Joshimath Sinking: अंधाधुंध विकास की कीमत चुका रहा है जोशीमठ
जोशीमठ में तेजी से हो रहे भू-धंसाव का दायरा भारत-तिब्बत सीमा की ओर बढ़ने लगा है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि भू-धंसाव की घटना पर जल्द ही प्रभावी रोक नहीं लगी तो यह देश की सुरक्षा को भी खतरा पैदा कर सकता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2016 में चारधाम यात्रा के लिए आल वेदर रोड्स का एलान किया था तो उत्तराखंड में बहुत उत्साह था। चारधाम यात्रा के मार्ग पर लगभग हर साल आपदा आती ही है, जिससे धार्मिक पर्यटन प्रभावित होता है। धार्मिक पर्यटन पर असर पड़ने से इस मार्ग के पूरे इलाके की अर्थव्यवस्था प्रभावित होती है। थोड़ी बहुत खेती के बाद चारधाम यात्रा के तीर्थयात्री ही इस पूरे क्षेत्र की जीवनरेखा हैं। इसलिए प्रधानमंत्री की घोषणा का स्थानीय लोगों द्वारा स्वागत हुआ था। उन्हें लगा था कि तीर्थयात्रा साल भर चलेगी, तो उनके रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
लेकिन इस इलाके में एक डर हमेशा से सताता रहा है कि अंधाधुंध विकास उनका जीवन संकट में डाल देगा। इसलिए प्रधानमंत्री की चारधाम यात्रा के लिए बनाई जा रही आल वेदर रोड्स के नतीजों से भी वहां के लोग आशंकित थे। कुछ लोगों ने सरकार को आगाह भी किया था कि स्थानीय लोगों के जीवन को जोखिम में डाल कर विकास की रूपरेखा नहीं बनाई जाए।उनकी आशंकाएं जायज थीं, क्योंकि तीन साल पहले यानि 2013 में केदारनाथ मन्दिर और उस रास्ते पर आई आपदा में तीन हजार से ज्यादा यात्री और स्थानीय लोग मौत में मुहं में समा गए थे। अनेक बच्चे अनाथ हो गए थे, कईयों की तो लाशें भी नहीं मिलीं थीं। तब राज्य सरकार और केंद्र सरकार राहत कार्यों में भी विफल रहीं थी।
नरेंद्र मोदी का राजनीतिक उदय उसी आपदा के बाद शुरू हुआ था, जब उन्होंने अपने राज्य गुजरात के यात्रियों को खुद मोनिटरिंग कर के निकाला था। तत्कालीन उत्तराखंड सरकार को उन्होंने राहत की पेशकश भी थी, लेकिन उत्तराखंड सरकार ने केंद्र सरकार के इशारे पर उसे स्वीकार नहीं किया। वही कांग्रेस के विनाश और नरेंद्र मोदी के उदय होने का सबसे बड़ा टर्निंग प्वाईंट बना। देश भर के हिन्दुओं में एक संदेश गया कि उनका रक्षक कौन है। इसलिए 2017 के उत्तराखंड विधानसभा चुनाव से पहले प्रधानमंत्री के नाते नरेंद्र मोदी ने जब चारधाम यात्रा के लिए लिए आल वेदर मार्ग का वादा किया तो जनता का भरपूर समर्थन मिला। भाजपा को 70 में से 57 सीटें मिलीं, लेकिन पर्यावरणविदों की आशंकाएं तब भी थीं कि यह विकास कहीं देवभूमि में विनाश न ले आए।
आज हम जोशीमठ में वही देख रहे हैं, जिसकी आशंका उत्तराखंड के पर्यावरणविद हमेशा से व्यक्त करते रहे हैं। जोशीमठ बद्रीनाथ, हेमकुंड साहब और अंतरराष्ट्रीय स्कीईंग स्थल औली का प्रवेश द्वार है, आदिगुरू शंकराचार्य की तपोभूमि भी है। यह शहर दरक रहा है, घरों, दुकानों, बाजारों, खेतों, जंगलों में बड़ी बड़ी दरारें आ गई हैं। 603 घरों में दरारें आई हैं, जिन्हें खाली करवा कर उनके निवासियों को अस्थाई कैंप में ले जाया गया है। सरकार ने पूरे इलाके के सभी विकास कार्यों पर तुरंत रोक लगा दी है।
यह सवाल अपनी जगह है कि सरकारें पूर्व की चेतावनियों को अनदेखा क्यों करती हैं। जोशीमठ पर आने वाले इस संकट की आशंका तो 46 साल पहले 1976 में एक रिपोर्ट में व्यक्त कर दी गई थी। 1976 में गढवाल के तत्कालीन कमिश्नर एम.सी. मिश्रा की अध्यक्षता में बनी 18 सदस्यीय कमेटी ने रिपोर्ट दी थी, जिसमें जोशीमठ को खतरे का जिक्र था।
इस रिपोर्ट में साफ़ कहा गया था कि जोशीमठ धंस रहा है। मिश्रा समिति ने भूस्खलन और भू-धंसाव वाले क्षेत्रों को ठीक कराकर वहां पौधे लगाने की सलाह दी थी। इसके साथ ही समिति ने कहा था कि स्थल की स्थिरता की जांच करने के बाद ही क्षेत्र में आगे का निर्माण किया जाना चाहिए और ढलानों पर उत्खनन पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए। खुदाई या विस्फोट से कोई बोल्डर नहीं हटाया जाना चाहिए और भूस्खलन क्षेत्र पर कोई पेड़ नहीं काटा जाना चाहिए। विशेष रूप से मारवाड़ी और जोशीमठ के बीच के क्षेत्र में व्यापक वृक्षारोपण कार्य शुरू किया जाना चाहिए और ढलानों पर जो दरारें विकसित हुई हैं, उन्हें सील कर दिया जाना चाहिए।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पहाड़ी की तलहटी पर लटकने वाले शिलाखंडों को उचित सहारा दिया जाना चाहिए और नदी संरक्षण के उपाय किए जाने चाहिए। लेकिन पिछले 46 सालों में जोशीमठ में वह सब कुछ उसी तरह होता रहा, जिसकी मनाही की गई थी, और वह नहीं हुआ, जो करने के लिए कहा गया था।
वाडिया इंस्टीच्यूट आफ हिमालयन जियोलोजी के डायरेक्टर कलाचंद सेन ने कहा है कि मानवजनित और प्राकृतिक दोनों कारणों से जोशीमठ में जमीन धंस रही है। यह कोई अचानक नहीं हुआ है, तीन प्रमुख कारक जोशीमठ की जमीन को कमजोर कर रहे हैं। जोशीमठ भूकंप के अत्यधिक जोखिम वाले जोन पांच में आता है और पानी का लगातार बहना चट्टानों को कमजोर बनाता है।जोशीमठ कई सौ साल पहले हुए भूस्खलन के मलबे पर बना है।
एटकिन्स ने सबसे पहले 1886 में हिमालयन गजेटियर में भूस्खलन के मलबे पर जोशीमठ की स्थिति के बारे में लिखा था। 1976 की मिश्रा रिपोर्ट में भी इसका जिक्र है। कलाचंद सेन ने कहा है कि हिमालयीन नदियों के नीचे जाने और पिछले साल ऋषिगंगा और धौलीगंगा नदियों में अचानक आई बाढ़ और भारी बारिश जोशीमठ पर आई आपदा के तात्कालिक कारण हो सकते हैं।
बद्रीनाथ, हेमकुंड साहब और औली के यात्रियों के कारण जोशीमठ शहर पर भारी दबाव बना रहता है। आबादी बढ़ गई है, जगह जगह होटल बन रहे हैं, पहाड़ों और वनों का कटान हो रहा है। जोशीमठ में भू-धंसाव का कारण बेतरतीब निर्माण, पानी का रिसाव, ऊपरी मिट्टी का कटाव और मानव जनित कारणों से जल धाराओं के प्राकृतिक प्रवाह में रुकावट को बताया गया है।
पिछले दो दशक में जोशीमठ का अनियंत्रित विकास हुआ है। बारिश और पूरे साल घरों से निकलने वाला पानी नदियों में जाने के बजाय जमीन के भीतर समा रहा था। यह भू-धंसाव का प्रमुख कारण है। धौलीगंगा और अलकनंदा नदियां विष्णुप्रयाग क्षेत्र में लगातार टो कटिंग (नीचे से कटाव) कर रही हैं। इस वजह से भी जोशीमठ में भू-धंसाव तेजी से बढ़ा है। 2013 में आई केदारनाथ आपदा, 2021 की रैणी आपदा, बदरीनाथ क्षेत्र के पांडुकेश्वर में बादल फटने की घटनाएं भी भू-धंसाव के लिए काफी हद तक जिम्मेदार हैं।
Recommended Video
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से बात की है और उन्हें सभी परिवारों को सुरक्षित बचाने के साथ साथ जोशीमठ को बचाने की कार्य योजना पर भी रिपोर्ट भेजने को कहा है। यह मसला स्थानीय मसला नहीं है, कुछ सौ परिवारों के घरों, खेतों, सड़कों इमारतों या पहाड़ के एक शहर को बचाने का मसला नहीं है। इसके दीर्घकालीन प्रभाव पड़ेंगे। तेजी से हो रहे भू-धंसाव का दायरा भारत-तिब्बत सीमा की ओर बढ़ने लगा है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि भू-धंसाव की घटना पर जल्द ही प्रभावी रोक नहीं लगी तो यह देश की सुरक्षा को भी खतरा पैदा कर सकता है।
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)
-
IND vs NZ: 'वह मैदान पर मेरे साथ थी', ईशान किशन जिस बहन पर छिड़कते थे जान, उसकी मौत से घर में पसरा सन्नाटा -
जश्न या अश्लीलता? हार्दिक पांड्या की इस हरकत पर फूटा फैंस का गुस्सा, सोशल मीडिया पर लगा 'छपरी' का टैग -
Ladli Behna Yojana: अप्रैल में कब आएंगे 1500 रुपये? जानें किस तारीख को आएगी अगली किस्त -
Ishan Kishan ने आंसुओं को दबाकर फहराया तिरंगा, घर से आई दो मौतों की खबर फिर भी नहीं हारी हिम्मत, जज्बे को सलाम -
T20 World Cup 2026: धोनी के 'कोच साहब' कहने पर गंभीर ने दिया ऐसा जवाब, लोग रह गए हैरान, जानें क्या कहा? -
LPG Gas Booking Number: इंडेन, भारत गैस और HP गैस सिलेंडर कैसे बुक करें? जानें सरकार की नई गाइडलाइन -
Weather Delhi NCR: दिल्ली में मौसम का डबल अटैक! अगले 72 घंटों में आने वाला है नया संकट, IMD का अलर्ट -
Mojtaba Khamenei Wife: ईरानी नए नेता की बीवी कौन? 10वीं के बाद बनीं दुल्हन-निकाह में दी ये चीजें, कितने बच्चे? -
रमजान के महीने में मुस्लिम पत्नी की दुआ हुई कबूल, हिंदू क्रिकेटर बना चैम्पियन, आखिर कौन है यह महिला -
कौन थीं Ishan Kishan की बहन वैष्णवी सिंह? खुद के दम पर बनाई थी अपनी पहचान, करती थी ये काम -
MP CM Kisan Kalyan Yojana: किसानों का बढ़ रहा इंतजार, कब आएगी सीएम किसान कल्याण योजना की 14वीं किस्त? -
Trump Netanyahu Clash: Iran से जंग के बीच आपस में भिड़े ट्रंप-नेतन्याहू! Khamenei की मौत के बाद पड़ी फूट?












Click it and Unblock the Notifications