BBC Documentary: बीबीसी ने उठाए भारत की न्यायपालिका पर सवाल
लंबे समय से बीबीसी में भारत विरोधी और हिंदू विरोधी लोगों का बोलबाला है। बीबीसी की भारत विरोधी रिपोर्टों के कारण कई बार भारत-ब्रिटेन संबंधों में कड़वाहट पैदा होने के आसार पैदा हुए हैं।

बीबीसी ने जो कुछ किया है, वह नया नहीं है| पिछले कई वर्षों से बीबीसी की हिन्दी सर्विस भारत से ही नहीं पाकिस्तान से भी भारत के खिलाफ खबरें कर रही है| ताजा घटना एक डॉक्यूमेंट्री की है| बीबीसी ने दो एपिसोड की एक डॉक्यूमेंट्री बनाई है जिसका नाम है - "इंडिया: द मोदी क्वेश्चन|" इसका पहला एपिसोड 17 जनवरी को ब्रिटेन में प्रसारित हो चुका है| अगला एपिसोड 24 जनवरी को प्रसारित होने जा रहा है| पहले एपिसोड में गुजरात दंगों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला किया गया है|
दंगों के दौरान मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे| हालांकि यूपीए के शासनकाल में ही सुप्रीमकोर्ट उन सभी आरोपों से नरेंद्र मोदी को बरी कर चुकी थी, जो उन पर लगाए गए थे| 2014 के लोकसभा चुनावों में 2002 के दंगे ही कांग्रेस का मुख्य चुनाव एजेंडा था| तभी यूपीए की चेयरपर्सन सोनिया गांधी ने नरेंद्र मोदी को मौत का सौदागर कहा था| भारत की न्यायपालिका से लेकर गुजरात और देश की जनता मोदी पर लगे इन आरोपों को आधा दर्जन से ज्यादा बार ठुकरा चुकी है| लेकिन अब 2024 के चुनाव से पहले मुस्लिम वोटों को मोदी के खिलाफ लामबंद करने के लिए एक बार फिर से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अभियान शुरू हो चुका है| बीबीसी की डाक्यूमेंट्री इसी अभियान का हिस्सा है|
बीबीसी की पूर्व रिपोर्टर जिल मैकगिवरिंग ने इस डॉक्यूमेंट्री में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गोधरा काण्ड का बदला लेने वाले कट्टरपंथी हिंदू के रूप में दिखाने की कोशिश है| उन्होंने यह दिखाने की कोशिश की है कि गुजरात के दंगे हिन्दुओं के गुस्से के कारण हुए, जिसे मोदी सरकार ने मौन स्वीकृति दी थी|भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने डाक्यूमेंट्री प्रसारित होने के दो दिन बाद 19 जनवरी को रूटीन प्रेस कांफ्रेंस में पूछे गए सवाल के जवाब में कहा था कि बीबीसी की यह डाक्यूमेंट्री प्रौपेगैंडा पीस है| इसका मक़सद वैसा ही नैरेटिव पेश करना है, जिसे लोग पहले ही ख़ारिज कर चुके हैं| इस फ़िल्म या डॉक्यूमेंट्री को बनाने वाली एजेंसी और व्यक्ति इसी नैरेटिव को दोबारा चलाना चाह रहे हैं|

विदेश मंत्रालय ने इसे भारत के खिलाफ दुष्प्रचार करने की कोशिश करार दिया| इस डॉक्यूमेंट्री में गोधरा में ट्रेन जलाए जाने में मुस्लिम कट्टरपंथियों की भूमिका पर पर्दा डालने की कोशिश की गई है| गोधरा कांड में 59 हिंदू मारे गए थे| डॉक्यूमेंट्री में 9:12 मिनट पर यह दावा किया गया है कि गोधरा में ट्रेन में आग लगने का कारण विवादित था, साफ़ नहीं था कि ट्रेन को आग मुसलमानों ने लगाई, इसके बाद भी इस घटना के लिए मुस्लिमों को दोषी ठहराया गया था|
आग लगाने वाले मुसलमानों को बरी करवाने की ऐसी ही एक कोशिश यूपीए शासनकाल में भी हुई थी, जब उस समय के रेलमंत्री लालू यादव ने आग लगने की जांच के लिए सितंबर 2004 में यूसी बनर्जी आयोग का गठन किया था| इस आयोग ने रिपोर्ट दी थी कि आग दुर्घटनावश लगी थी| आयोग की रिपोर्ट में कहा गया था कि कोच में साधु बीड़ी पी रहे थे और उसी दौरान गलती से आग लग गई| गुजरात हाईकोर्ट ने यू.सी. बनर्जी समिति की न सिर्फ रिपोर्ट को खारिज किया था, बल्कि आयोग के गठन को भी 'अवैध' और 'असंवैधानिक' करार दिया था, क्योंकि नानावती-शाह आयोग पहले ही दंगे से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रहा था|
मार्च 2008 में यूपीए शासनकाल के दौरान ही नानावती आयोग ने गोधरा कांड की जांच रिपोर्ट में कहा था कि यह पूर्व नियोजित षडयंत्र था और एस-6 कोच को भीड़ ने पेट्रोल डालकर जलाया था| आयोग ने फोरेंसिक साईंस लेबोरेट्री की रिपोर्ट का हवाला दिया था| इतना ही नही, अलबत्ता फरवरी, 2011 में यूपीए शासन के दौरान ही निचली अदालत ने 31 मुस्लिम दंगाईयों को गोधरा नरसंहार का दोषी पाया जबकि 63 अन्य को बरी किया| कोर्ट ने 11 लोगों को सजा-ए-मौत और 20 को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी| हालांकि, अक्टूबर 2017 में गुजरात हाई कोर्ट ने सभी को आजीवन कारावास की सजा दे दी थी|
इस केस में गोधरा कांड के प्रत्यक्षदर्शियों और जीवित बचे गवाहों के बयानों के आधार पर कोर्ट में यह साबित हो गया था कि मुस्लिम कट्टरपंथियों ने ट्रेन में आग लगाई थी| इस तरह अब बीबीसी की ओर से यह कहा जाना कि गोधरा में ट्रेन में आग लगने का कारण विवादित था, भारत की न्यायपालिका पर ऊंगली उठाना है| सवाल यह भी है कि क्या भारत और ब्रिटिश सरकार को भी बीबीसी की इस रिपोर्ट पर प्रतिबन्ध नहीं लगाया जाना चाहिए, क्योंकि यह किसी देश की न्यायपालिका पर सवाल उठा रही है|
बीबीसी की यह डॉक्यूमेंट्री गुजरात दंगों को लेकर झूठ फैलाने की कोशिश है| इससे वह देश में बने शांति के माहौल को सांप्रदायिक हिंसा के माहौल में बदलना चाहता है| बीबीसी ने पहले भी कई बार ऐसे प्रयास किए हैं| बीबीसी के एपिसोड में दावा किया गया है कि उसकी डाक्यूमेंट्री ब्रिटिश फ़ॉरेन ऑफ़िस की रिपोर्ट पर आधारित है| ब्रिटिश विदेश विभाग की इस तथाकथित रिपोर्ट का दावा है कि मोदी गुजरात में हिंसा का माहौल बनाने के लिए 'प्रत्यक्ष रूप से ज़िम्मेदार' थे| इससे पहले भारत के सभी विपक्षी दल और लेफ्ट लिबरल मीडिया भी यही नरेटिव गढ़ता रहा है, लेकिन सुप्रीमकोर्ट इन सभी आरोपों को खारिज कर चुकी है|
बीबीसी की भारत विरोधी रिपोर्टों के कारण कई बार भारत-ब्रिटेन संबंधों में कड़वाहट पैदा होने के आसार पैदा हुए हैं| बीबीसी की इस रिपोर्ट का मामला ब्रिटेन की संसद में भी उठाया गया है| दुनिया भर के मुस्लिम किस तरह एजेंडे पर काम करते हैं, इसका एक सबूत यह भी है कि ब्रिटेन के मुस्लिम सांसद इमरान हुसैन ने ये मुद्दा वहां की संसद में उठाया और पूछा कि क्या प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ब्रिटिश कूटनयिकों की इस रिपोर्ट से इत्तेफ़ाक रखते हैं, जिसमें मोदी को गुजरात हिंसा के लिए सीधे तौर पर ज़िम्मेदार ठहराया गया है? और इस मुद्दे पर उनकी क्या राय है? इस प्रश्न के उत्तर में प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने कहा कि सांसद द्वारा किए गए चरित्रीकरण से वे सहमत नहीं हैं|
बीबीसी ने 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले भी मुसलमानों को भड़काने वाली खबरें प्रकाशित की थीं| बीबीसी की वेबसाईट पर 21 अप्रेल 2019 की वह रिपोर्ट आज भी मौजूद है, जिसका शीर्षक है - "क्या भारत के मुसलमान गुजरात दंगे को भूल चुके हैं?" इतना ही नहीं बल्कि अभी जब हाल ही में सुप्रीमकोर्ट की तीन सदस्यीय बेंच ने एसआईटी रिपोर्ट को चुनौती देने वाली जाकिया जाफरी की याचिका को खारिज करके नरेंद्र मोदी और उस समय के प्रशासन को क्लीन चिट दे दी थी, तब भी बीबीसी ने 9 जुलाई 2022 को सुप्रीमकोर्ट के फैसले पर सवाल उठाते हुए एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी, जिसका शीर्षक था-" गुजरात दंगा मामले में सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले पर पूछे जा रहे ये सवाल|" जबकि बेंच ने अपने फैसले में कहा था कि दंगों की प्लानिंग, साज़िश और वरिष्ठ अधिकारियों के शामिल होने का कोई आरोप साबित नहीं हुआ| बीबीसी की डाक्यूमेंट्री इसी थ्योरी पर आधारित है कि मोदी सरकार के उच्च अधिकारियों ने दंगों को हवा दी थी|
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)
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