Art and Culture in Constitution: भारत की सांस्कृतिक चेतना के वाहक हैं संविधान में छपे चित्र
Art and Culture in Constitution: आज 'संविधान दिवस' है। देश इस दिन को राष्ट्रीय संवैधानिक दिवस और राष्ट्रीय कानून दिवस के रूप में भी मनाता है। वर्ष 2015 में भारत सरकार ने संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की 125वीं जयंती के उपलक्ष्य में प्रतिवर्ष 26 नवंबर को 'संविधान दिवस' के रूप में मनाने का फैसला किया था। हर भारतीय यह जानता है कि 26 नवम्बर, 1949 को तत्कालीन सरकार ने संविधान को अंगीकार कर राष्ट्र को समर्पित किया था और 26 जनवरी, 1950 से इसे लागू किया गया।

भारत का संविधान विश्व का सबसे लम्बा लिखित संविधान है लेकिन इसे Bag of Borrowings भी कहा जाता है। वह इसलिए क्योंकि इसके अधिकतर प्रावधान अन्य लोकतांत्रिक देशों के संविधान से लिये गए थे। सरकार का संसदीय स्वरूप, पंथ निरपेक्षता, वयस्क मताधिकार, एकल नागरिकता, नागरिकों को प्राप्त मौलिक अधिकार, संसदीय संप्रभुता, राज्य के नीति-निदेशक तत्त्व आदि भारतीय संविधान की वे विशेषताएं हैं जो इसे विश्वभर में अनूठा बनाती हैं।
संविधान सभा की खास बातें
कैबिनेट मिशन की संस्तुति पर जुलाई, 1946 को संविधान सभा का गठन किया गया। संविधान सभा में कुल 389 सदस्य शामिल किये गए जिनमें 292 ब्रिटिश प्रांत से, 04 चीफ कमिश्नर क्षेत्र से तथा 93 देशी रियासतों से थे।
देश के विभाजन के पश्चात संविधान सभा की कुल सदस्य संख्या 299 हो गई थी जिनमें अनुसूचित जनजाति सदस्यों की संख्या 33 और 12 महिलाएं सम्मिलित थीं। 09 दिसंबर, 1946 को डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा को संविधान सभा का अस्थाई अध्यक्ष बनाया गया और 11 दिसंबर, 1946 को डॉ. राजेंद्र प्रसाद स्थाई अध्यक्ष चुने गए जो भारतीय गणराज्य के प्रथम राष्ट्रपति भी बने।
संविधान सभा की कार्यवाही 13 दिसंबर, 1946 से प्रारंभ हुई तथा 22 दिसंबर, 1946 को उद्देश्य प्रस्ताव स्वीकृत हुआ। 29 अगस्त, 1947 को डॉ. अंबेडकर की अध्यक्षता में 07 सदस्यीय प्रारूप समिति का गठन हुआ। बेनेगल नरसिंह राव संविधान सभा के सलाहकार के रूप में बने रहे।
कैसा था हस्तलिखित संविधान?
संविधान की अंग्रेजी में मूल प्रति को स्व. प्रेमबिहारी नारायण रायजादा ने हाथ से लिखा था जबकि हिंदी में मूल प्रति के लेखक स्व. बसंत कृष्ण वैद्य थे। बेहतरीन कैलीग्राफी के जरिए इटैलिक अक्षरों में लिखे गए संविधान के हर पृष्ठ को नंदलाल बोस एवं ब्योहर राम मनोहर सिन्हा के नेतृत्व में शांतिनिकेतन के चित्रकारों ने सजाया था। संविधान में कुल 28 चित्रों का उपयोग किया गया था जो सनातन संस्कृति से लेकर वर्तमान तक भारत के मूल भाव को प्रदर्शित करते थे।
संविधान की दोनों भाषाओं; हिंदी और अंग्रेजी की हस्तलिखित मूल प्रतियाँ भारतीय संसद के पुस्तकालय में संरक्षित रखी गई हैं। संविधान की मूल प्रति 16 इंच चौड़ी है जिसे 22 इंच लम्बे चर्मपत्र की शीटों पर लिखा गया था।
मूल पांडुलिपि में 251 पृष्ठ शामिल थे और इसे तैयार करने में 2 वर्ष, 11 माह और 18 दिन लगे थे। हस्तलिखित संविधान पर 24 जनवरी, 1950 को संविधान सभा के 284 सदस्यों ने हस्ताक्षर किए थे जिसमें 15 महिलायें भी शामिल थीं।
हालांकि यदि आप मूल हस्ताक्षरित प्रति देखें तो इसमें प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के हस्ताक्षर टेढ़े हैं। दरअसल, प्रथम प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू ने राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के पूर्व ही प्रथम हस्ताक्षर कर दिए।
जब यह चूक संविधान निर्माताओं व अन्य अधिकारियों के संज्ञान में आई तो नेहरूजी के हस्ताक्षर के ऊपर नाम मात्र के बचे स्थान पर डॉ. राजेंद्र प्रसाद से हस्ताक्षर करवाये गये। चूँकि स्थान कम था अतः उनके हस्ताक्षर सीधे न होकर टेढ़े हुए। भारत का संविधान 25 भागों, 448 अनुच्छेदों और 12 सूचियों में बंटा है।
सांस्कृतिक चेतना के वाहक हैं चित्र
संविधान के आवरण पृष्ठ पर भारत का राष्ट्रीय चिन्ह - अशोक चिन्ह अंकित है। चिन्ह में अंकित 'सत्यमेव जयते' को बोध वाक्य में रूप में स्वीकृति प्राप्त है। संविधान में अंकित चित्र हर भाग की विषय सूची को सारगर्भित करते हुए उससे साम्य बिठाते नजर आते हैं। चित्रकारों की बौद्धिकता एवं तार्किकता ने किसी भी चित्र को विषय से भटकने नहीं दिया है।
'भारत का संविधान: भाव एवं रेखांकन' पुस्तक के लेखक लक्ष्मीनारायण भाला ने बताया कि संविधान के भाग 1 के अनुच्छेद 1-4 में मोहनजोदड़ों का प्रतीक चिन्ह बना है जो संघ और उसके राज्य क्षेत्र की कल्पना को साकार करता है।
भाग 2 के अनुच्छेद 5-11 में वैदिक काल के गुरुकुल का चित्र अंकित है जो नागरिकता को लक्षित करता है। भाग 3 के अनुच्छेद 12-35 में पुष्पक विमान से श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मणजी का अयोध्या गमन दिखाया गया है जिसे मौलिक अधिकारों से जोड़ा जा सकता है।
भाग 4 के अनुच्छेद 36-51 में श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को गीता का उपदेश का चित्र बनाया गया है जिसे राज्य नीति के निदेशक तत्त्व के रूप में माना जा सकता है। भाग 5 के अनुच्छेद 52-151 में सिद्धार्थ के वैराग्य से गौतम बुद्ध के देशाटन तक का चित्र है जो शांत-एकाग्र मन, गहन चिंतन तथा सर्वोच्च समझ के साथ समाज के प्रति संवेदना व समरस भाव को जगाता है।
भाग 6 के अनुच्छेद 152-237 में महावीर जैन द्वारा जैन मत का प्रचार अंकित है जिसका विषय राज्य है। भाग 7 के अनुच्छेद 238 में मौर्यकाल की निर्भयता एवं सम्पन्नता को दर्शित किया गया है जिसका विषय राज्य रचना है। भाग 8 के अनुच्छेद 239-242 में सम्पन्नता के लिए कुबेर की छलांग का चित्र बनाया गया है जिसका विषय है संघ राज्य क्षेत्रों का प्रशासन।
भाग 9 के अनुच्छेद 243-243ZG में राजा विक्रमादित्य का दरबार बना है जिसका विषय है पंचायत एवं नगरपालिकाएं। भाग 10 के अनुच्छेद 244-244A में नालंदा विश्वविद्यालय का चित्र है जिसका विषय है अनुसूचित एवं जनजाति क्षेत्र।
इसी प्रकार भाग 11 के अनुच्छेद 245-263 में अश्वमेध यज्ञ, भाग 12 के अनुच्छेद 264-300A में नटराज तथा स्वास्तिक, भाग 13 के अनुच्छेद 301-307 में भागीरथी प्रयास से गंगावतरण, भाग 14 के अनुच्छेद 308-323B में अकबर का दरबार, भाग 15 के अनुच्छेद 324-329A में छत्रपति शिवाजी तथा गुरू गोविन्द सिंह, भाग 16 के अनुच्छेद 330-342A में रानी लक्ष्मीबाई तथा टीपू सुल्तान, भाग 17 के अनुच्छेद 343-351 में लाठी लेकर चलते गाँधीजी, भाग 18 के अनुच्छेद 352-360 में गाँधीजी की दांडी-यात्रा, भाग 19 के अनुच्छेद 361-367 में नेताजी सुभाष तथा आजाद हिन्द सेना, भाग 20 के अनुच्छेद 368 में खुला आकाश तथा हिमालय, भाग 21 के अनुच्छेद 369-392 में मरुस्थल तथा ऊँट की सवारी तथा भाग 22 के अनुच्छेद 393-395 में समुद्र तथा नौकायन के चित्र बनाये गए हैं जो इन भागों की विषय सूची को पूर्णता प्रदान करते हैं।
संविधान की मूल प्रति में प्रदर्शित ये सभी चित्र भारत की न केवल एकता और अखंडता के परिचायक हैं बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना के वाहक भी हैं।
यह भी पढ़ें: Paintings in Indian Constitution: कौन थे नंदलाल बोस, जिन्होंने संविधान में उकेरी भारतीय सांस्कृतिक विरासत
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)
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