूर्या युवा नेताओं को टिकट दिलवाने के लिए दिल्ली में डेरा डाले रहे। कर्नाटक प्रदेश अध्यक्ष नलिन कतील कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए नेताओं को हर हाल में टिकट देने और अपने दो रिश्तेदारों को टिकट देने के लिए पार्टी से मनुहार करते रहे। तो कर्नाटक भाजपा के संगठन महामंत्री जीवी राजेश संघ की सूची को आगे बढ़ाने में मशगूल रहे।
हालांकि इस उठापटक में कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा संसदीय बोर्ड के नेता बीएस येदियुरप्पा के बेटे विजयेंद्र को येदियुरप्पा की परम्परागत सीट शिकारीपुरा से टिकट दे दिया गया है। येदियुरप्पा ने सक्रिय राजनीति से सन्यास लेने की घोषणा की थी, लेकिन पार्टी हाईकमान को संदेश भेज कर साफ कर दिया था कि उनकी सीट से उनके बेटे को ही टिकट दिया जाए। लिंगायत मतदाताओं में येदियुरप्पा का प्रभाव देखकर भाजपा हाईकमान को येदियुरप्पा की बात मानने के लिए मजबूर होना पड़ा।
मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई अपनी मौजूदा सीट हावेरी जिले के शिगांव से ही चुनाव लड़ेंगे। पार्टी ने बेंगलूरु के पूर्व पुलिस आयुक्त भास्कर राव को शहर के चामराजपेट से उतारा है जबकि आवास मंत्री वी. सोमण्णा और राजस्व मंत्री आर. अशोक को दो-दो सीटों से उतारा गया है। मैसूरु जिले की वरुणा सीट पर सोमण्णा कांग्रेस उम्मीदवार और विपक्ष के नेता सिद्धरामैया को चुनौती देंगे। सोमण्णा को पार्टी ने चामराजनगर से भी टिकट दिया है। सूची घोषित होने से पहले पार्टी से नाराज बताए जा रहे सोमण्णा ने वरुणा से पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या के खिलाफ चुनाव लड़ने से इन्कार कर दिया था। सोमण्णा ने पार्टी नेतृत्व को साफ कह दिया था कि वह वरुणा से चुनाव नहीं लड़ेंगे, फिर भी उन्हें सिद्धरामैया के खिलाफ टिकट दे दिया गया है।
इसी तरह राजस्व मंत्री आर. अशोक को दो सीटों से उम्मीदवार बनाया गया है। आर. अशोक दो सीटों पद्मनाभनगर और कनकपुरा से चुनाव लड़ेंगे। कनकपुरा से कांग्रेस के दिग्गज डीके शिवकुमार से उनका मुकाबला होगा। सोमण्णा और आर. अशोक को दो सीटों से उतारने का मतलब यही निकाला जा सकता है कि बीजेपी भी मान रही है कि इस बार राज्य में कांग्रेस से तगड़ी लड़ाई है। इसलिए जिन उम्मीदवारों को कांग्रेस के बड़े नेताओं के खिलाफ उतारा गया है उन्हें दूसरी सेफ सीट से भी टिकट दिया गया है।
जिन प्रमुख नेताओं के बेटों को टिकट मिला है उनमें येदियुरप्पा के अलावा मंत्री आनंद सिंह की जगह उनके बेटे सिद्धार्थ सिंह को विजयनगर जिले की विजयनगर सीट से टिकट दिया गया है। इस बार आनंद सिंह चुनाव मैदान में नहीं उतरेंगे। इसी तरह पूर्व मंत्री दिवंगत उमेश कत्ती के बेटे निखिल कत्ती को हुक्केरी से टिकट दिया गया है।
भाजपा ने अथनी से मौजूदा विधायक महेश कुमटहल्ली को टिकट दिया है। कुमटहल्ली जद-एस और कांग्रेस छोड़कर आने वाले विधायकों में शामिल थे। हालांकि, अथनी सीट पर भाजपा के पूर्व उपमुख्यमंत्री और राज्य के उपाध्यक्ष लक्ष्मण सावडी टिकट के दावेदार थे मगर पार्टी ने जनता दल सेकुलर से आये कुमटहल्ली को ही फिर से उतारा है। अब लक्ष्मण सावडी नाराज हैं। उन्हें मनाने के लिए मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने पहल की है और कहा है कि उन्हें मना लिया जाएगा।
लक्ष्मण सावडी पहले भी इसी सीट से चुनाव लड़ते रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि पार्टी सावडी को टिकट देना चाहती थी लेकिन, पूर्व मंत्री रमेश जारकीहोली ने कुमटहल्ली को टिकट नहीं मिलने पर खुद भी चुनाव नहीं लड़ने की चेतावनी दी थी। सूत्रों का कहना है कि लक्ष्मण सावडी कांग्रेस के संपर्क में भी हैं। यहां यह भी गौर करनेवाली बात है कि हाल ही में भाजपा में शामिल हुए जद-एस के विधायक ए. टी. रामास्वामी को अरकलगुड से टिकट नहीं मिला है।
स्वास्थ्य मंत्री डॉ के. सुधाकर को चिकबल्लापुर और उच्च शिक्षा मंत्री डॉ सी. एन. अश्वथ नारायण को मल्लेश्वरम से ही फिर टिकट दिया गया है। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव सी. टी. रवि को मौजूदा चिकमगलूरु सीट से उतारा गया है। जबकि हिजाब विवाद के कारण चर्चा में आये उडुपी से विधायक रघुपति भट का पत्ता कट गया है। पार्टी ने वहां नए चेहरे को मौका दिया है।
बहरहाल, कर्नाटक विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा ने 189 उम्मीदवारों की जो पहली सूची जारी की है उसमें 52 नए चेहरे हैं। सूची में आठ महिलाओं को जगह दी गई है, जबकि 20 मौजूदा विधायकों के टिकट काट दिये गये हैं। पार्टी महासचिव अरुण सिंह के मुताबिक, भाजपा ने 32 ओबीसी, 30 अनुसूचित जाति, 16 अनुसूचित जनजाति के उम्मीदवारों को चुनावी मैदान में उतारा है।
गौरतलब है कि 10 मई को होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए 13 अप्रैल को अधिसूचना जारी होगी और 20 अप्रैल तक नामांकन पत्र दाखिल किए जा सकेंगे। मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस पहले ही 165 उम्मीदवारों की घोषणा कर चुकी है जबकि एक सीट पर कांग्रेस कर्नाटक सर्वोदय पार्टी को समर्थन करेगी। जनता दल-एस भी 93 उम्मीदवारों की घोषणा कर चुका है। भाजपा द्वारा बची हुई सीटों पर उम्मीदवारों की सूची बुधवार देर रात या गुरूवार को जारी करने की संभावना है।
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बहरहाल भाजपा ने काफी मेहनत मशक्कत के बाद पहली सूची जारी तो कर दी है और हर संभव विद्रोह को संभालने का प्रयास भी किया है लेकिन जिन नेताओं या मौजूदा विधायकों को टिकट नहीं मिला है वो आगे क्या करते हैं, ये देखनेवाली बात होगी।
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(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)












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