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Rajiv Gandhi Foundation: चीन से चंदा, देश से धोखा

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सदन में राजीव गांधी फाउंडेशन का मुद्दा उठाया। उनके इस बयान के बाद कि उसने चीन से चंदा लिया है, यह फाउंडेशन एक बार फिर चर्चा में है।

amit shah statement on Rajiv Gandhi Foundation took grants from China

Rajiv Gandhi Foundation: उधर तवांग में चीन के सैनिकों की भारतीय सैनिकों से झड़प हुई तो इधर संसद में भाजपा और कांग्रेस भिड़ गये। केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कांग्रेस पर चीन की पक्षधरता का आरोप लगाते हुए कहा कि "2005-06 में राजीव गांधी फाउंडेशन को चीन से 1.35 करोड़ मिले थे। दोहरा रवैया जनता के सामने नहीं चलता है।'' गृह मंत्री अमित शाह के इस बयान के बाद कांग्रेसी नेताओं की तल्ख टिप्पणियां आने लगीं लेकिन तथ्य को बदला नहीं सकता।

सोनिया गांधी द्वारा नियंत्रित राजीव गांधी फाउण्डेशन में चंदा देने वालों के जैसे नाम सामने आते रहे हैं उससे कांग्रेस की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़ा होता है। 2005 से 2007 के बीच राजीव गांधी फाउंडेशन को चीन से चंदे के रूप में मिले 1 करोड़ 35 लाख रुपए राजीव गांधी फांउडेशन की अपनी वार्षिक रिपोर्ट से ही सामने आई है।

ऐसे समय में जब कांग्रेस को इस पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए तब वो पीएम केयर फंड पर सवाल उठाकर इस मुद्दे से ध्यान भटकाना चाहते हैं। संसद में गृह मंत्री के बयान के बाद कांग्रेस के अधीर रंजन चौधरी, रणदीप सिंह सुरजेवाला जैसे वरिष्ठ नेता अपनी ताकत पीएम केयर फंड पर सवाल पूछने में लगा रहे हैं। जबकि इस बात को कांग्रेस खूब अच्छे से जानती है कि देश में जब भी किसी नए प्रधानमंत्री का शपथ ग्रहण होगा, पीएम केयर फंड पर मालिकाना हक बदल जाएगा। राजीव गांधी फाउण्डेशन की तरह पीएम केयर फंड पर किसी व्य7क्ति, परिवार या पार्टी का मालिकाना हक नहीं है।

कांग्रेस ने तो यूपीए सरकार के दिनों में प्रधानमंत्री राहत कोष का पैसा भी राजीव गांधी फाउंडेशन में डायवर्ट कर दिया था। अब वे डायवर्ट करने की वजह पर बात भी नहीं कर रहे। फाउंडेशन की 2005-06 और 2007-08 की वार्षिक रिपोर्ट से यह बात सामने आई है कि प्रधानमंत्री राहत कोष का पैसा राजीव गांधी फाउंडेशन में भेजा गया। सवाल है कि कांग्रेस को प्रधानमंत्री राहत कोष के पैसे से ऐसा कौन सा काम करना था जो राहत कोष से नहीं किया जा सकता था? उल्लेखनीय है कि सोनिया गांधी राजीव गांधी फाउंडेशन की अध्यक्ष थी और प्रधानमंत्री राहत के कोष के बोर्ड में भी थी।

जहां तक राजीव गांधी फाउंडेशन की बात है तो उसमें नियमों के उल्लंघन को लेकर ईडी के विशेष निदेशक की देखरेख में जांच हुई है। सवालों के संतोषजनक जवाब जांच एजंसियों को नहीं मिले होंगे क्योंकि जांच के आधार पर अक्टूबर 2022 में राजीव गांधी फाउंडेशन का एफसीआरए लाइसेंस रद्द कर दिया गया है।

देश के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के सपनों को साकार करने की नीयत से 21 जून 1991 को सोनिया गांधी ने राजीव गांधी फाउंडेशन प्रारंभ किया था। इसका मुख्यालय लुटियंस जोन की प्राइम लोकेशन पर बने जवाहर भवन में है। यह भवन कांग्रेस मुख्यालय के तौर पर बनवाया गया था लेकिन अब यह राजीव गांधी फाउण्डेशन की गतिविधियों का केन्द्र है। फाउंडेशन को शिक्षा, विज्ञान, सूचना एवं प्रौद्योगिकी के प्रसार, शोषित-पीड़ित और दिव्यांगों के सशक्तिकरण के लिए काम करना था। फाउंडेशन की सारी गतिविधियां चंदा आधारित हैं। सोनिया गांधी की अध्यक्षता वाले इस फाउण्डेशन में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के अलावा राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और पी. चिदंबरम ट्रस्टी के रूप में संस्था से जुड़े हैं।

चूंकि राजीव गांधी फाउंडेशन का संबंध देश के सबसे शक्तिशाली नेहरू गांधी परिवार से था, इसलिए कांग्रेस सरकार के दैरान कभी वहां किसी प्रकार की जांच नहीं हुई। वहां होने वाले लेन-देन पर किसी केन्द्रीय जांच एजेन्सी ने सवाल उठाने की हिम्मत नहीं की। वहां जो कुछ हो रहा था, उसे चलने दिया गया। यहां सवाल उठता है कि क्या किसी संस्था को सिर्फ इसलिए हर तरह की जांच से छूट दिया जाना उचित है क्योंकि वह देश के एक प्रमुख परिवार से जुड़ी हुई संस्था है?

यह बात भी ईडी की जांच में सामने आई है कि जाकिर नाईक और राजीव गांधी फाउंडेशन के बीच पचास लाख रुपए का लेन देन हुआ है। जाकिर नाईक के इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन ने 8 जुलाई 2011 को 50 लाख रुपये राजीव गांधी फाउंडेशन को चंदे के रूप में दिया था। जिस खाते से इस चंदे की रकम का आदान प्रदान हुआ है, उसे बाद में पीएमएलए (Prevention of Money Laundering Act, 2002 ) के तहत जब्त कर लिया गया है। यहां सवाल उठता है कि जाकिर नाईक जैसा कट्टरपंथी भगोड़ा आखिर कांग्रेस को किस तरह की मदद के एवज में पचास लाख रुपए दे रहा था?

बात सिर्फ जाकिर नाईक तक जाकर नहीं ठहरती। राजीव गांधी के नाम पर चल रहे फाउंडेशन में बहुत कुछ था, जिस पर लगातार पर्दा डालने की कोशिश की गई। आज कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को भी अपने फाउंडेशन का पूरा सच नहीं पता।

राजीव गांधी फाउंडेशन को बैंक घोटाले के आरोपी मेहुल चोकसी की कंपनी से भी चंदा मिला है। उसके नाम पर गीतांजलि समूह है, जिसके अंतर्गत मैसर्स नवीराज एस्टेट्स कंपनी काम करती है। इस कंपनी ने राजीव गांधी फाउंडेशन को चेक के माध्यम से 10 लाख रुपये का चंदा दिया था। मेहुल चोकसी के राजीव गांधी फाउंडेशन से संबंध और पंजाब नेशनल बैंक धोखाधड़ी मामले में उसका मुख्य आरोपी होना, क्या फाउंडेशन को सवालों के घेरे में खड़ा नहीं करता? इस संबंध पर कांग्रेस क्यों नहीं कुछ बोल रही क्योंकि सवाल तो उठता है कि बड़े-बड़े घोटालेबाजों से फाउंडेशन को जो आर्थिक मदद मिल रही थी। उस मिलने वाले पैसे को महज संयोग से मिल रहा धन मान लिया जाए या कि इसके पीछे कांग्रेस की कोई सोची-समझी योजना थी?

'राजीव गांधी फाउंडेशन को यस बैंक से भी 9.45 लाख रुपये मिले। यह राणा कपूर का पैसा नहीं था लेकिन पैसा यस बैंक से राजीव गांधी फाउंडेशन को डायवर्ट किया गया। इतना सारा पैसा फाउंडेशन में कौन सी ताकतें डलवा रही थीं और इस पैसे के बदले घोटालेबाजों को कांग्रेस सुप्रीमो से क्या मदद मिलनी थी, यह बात जांच से ही सामने आ सकती है।

राजीव गांधी फाउंडेशन को मदद करने वालों की सूची में एक नाम जिग्नेश शाह का भी सामने आया है। जिग्नेश शाह एनएसईएल ( National Spot Exchange Limited ) घोटाले के लिए कुख्यात है। एनएसईएल के खिलाफ पीएमएलए (Prevention of Money Laundering Act, 2002 ) का मामला चल रहा है। एफटीआईएल (Financial Technologies India Ltd) ने राजीव गांधी फाउंडेशन को 27 अक्टूबर 2011 को 50 लाख रुपये दान किए थे। जिग्नेश शाह और एफटीआईएल ने देश को 5,600 करोड़ रुपये का चुना लगाया है। राजीव गांधी फाउंडेशन और जिग्नेश शाह के रिश्ते को देखकर सवाल तो उठ ही रहा है कि क्या उस बड़ी रकम का एक हिस्सा फाउंडेशन को भी गया है?

जिस तरह केन्द्रीय गृह मंत्री के बयान के बाद कांग्रेस की प्रतिक्रिया सामने आई है, उसके बाद लगता है कि यह विवाद यहां थमने वाला नहीं है। वैसे कांग्रेस के नेताओं को राजनीतिक बयानबाजी के साथ साथ उन सवालों के जवाब भी देने चाहिए, जो फाउंडेशन और उसकी अध्यक्ष सोनिया गांधी पर उठ रहे हैं।

यह भी पढ़ें: India-China clash in Tawang: शी जिनपिंग से सावधान रहने की जरूरत

(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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