Ayodhya Dham: जय श्री राम, सज-संवर गया अयोध्या धाम

Ayodhya Dham: राम का वनवास 14 साल का था। 14 साल बाद जब वो वापस लौटे तो अयोध्या ने अपनी आभा को दोबारा पा लिया था। लेकिन रामजन्मभूमि पर मंदिर तोड़कर मस्जिद ए जन्मस्थान क्या खड़ी की गयी, पूरी अयोध्या ने ही मानों वनवास ले लिया। इतिहासकारों के अलग अलग मत हैं। किसने तोड़ा, कब तोड़ा कैसे तोड़ा लेकिन जिस बात पर सब एकमत हैं वह यह कि जन्मस्थान पर जो मंदिर था उसे तोड़कर वहां मस्जिद बनाई गयी। रामलला अपने ही जन्मस्थान से विस्थापित होकर अज्ञात स्थान पर चले गये।

कुछ कहते हैं कि महाराष्ट्र के किसी मंदिर में रामलला को विराजमान कर दिया गया तो कुछ कोई और कहानी बताते हैं। जब अयोध्या में रामलला ही नहीं विराजे तो अयोध्यावासी क्या तो उत्सव मनाते और रामभक्त किसे देखने अयोध्या जाते? रामलला का यह अज्ञातवास कितना पुराना है, इसका इतिहास विवादित हो सकता है लेकिन 1949 में रामलला अपने जन्मस्थान पर दोबारा प्रकट हुए यह सरकारी रिकार्ड में दर्ज है।

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वह भी दिसंबर का ही महीना था जब गोरखनाथ मठ के महंत दिग्विजय नाथ की अगुवाई में अयोध्या के साधु संतों ने सरयूस्नान करके मस्जिद ए जन्मस्थान के भीतर रामलला के दर्शन किये। 28 दिसंबर 1949 की रात रामलला अपने जन्मस्थान पर पुन: प्रकट हुए और 29 दिसंबर से मस्जिद ए जन्मस्थान को प्रशासनिक रूप से घेरकर आवाजाही को नियंत्रित कर दिया गया। इस प्रशासनिक नियंत्रण ने अगले 50 साल देश की पूरी राजनीति को अनियंत्रित कर दिया।

इस 'अनियंत्रित राजनीति' ने केवल रामलला के जन्मस्थान को ही विवादित नहीं किया बल्कि पूरी अयोध्या को छावनी में बदल दिया। जैसे जैसे हिन्दू पक्ष की ओर से रामलला के जन्मस्थान की मुक्ति का प्रयास बढ़ा, वैसे वैसे सरकारी मशीनरी को अयोध्या को पुलिस छावनी बनाने का मौका मिलता गया। 6 दिसंबर 1992 को रामलला जन्मस्थान से विवादित मस्जिद का अस्तित्व तो समाप्त हो गया लेकिन उसके बाद भी अयोध्या की उपेक्षा और राजनीतिक तिरस्कार जारी रहा।

यह तब दूर हुआ जब महंत दिग्विजय नाथ के ही तीसरी पीढी के उत्तराधिकारी योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बन गये। वो मुख्यमंत्री बने मार्च 2017 में और उनके एजंडे में सबसे ऊपर मानो अयोध्या धाम ही था। मानों ईश्वरीय विधान के तहत वो इसी काम के लिए चुने गये हों। उस समय तक अपनी ही जन्मभूमि के लिए रामलला का मुकदमा सुप्रीम कोर्ट में लंबित था लेकिन योगी ने अयोध्या का वनवास खत्म करने के लिए फैसला आने का इंतजार नहीं किया। उसी साल 51 हजार दियों को जलाकर सरयू तट पर दीपोत्सव की शुरुआत कर दी गयी।

दियों की यह जगमगाहट अयोध्या जी में सदियों बाद लौटी थी। भक्त विहीन अयोध्या जी के मंदिर दशकों में अपनी चमक खो चुके थे। पहली बार 2017 में दशकों बाद उन मंदिरों के शिखर पर चूने की पुताई हुई जिनकी दशा देखकर भक्तों को रुलाई आती थी। सुरक्षा बलों के बूट से उड़नेवाली धूल से धूसरित अयोध्यावासियों के चेहरों पर मुस्कान लौटी और उन्हें लगा कि अब वो भी उत्सव मना सकते हैं। लेकिन पीड़ा इस बात की थी कि स्वयं रामलला टेन्ट में विराजे और अयोध्यावासी उनके नाम पर खुशियां मनायें तो मन की कसक जाती नहीं।

यह कसक 9 नवंबर 2019 को दूर कर दी सुप्रीम कोर्ट ने। कोर्ट ने संवैधानिक पीठ के तहत सुनवाई करते हुए रामलला विराजमान को उनके जन्मस्थान की 2.77 एकड़ जमीन सौंप दी। रामलला विराजमान मुकदमा जीत गये। उनकी यह जीत पूरे देश के लिए खुशी बनकर आयी लेकिन अयोध्या जी के लिए दोहरी खुशी बन गयी। एक तो रामलला विराजमान को उनके जन्मस्थान मिलने की खुशी और दूसरे उसके अपने वनवास के खत्म होने की प्रसन्नता।

उसके बाद एक ओर रामलला मंदिर का निर्माण शुरु हुआ तो दूसरी ओर अयोध्या के पुनर्विकास का खाका खींचा गया। रामलला मंदिर का निर्माण सरकार को नहीं करना था लेकिन अयोध्या जी को सजाने संवारने का जिम्मा योगी सरकार ने अपने ऊपर ले लिया। शुरुआत हुई नाम को ठीक करने से। फैजाबाद जिले का नाम बदलकर अयोध्या जिला कर दिया गया और फैजाबाद कमिश्नरी भी अयोध्या के नाम से जानी जाने लगी।

इसके बाद तीन हजार करोड़ रूपये की परियोजनाओं का खाका खींचा गया। इसमें कुछ तात्कालिक हैं, तो कुछ दीर्घकालिक। शुरुआत एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन और सड़कों को दुरुस्त करने से हुई। 2018 में तत्कालीन रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा ने अयोध्या स्टेशन को मंदिर की तर्ज पर बनाने का ऐलान किया। इस पर कुछ विवाद भी हुआ लेकिन 30 दिसंबर को जिस अयोध्या धाम रेलवे स्टेशन का उद्घाटन हो रहा है वह मनोज सिन्हा का ही आइडिया है। हालांकि अभी रेलवे से जुड़ा काम पूरा होने में समय लगेगा लेकिन रेलवे मंत्रालय का दावा है कि 241 करोड़ की लागत से हो रहे स्टेशन पुनर्विकास का काम 15 जनवरी तक पूरा कर लिया जाएगा।

लखनऊ अयोध्या रेलरूट का दोहरीकरण हो रहा है इसलिए काफी कुछ काम उसके बाद भी जारी रहेगा लेकिन उम्मीद करनी चाहिए कि वर्ष 2024 के अंत तक जब तक राममंदिर अपने पूर्ण आकार में आयेगा तब तक अयोध्या धाम स्टेशन भी स्वागत के लिए संपूर्ण रूप से तैयार हो जाएगा। इसके साथ ही अयोध्या में मर्यादापुरुषोत्तम श्री राम इंटरनेशनल एयरपोर्ट का पहला चरण भी पूरा हो गया। 30 दिसंबर को प्रधानमंत्री मोदी इसका भी लोकार्पण करेंगे। इंडिगो एयरलाइन्स ने दिल्ली, मुंबई और अहमदाबाद से नियमित उड़ानों की घोषणा भी कर दी है। 22 जनवरी को रामलला मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा से पूर्व ये तीनों नियमित उड़ाने शुरु हो जाएंगी।

इसी तरह केन्द्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय अयोध्या के आसपास के जिलों को फोर लेन सड़कों से जोड़ रहा है। लखनऊ से अयोध्या पहले ही फोर लेन सड़क से जुड़ा हुआ है, अब वाराणसी और प्रयागराज से अयोध्या को जोड़नेवाली सड़कों को फोर लेन किया जा रहा है। कुछ काम पहले ही जमीन पर हो रहे हैं, कुछ के लिए टेन्डर आदि की प्रक्रिया चल रही है। इसके पीछे मंत्रालय का उद्देश्य है कि काशी प्रयाग और अयोध्या का एक तीर्थ सर्किट विकसित हो ताकि अगर कोई भक्त आये तो सुगमता से तीनों तीर्थस्थलों पर दर्शन भ्रमण कर पाये। इसी बात को ध्यान में रखते हुए रेलवे मंत्रालय ने अयोध्या से नई दिल्ली के बीच वन्दे भारत ट्रेन चलाने का ऐलान भी किया है।

लेकिन इन आधारभूत ढांचागत सुविधाओं के अतिरिक्त उत्तर प्रदेश की योगी सरकार अयोध्या जी को भव्य स्वरूप दे रही है ताकि अब कोई आये तो अयोध्या की भव्यता से अभिभूत हो जाए। इसके लिए शहर के भीतर की प्रमुख सड़कों को एक कॉरीडोर की तरह सजाया संवारा जा रहा है। अयोध्या के पुनर्विकास के लिए उन्हीं विशाल सिंह को नोडल अधिकारी बनाकर लाया गया है जो काशी विश्वनाथ कॉरीडोर का काम कर चुके हैं। धर्मपथ, भक्तिपथ, राम पथ और जन्मभूमि पथ की सड़क को ही नहीं बनाया गया है बल्कि उसके फुटपाथ और दुकानों को इस तरह से सजाया गया है कि यहां पहुंचते ही मन राममय हो जाए।

अयोध्या धाम को 15 जनवरी से पहले सजाने संवारने का काम पूरा करने के लिए दिन रात काम हो रहा है। यह काम 22 जनवरी को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद भी जारी रहेगा लेकिन अयोध्या धाम के विकास के पहले चरण का काम उससे पहले हर हाल में पूरा कर लिया जाएगा ताकि कोई रामभक्त आये तो रामजी के दर्शन की ही नहीं अयोध्या धाम की भी दिव्य अनुभूति साथ लेकर जाए।

(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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