भाषा विवाद की आंच से बंगाल में गरमाई सियासत, ममता का केंद्र को दो टूक- बंगाल में भाषाई आतंक नहीं चलेगा
Mamata Banerjee: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार, 28 जुलाई को केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा। एक ओर जहां उन्होंने बंगाल के साथ कथित आर्थिक भेदभाव का मुद्दा उठाया, वहीं दूसरी ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति और धर्म आधारित राजनीति को भी आड़े हाथों लिया।
बोलपुर (बीरभूम) से ममता बनर्जी ने 'भाषा आंदोलन' की शुरुआत करते हुए साफ कहा कि वह "अपनी जान दे देंगी लेकिन अपनी भाषा को कोई छीन नहीं सकता।" ममता का यह बयान ऐसे समय पर आया है जब बंगाल में भाषा और पहचान को लेकर बहस फिर से तेज हो रही है और केंद्र पर 'लिंग्विस्टिक टेरर' यानी 'भाषाई आतंकवाद' फैलाने का आरोप लगाया जा रहा है।

Mamata Banerjee का तंज: "क्या शेखों से गले लगते वक्त धर्म पूछा था?"
प्रधानमंत्री मोदी पर सीधा हमला करते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि जब आप अरब देशों में जाते हैं और शेखों से गले मिलते हैं, तब क्या उनसे पूछते हैं कि वे हिंदू हैं या मुसलमान? उन्होंने यह बयान केंद्र सरकार के उस फैसले के संदर्भ में दिया, जिसमें भारत ने मालदीव को ₹4,850 करोड़ की आर्थिक सहायता (लाइन ऑफ क्रेडिट) देने की घोषणा की है।
"बंगाल को वंचित कर विदेश में मदद बांटी जा रही है": ममता बनर्जी
ममता बनर्जी ने सवाल उठाया कि जब केंद्र बंगाल को उसके हक का पैसा नहीं दे रहा है, तब इतने बड़े पैमाने पर विदेशी सहायता कैसे दी जा रही है। उन्होंने कहा, "आपने मालदीव के राष्ट्रपति से गले मिलते वक्त क्या उसका धर्म पूछा था? 5,000 करोड़ रुपये का दान दिया, लेकिन बंगाल को उसका बकाया नहीं दिया।"
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि वह किसी भाषा या समुदाय के खिलाफ नहीं हैं। ममता बनर्जी ने कहा कि, "क्या मैंने कभी हिंदी भाषियों से कहा कि वे बंगाल छोड़ दें? बिल्कुल नहीं। वे भी मेरे दोस्त हैं। बंगाल में 1.5 करोड़ प्रवासी मज़दूर रहते हैं और 22 लाख बंगाल के लोग अन्य राज्यों में काम करते हैं। हमें एकता में विविधता चाहिए, बंटवारे की राजनीति नहीं।"
NRC और डिटेंशन कैंप के खिलाफ खुला ऐलान
ममता बनर्जी ने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र और चुनाव आयोग बंगाल में एनआरसी (नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स) को चुपके से लागू करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि, "बंगाल में बंगाली भाषी प्रवासियों को निशाना बनाकर NRC को पिछले दरवाज़े से लागू किया जा रहा है। हम इस साजिश को नहीं चलने देंगे। हम किसी भी हालत में बंगाल में डिटेंशन कैंप नहीं बनने देंगे।"
ममता बनर्जी ने साफ किया कि, वो बंगाली अपनी और अस्तित्व को मिटाने की किसी भी कोशिश को नाकाम करेंगे। यह भाषाई आतंक नहीं चलेगा। बंगाल में NRC नहीं लागू होगा, डिटेंशन कैंप नहीं बनेगा।
ममता बनर्जी का भाषण या चुनावी बिगुल?
ममता बनर्जी के इस भाषण को आगामी लोकसभा चुनावों की तैयारी के रूप में भी देखा जा रहा है, जहां वह केंद्र की नीतियों के खिलाफ क्षेत्रीय अस्मिता और अधिकारों की लड़ाई को तेज़ करेंगी। 'भाषा आंदोलन' की शुरुआत इसी दिशा में उठाया गया एक प्रतीकात्मक कदम है, जो बंगाल की जनता की भावनाओं को केंद्र की कथित 'हिंदी थोपने' वाली नीति से जोड़ता है।
ममता बनर्जी ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि वह न सिर्फ बंगाल की भाषा और संस्कृति की रक्षा करेंगी, बल्कि केंद्र की भेदभावपूर्ण नीतियों के खिलाफ सड़क से संसद तक संघर्ष करने को तैयार हैं। उनका यह भाषण न सिर्फ एक चेतावनी है, बल्कि एक चुनावी बिगुल भी।












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