Opposition Unity: कहीं आप तो कहीं तृणमूल ने काटे कांग्रेस के वोट, फिर कैसे होगा मेल?

एक तरफ विपक्ष की एकता की बातें चल रही हैं, वहीं कांग्रेस एवं अन्य कुछ दलों को लगने लगा है कि आम आदमी पार्टी और तृणमूल कांग्रेस के हर राज्य में चुनाव लडने से विपक्ष को ही नुकसान हो रहा है।

AAP TMC and congress votes politics on the name of Opposition Unity

Opposition Unity: आम आदमी पार्टी गोवा और गुजरात में कांग्रेस के लिए वोट कटुआ पार्टी बनी थी, तो पूर्वोतर के तीनों राज्यों त्रिपुरा, मेघालय और नगालैंड में तृणमूल कांग्रेस वोट कटुआ पार्टी बनी| राहुल गांधी ने यह आशंका मेघालय में चुनावों के दौरान ही एक रैली में व्यक्त कर दी थी| चुनाव नतीजों में यह बात साबित भी हो गई, जब मेघालय में कांग्रेस 21 सीटों से घट कर 5 पर आ गई, लेकिन पहली बार चुनाव मैदान में कूदी तृणमूल कांग्रेस भी सिर्फ 5 सीटें ही ले सकी| हालांकि इससे भाजपा को कोई ज्यादा फायदा नहीं हुआ, क्योंकि उसे सिर्फ 2 ही सीटें मिलीं, लेकिन एनपीपी की सीटें 20 से बढ़कर 26 हो गई और भाजपा के साथ मिल कर उसकी दुबारा सरकार बन रही है|

AAP TMC and congress votes politics on the name of Opposition Unity

चुनाव कई बार तिकड़म से जीते जाते हैं, जैसे नॉर्थ ईस्ट के तीन राज्यों में भाजपा को फायदे से ज्यादा नुकसान हुआ है, लेकिन त्रिपुरा में उसकी दुबारा सरकार बन गई और मेघालय, नगालैंड में अपने पुराने पार्टनरों के साथ वह दुबारा सत्ता में आ गई| इसमें तृणमूल कांग्रेस की बहुत बड़ी भूमिका है| अगर हम बारीकी से विश्लेषण करेंगे, तो पाएंगे कि त्रिपुरा में भाजपा की सीटें भी घटी और वोट प्रतिशत भी 43.4 से घटकर 38.97 हो गया| मेघालय में भी उसका वोट प्रतिशत 9.7 प्रतिशत से घट कर 9.3 हुआ है, हालांकि सीटें पिछली बार की तरह दो आ गई| नगालैंड में जरुर वोट प्रतिशत 15.4 से 18.8 हुआ, लेकिन सीटें पिछली बार की तरह 12 ही आई|

नगालैंड में भाजपा ने अपने पार्टनर एनडीपीपी के साथ मिलकर ही चुनाव लड़ा था| तृणमूल कांग्रेस के वहां चुनाव लड़ने से एनपीएफ को भारी नुकसान हुआ, वह 22 सीटों से दो सीटों पर आ गई, लेकिन भाजपा की सहयोगी एनडीपीपी की सीटें 18 से बढ़कर 25 हो गई| इस तरह पिछली बार जो सरकार 30 सीटों के साथ तेल की धार पर बनी थी, इस बार स्पष्ट बहुमत के साथ बन रही है|

त्रिपुरा में भाजपा के दुबारा सत्ता में आने से मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी को बहुत बड़ा झटका लगा है, क्योंकि भाजपा को सत्ता से बाहर करने के लिए उसने न सिर्फ कांग्रेस से हाथ मिलाया था, बल्कि टिपरा मोथा से अंदरूनी समझौता भी किया था कि अगर त्रिशंकु विधानसभा आती है तो मिल कर सरकार बनाएंगे| लेकिन ऐसा संभव नहीं हो सका, तो अब माकपा खंभा नोचते हुए कह रही है कि तृणमूल कांग्रेस ने विपक्षी वोटों का विभाजन करके भाजपा को फायदा पहुंचाया| पूर्वोतर के राज्य में दुबारा सरकार बनना भाजपा के लिए बहुत बड़ी बात है। इसलिए इस छोटी सी जीत पर भी मोदी भाजपा मुख्यालय में जश्न मनाने पहुंचे| त्रिपुरा में एक बात और हुई है। वह यह है कि बंगाली वोट उसके साथ जुड़ गए हैं, जिस कारण भाजपा में उत्साह है|

मेघालय में वही हुआ, जिसकी खुद राहुल गांधी ने आशंका जाहिर की थी कि तृणमूल कांग्रेस के चुनाव लड़ने से भाजपा को फायदा होगा| हालांकि विपक्ष की सीटें घटने के बाद भी ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी ने मेघालय में खेल करने की नाकाम कोशिश की| ममता बनर्जी ने उन्हें मेघालय में चुनाव इंचार्ज बना कर भेजा था| हालांकि वह टीएमसी को सिर्फ 5 सीटें ही दिला पाए, लेकिन एनपीपी और भाजपा गठबंधन सरकार बनने से रोकने के लिए उन्होंने अपना पूरा जोर लगा दिया|

उन्होंने पहले कोशिश की कि एनपीपी और टीएमसी की गठबंधन सरकार बन जाए, लेकिन मुख्यमंत्री कोनार्ड संगमा ने टीएमसी के बजाए भाजपा के साथ मिल कर सरकार बनाना ज्यादा बेहतर समझा, क्योंकि केंद्र में भाजपा की सरकार होने से वह ज्यादा फायदा समझ रहे हैं| भाजपा ने तुरंत समर्थन भी दे दिया, लेकिन भाजपा के सिर्फ दो विधायक जीते हैं, एनपीपी और भाजपा के विधायकों की संख्या सिर्फ 28 बनती है, जबकि बहुमत के लिए 30 विधायक चाहिए|

पूर्वोतर में भाजपा की सारी रणनीति असम के मुख्यमंत्री हेमंत बिस्व सरमा के हाथ में है, उन्होंने दो निर्दलियों और एचएस पीडीपी के दो विधायकों का जुगाड़ किया, इस तरह संख्या 32 हो गई, तो कोनार्ड संगमा ने 32 विधायकों के समर्थन की चिठ्ठी के साथ सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया| प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 7 मार्च को कोनार्ड संगमा की शपथ ग्रहण में शामिल होणा तय भी हो गया था|

लेकिन इस बीच अभिषेक बनर्जी और मेघालय में तृणमूल कांग्रेस के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री मुकुल संगमा ने खेल करने की नाकाम कोशिश की, जब उन्होंने 11 सीटें हासिल करने वाली दूसरे नबर की पार्टी यूडीपी के नेता लखमन रिम्बुई से संपर्क साधा और उन्हें मुख्यमंत्री बनवाने के लिए बाकी सभी दलों का समर्थन दिलवाने का लालच दिया| हालांकि कोनार्ड संगमा की पिछली सरकार में यूडीपी भी पार्टनर थी| लखमन रिम्बुई ने तुरंत अपने घर पर सभी छोटे दलों की बैठक बुला ली, जिसमें कोनार्ड संगमा को समर्थन देने वाली पार्टी एचएसपीडीपी के अध्यक्ष और उनके दोनों विधायक भी शामिल थे|

इन दोनों विधायकों को जैसे ही पता चला कि यह मीटिंग कोनार्ड संगमा को मुख्यमंत्री बनने से रोकने के लिए बुलाई गई है, वे दोनों बैठक से उठ कर चले गए| लेकिन इस मीटिंग के तुरंत बाद एचएसपीडीपी के अध्यक्ष और महासचिव ने राज्यपाल और कोनार्ड संगमा को चिठ्ठी लिख कर बताया कि एचएसपीडीपी ने उन्हें समर्थन नहीं दिया है, न ही एचएसपीडीपी ने अपने विधायकों को समर्थन देने के लिए अधिकृत किया था, इसलिए एचएसपीडीपी तुरंत प्रभाव से समर्थन वापस लेती है|

लेकिन इन दो विधायकों के समर्थन वापस लेने की स्थिति में भी कोनार्ड संगमा के पास 30 विधायक बचते हैं, चुनाव क्योंकि 59 सीटों पर हुआ था, इसलिए यह स्पष्ट बहुमत है| इस तरह अभिषेक बनर्जी की भाजपा को मेघालय में सरकार बनाने से रोकने की कोशिश नाकाम हो गई| अगर भाजपा की मदद से कोनार्ड संगमा सरकार नहीं बना पाते, और 11 सीटें जीतने वाली यूडीपी की रहनुमाई में सरकार बनती, तो उसमें कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस भी सरकार में हिस्सेदार होते। ऐसा होता तो कांग्रेस और तृणमूल काग्रेस में समझौते का रास्ता भी खुलता|

लेकिन अब तो कांग्रेस उसे वोट कटुआ पार्टी के तौर पर ही देख रही है| इस तरह राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा हासिल करने वाली आम आदमी पार्टी और तृणमूल कांग्रेस भाजपा के लिए उतना सिरदर्द नहीं है, जितना कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के लिए सिरदर्द बन गई हैं| इसलिए जब मनीष सिसोदिया को शराब घोटाले में गिरफ्तार किया जाता है, तो न चाहते हुए भी फारूख अब्दुल्ला, शरद पवार और अखिलेश यादव उस चिठ्ठी पर दस्तखत करते हैं, जिसमें कहा जाता है कि मनीष सिसोदिया ने कोई भ्रष्टाचार नहीं किया| क्योंकि अब सभी दलों को लगने लगा है कि आम आदमी पार्टी हर राज्य में भाजपा विरोधी वोटों का ही बंटवारा कर रही है।

यह भी पढ़ें: Opposition Unity: विपक्ष के नेताओं को भ्रष्टाचार में फंसाने के खिलाफ मिलकर लड़ने पर मतभेद

(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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