Modi in Gujarat Election: गुजरात चुनाव में ब्रांड मोदी का बढ़ता महत्त्व

Modi in Gujarat Election: नरेन्द्र मोदी ने 2014 में गुजरात छोड़ दिया था। देशभर में सघन प्रचार अभियान के बाद वो पूर्ण बहुमत के साथ प्रधानमंंत्री बन गये। लेकिन क्या कारण है कि 2022 का गुजरात विधानसभा चुनाव भी मोदी के नाम पर ही लड़ा जा रहा है और स्वयं मोदी 20 नवंबर से गुजरात में रैलियों की झड़ी लगाने जा रहे हैं।

importance of Brand Modi in Gujarat Election 2022

2014 के लोकसभा चुनावों में 'घर घर मोदी' का जो नारा गूंजा था, वह अलग अलग चुनावों में अलग अलग स्वरूपों में देखने को मिलता रहा है। लेकिन हर स्वरूप में नरेंद्र मोदी ही हर तरफ प्रतिबिंबित होते हैं।

चेहरा भी मोदी, मोहरा भी मोदी, प्रचारक भी मोदी और निर्णायक भी मोदी। चुनाव अभियान में भी मोदी और चुनाव परिणाम के बाद जीत के श्रेय में भी मोदी। कहीं भी चले आइए, हर तरफ मोदी का जलवा देखने को मिल रहा है। गुजरात विधानसभा चुनाव की ताजा तस्वीर भी यही है।

गुजरात विधानसभा के चुनाव में गांव गांव घूमकर वहां राजनीतिक धड़कनों को नाप रही वरिष्ठ पत्रकार प्रीति सोमपुरा कहती है कि "नरेंद्र मोदी दरअसल बहुत बड़े नेता हैं और वे केवल अपनी उपस्थिति से ही इतनी बड़ी लकीर खींच देते हैं कि किसी और के लिए उनकी बराबरी करना बेहद मुश्किल हो जाता है।"

सोमपुरा का कहना है कि "मोदी के विशाल राजनीतिक आभामंडल ने उनको हर तरह से इतना सक्षम बना दिया है कि देश भर में वे बीजेपी के लिए जीत का रास्ता आसान करने की उम्मीद बन गए हैं। इसीलिए, गुजरात में भी हर तरफ मोदी ही मोदी है।"

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    प्रीति की बात में वजन है, क्योंकि पिछली बार 2017 के मुश्किल चुनाव में भी मोदी केवल अपनी उपस्थिति, प्रचार तथा स्थानीय जुड़ाव को भुनाकर 13 ऐसी सीटों पर बीजेपी को जिता कर लाए थे, जहां जीत की संभावना बेहद कम थी।

    उत्तर गुजरात में अपेक्षाकृत कमजोर बीजेपी की पकड़ को मजबूत करने में चुपचाप भूमिका निभाने वाले डॉ. जितेंद्र नागर कहते हैं कि "न केवल गुजरात बल्कि भारत सहित पूरी दुनिया में मोदी अब एक ब्रांड है, जिस पर हर जाति, वर्ग के लोग भरोसा करते हैं। फिर गुजरात तो उनका अपना घर है।" संघ परिवार से जुड़े डॉ. नागर कहते हैं कि सही मायने में देखा जाए तो मोदी भरोसे का दूसरा नाम है। लोग उन पर विश्वास करते हैं, इसी कारण इस बार भी चुनाव में वे ही मुख्य चेहरा है।"

    अहमदाबाद के पत्रकार भूपेंद्र सिंह हर तरफ मोदी ही मोदी की तस्दीक करते हुए कहते हैं कि "गुजरात की बहुसंख्यक जनता के लिए मोदी सदा ही बहुत बड़े गौरव रहे हैं, सो उनके बिना सफलता की कल्पना आसान नहीं है।" भूपेंद्र सिंह की राय में, किसी भी काम की सफलता को बहुत उंचाई तक पहुंचाने में नरेंद्र मोदी कोई कसर नहीं छोड़ते। इसी कारण देश के हर चुनाव में बीजेपी के हर निर्णय पर उनकी छाप तथा हर परिणाम में उनका अक्स ही दिखता है, फिर गुजरात के लिए यह नई बात नहीं है।

    मोदी की इस अहमियत को राजनीतिक विश्लेषक संदीप सोनवलकर अलग नजरिये से देखते हैं। उनका कहना है कि निश्चित तौर पर हर मामले के केंद्र में मोदी के होने से तात्कालिक लाभ बीजेपी को भले ही बहुत हैं, परंतु किसी एक व्यक्ति का ही पूरी पार्टी पर लंबे समय तक छाए रहना खतरनाक भी हो सकता है, जैसा कि गांधी परिवार की वजह से कांग्रेस की हालत के रूप में देखने में आ रहा है।

    सोनवलकर के मत को विस्तार देते हुए वरिष्ठ राजनीतिक पत्रकार अभिमन्यु शितोले कहते है कि भले ही माहौल मोदीमय हो और उसका फायदा भी हो, लेकिन इससे प्रधानमंत्री जैसे महत्वपूर्ण पद पर बैठे मोदी पर अनावश्यक भार भी बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। शितोले कहते हैं कि प्रकृति भी अपने स्रोतों के अतिदोहन का आज्ञा नहीं देती। उस नजरिये से भी अतिप्रचार और अकेले ही धुरी बने रहने का हाल बीजेपी और मोदी दोनों के लिए ठीक नहीं है।

    समाजशास्त्र की समझ रखने वाले अहमदाबाद के चार्टर्ड अकाउंटेंट अश्विन नागर का कहना है कि नरेंद्र मोदी एक क्षमतावान नेता हैं, तथा ऐसे लोग संसार में कम ही होते हैं, सो बीजेपी ही नहीं देश को उन पर भरोसा है। इसलिए भार, प्रभार और अतिभार का संसार मोदी के साथ चलने दीजिए, कोई फर्क नहीं पड़ता।

    लंबे समय से मोदी न केवल गुजरात, बल्कि देश भर के मतदाताओं के दिलों पर राज कर रहे हैं, और बीजेपी के लिए उनका सबसे बड़ा योगदान यह है कि उन्होंने आर्थिक और संगठनात्मक रूप से पार्टी को बेहद मजबूती दी है।

    मोदी के नेतृत्व में संघ परिवार ने गुजरात को हिंदुत्व और राष्ट्रवाद की एक मजबूत ताकत के रूप में राजनीतिक प्रयोगशाला के रूप में खड़ा किया। जिसका तथ्य यह है कि कभी कांग्रेस जिस प्रदेश में मुसलमानों को जीत का आधार मानकर चुनाव की रणनीति बनाती थी, उसी गुजरात में बीजेपी एक भी मुसलमान को उम्मीदवारी न देकर भी हिंदुत्व के संदेश के साथ जीत का परचम लहराती है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने अपने राजनीतिक कौशल से मतदाताओं का समर्थन जीतते हुए हर चुनाव में कांग्रेस को करारी मात दी है, जिसमें गुजरात की जनता से उनको भरपूर समर्थन भी मिला है। इस चुनाव में भी मोदी पहले से ही 30 जिलों का दौरा कर चुके थे, दौरे अब भी लगातार जारी है, तथा अभी तो और भी बढ़ेंगे, इसका ऐलान हो चुका है।

    अबकी बार चुनावी तस्वीर में नरेंद्र मोदी गुजरात की जनता से सीधे जुड़ते हुए हर जगह कह रहे हैं, यह गुजरात मैंने बनाया, आपके लिए। हालांकि, इस चुनाव में कांग्रेस बेहद कमजोर है और आम आदमी पार्टी अभी अपनी नई पहुंच बना रही है। लेकिन बीजेपी के लिए गुजरात नया नहीं है।

    27 साल से बीजेपी सरकार में है और इस लंबी अवधि में सबसे ज्यादा 13 साल तक लगातार मुख्यमंत्री के तौर पर नरेंद्र मोदी के हाथ ही गुजरात की कमान रही है। बाद के आठ सालों में गुजरात में तीन मुख्यमंत्री रहे, पहले आनंदीबेन पटेल, फिर विजय रूपानी और अब भूपेद्र पटेल। लेकिन इन तीनों में से गुजरात का चेहरा कोई नहीं बन सका। इसीलिए, गुजरात में सिर्फ मोदी है, नरेंद्र मोदी।

    कुछ लोगों को भले ही लगता हो कि मोदी गुजरात में बीजेपी की मजबूरी हैं, लेकिन जानकारों की बातों पर गौर करें और गहरे से समझें, तो मोदी अब देश भर में बीजेपी के लिए जरूरी हो गये हैं। इसमें मोदी का गृहराज्य गुजरात तो सबसे ऊपर है ही।

    यह भी पढ़ें: Gujarat Elections 2022: अब गुजरात में किसी पार्टी का वोट बैंक नहीं रहा मुस्लिम मतदाता

    (इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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