नारदा स्टिंग केस: टीएमसी के मदन मित्रा बोले- ED की चार्जशीट में मेरा नाम ना होता तो मैं बदनाम हो जाता
कोलकाता, 2 सितंबर: नारदा स्टिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की चार्जशीट में टीएमसी के दूसरे नेताओं के साथ अपना नाम आने पर मदन मित्रा ने कहा है कि उनको इसकी पूरी उम्मीद थी। उन्होंने मामले को राजनीति से प्रेरित बताते हुए कहा कि मैं टीएमसी में हूं इसलिए मेरा नाम आया, सुवेंदु अधिकारी भाजपा में हैं तो उनका नाम नहीं है। अगर मेरा नाम ना आता तो जनता मेरे ऊपर भी शक करती। ऐसे में नाम आना अच्छा है।

गुरुवार को उनसे ईडी की चार्जशीट पर सवाल हुआ तो उन्होंने कहा, मैं बहुत खुश हूं कि चार्जशीट में मेरा नाम है। अगर मेरा नाम नहीं होता तो देश और जनता के सामने बदनाम हो जाता कि कुछ गड़बड़ तो नहीं है। जैसे सुवेंदु का नाम नहीं है क्योंकि वो भाजपा में हैं। जो बीजेपी में नहीं है, उनका नाम आएगा और भाजपा वालों का नाम नहीं आएगा। उन्होंने आगे कहा कि चार्जशीट होने के बाद वो इस बात को लेकर भी खुश हैं कि अब बार-बार उनको पूछताछ के लिए नहीं बुलाया जाएगा।
ईडी ने दाखिल की है चार्जशीट
ईडी ने बुधवार को नारदा स्टिंगमामले में अपनी चार्जशीट दाखिल की है। चार्जशीट में तृणमूल कांग्रेस के नेताओं- फिरहाद हकीम, मदन मित्रा, सुब्रत मुखर्जी,आईपीएस अफसर एसएमएच मिर्जा और पूर्व टीएमसी नेता सोवन चटर्जी का नाम शामिल है।
क्या था नारदा स्टिंग केस
नारदा न्यूज पोर्टल ने 2014 में ये स्टिंग ऑपरेशन किया था, जिसे 2016 में चुनाव से ठीक पहले रिलीज किया गया था। इस स्टिंग में मुकुल रॉय, सौगत रॉय, काकोली घोष दस्तीदार, प्रसून बनर्जी, सुवेंदु अधिकारी, अपरूपा पोद्दार, मदन मित्रा, सुब्रत मुखर्जी , फिरहाद हकीम जैसे नेताओं को कथित तौर पर रिश्वत लेते दिखाया गया था। नारदा न्यूज पोर्टल के संस्थापक सैमुअल के मुताबिक उन्होंने इम्पेक्स कंसल्टेंसी सॉल्यूशंस नाम की एक काल्पनिक कंपनी बनाकर इन नेताओं से संपर्क किया तथा उनसे पैसे के बदले में मदद मांगी थी। जो नेता रिश्वत लेने को तैयार हुए, उनका स्टिंग कर लिया गया।












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