इंडिया गेट से: कर्नाटक में बढ़ती जिहादी गतिविधियों के बाद योगी मॉडल लागू करने की मांग तेज
कर्नाटक में भाजपा सरकार होने के बावजूद जिस तरह भाजपा के कार्यकर्ता प्रवीन नेत्तार की हत्या की गई, उससे कर्नाटक के भाजपा और आरएसएस कार्यकर्ताओं में भारी रोष है।
भाजपा नेताओं को डर सताने लगा है कि अगर तुरंत कोई बड़ा कदम नहीं उठाया, तो हिन्दू वोट बैंक उससे खफा हो जाएगा। उतर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जिहादी गतिविधियों को रोकने का एक मॉडल पेश किया है, जिसमें अपराधियों व दंगाईयों की संपत्ति को कुर्क करना और बुलडोजर का इस्तेमाल करना शामिल है।

योगी आदित्यनाथ के ऐसे सख्त कदमों से ही सपा सरकार के दौर में आतंक मचाने वाले एक ख़ास समुदाय की गुंडागर्दी पर रोक लग सकी। सपा सरकार के समय हिन्दू लड़कियों का जीना हराम हो गया था, शहरों में मां बाप को उन्हें स्कूल छोड़ने और छुट्टी के बाद खुद लाना पड़ता था। गुंडों के होंसले इतने बढ़ गए थे कि छेड़छाड़ और अपहरण की घटनाएं तो मां बाप के सामने ही होने लगी थीं। हिन्दू लड़कियों के अपहरण और बलात्कार के अलावा नाम बदल कर लव जेहाद की घटनाएं भी बढ़ रही थी।
नूपुर शर्मा विवाद के बाद उत्तर प्रदेश की मस्जिदों में जुम्मे की नमाज के बाद छुटपुट घटनाएं तो हुई, लेकिन उदयपुर, अमरावती और मेंगलुरु जैसी कोई घटना नहीं हुई, क्योंकि योगी आदित्यनाथ ने तुरंत बुलडोजर चला दिया था। इसलिए जहां जहां साम्प्रदायिक हिंसा बढ़ रही है, वहां वहां योगी मॉडल की चर्चा हो रही है। कर्नाटक में भाजपा सरकार होने के बावजूद जिस तरह भाजपा के कार्यकर्ता प्रवीन नेत्तार की हत्या की गई, उससे कर्नाटक के भाजपा और आरएसएस कार्यकर्ताओं में भारी रोष है।
भाजपा और आरएसएस समर्थक अपनी ही सरकार के खिलाफ खुलकर सडकों पर आ गए हैं। वे सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं, भाजपा सरकार की पुलिस भाजपा कार्यकर्ताओं पर ही लाठी बरसा रही है। संघ भाजपा काडर के गुस्से का अंदाज इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने संघ पृष्ठभूमि के प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नलिन कुमार की कार पर हमला कर दिया। नलिन कुमार आरएसएस के प्रचारक रहे हैं, संघ और भाजपा के कार्यकर्ता प्रचारकों का बहुत सम्मान करते हैं, इसलिए कर्नाटक की घटना भाजपा के लिए खतरे की घंटी है और अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं।
कर्नाटक के रोष से भाजपा और आरएसएस की चिंता बढ़ी है। क्योंकि इन दोनों संगठनों के काडर में कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसव राज बोम्मई के खिलाफ गुस्सा भड़क रहा है, जोकि संघ पृष्ठभूमि के नहीं हैं। बोम्मई सिर्फ 13 साल पहले 2008 में जनता दल यूनाइटेड से भाजपा में शामिल हुए थे। भाजपा आलाकमान ने जब येदियुरप्पा को रिटायर करने का फैसला किया तो संघ पृष्ठभूमि के अनेक बड़े नेता मौजूद होने के बावजूद उन्हें मुख्यमंत्री बनाने का फैसला किया था। इस की दो वजह थी, पहली तो यह कि येदियुरप्पा की लिंगायत जाति का ही मुख्यमंत्री बनाना भाजपा की मजबूरी थी। दूसरा भाजपा का अनुमान था कि बोम्मई को मुख्यमंत्री बनाने से पार्टी का आधार बढ़ेगा और स्पष्ट बहुमत पाने में मदद मिलेगी।
लेकिन अब भाजपा संघ का कट्टर समर्थक हिन्दू ही बोम्मई के खिलाफ सड़कों पर आ गया है। सोशल मीडिया पर भी बोम्मई के खिलाफ गुस्सा भड़क रहा है। भाजपा के वर्कर खुलेआम लिख रहे हैं कि बोम्मई को योगी से सीखना चाहिए कि सरकार कैसे चलाई जाती है। यूपी में मुस्लिम 18 प्रतिशत है, कर्नाटक में सिर्फ 11 प्रतिशत होने के बावजूद सिर उठा रहा है। पहले हिजाब विवाद और अब हिन्दू युवक की कुल्हाड़ी मार कर हत्या।
कर्नाटक की आंच दिल्ली तक पहुंची है और केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने बोम्मई को सख्ती दिखाने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद बोम्मई ने बयान दिया है कि अगर जरूरत पड़ी तो कर्नाटक में योगी मॉडल अपनाया जाएगा। यानि बोम्मई ने मुस्लिम कट्टरपंथियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने का मन बना लिया है । उत्तर प्रदेश की स्थिति के लिए योगी आदित्यनाथ सही मुख्यमंत्री हैं। हालांकि कर्नाटक में स्थिति से निपटने के लिए अलग-अलग तरीक़े हैं और उन सभी का इस्तेमाल हो रहा है। लेकिन अगर ज़रूरत पड़ी तो योगी मॉडल भी कर्नाटक में आ सकता है। कर्नाटक भाजपा शासित पहला राज्य है, जहां इस्लामी कट्टरपंथ सिर उठा रहा है।
कर्नाटक में मुस्लिम कट्टरपंथ की हवा केरल से आ रही है, जहां इस्लामी कम्युनिस्ट गठजोड़ के कारण आतंकवादी संगठन पीएफआई सर्वाधिक मजबूत है। मैंने अपने पहले के एक लेख में भी बताया था कि मेंगलुरु के पास केरल कर्नाटक सीमा पर स्थित कासरगोड सौ फीसदी मुस्लिम आबादी वाली पट्टी बन रही है। मुख्य्मंत्री बोम्माई ने अब इस बात की पुष्टि की है। उन्होंने कहा है कि कर्नाटक में ऐसी गतिविधियां 2014-15 में शुरू हुई थीं और अब तक जारी हैं। कुछ "स्लीपर सेल्स" पहचान कर गिरफ्तार भी किए गए हैं।
कर्नाटक की भाजपा सरकार ने शुरुआत के तौर पर यूपी मॉडल की तर्ज पर एंटी-टेररिस्ट स्क्वाड और आंतरिक सुरक्षा विभाग के अलावा विशेष कमांडो यूनिट बनाने का फैसला किया है। प्रवीण नेट्टारू की हत्या के मामले में ज़ाकिर और शफ़ीक़ नाम के दो युवकों को गिरफ़्तार किया गया है, जिनका पीएफ़आई से संबंध बताया जा रहा है। कर्नाटक सरकार ने पीएफ़आई और एसडीपीआई पर प्रतिबन्ध लगाने की सिफारिश कर दी है। अब केंद्र सरकार को निर्णय करना है।
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)
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