फुटपाथ से लाचार हालत में मिलीं बंगाल की पूर्व सीएम बुद्धदेब भट्टाचार्य की साली, किसने किया ये हाल ? जानिए
कोलकाता, 10 सितंबर: कोलकाता से सटे पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के बरानगर इलाके में डनलप की सड़कों पर एक लाचार बुजुर्ग महिला मिली है। फुटपाथ ही उसका ठिकाना है, वह सड़क किनारे ही सोती है और सड़क पर ही उसे जो खाना मिल जाता है, उसी के सहारे वह जिंदा है। लेकिन, उसकी मौजूदा दुर्दशा से उसका पिछला जीवन पूरी तरह से अलग है। वास्तव में वह प्रदेश के एक हाई प्रोफाइल परिवार से ताल्लुक रखती है। वो पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत बुद्धदेब भट्टाचार्य की पत्नी की बहन हैं। भट्टाचार्य पश्चिम बंगाल में लेफ्ट फ्रंट की 34 साल की सरकार में आखिरी 10 साल तक मुख्यमंत्री रहे थे।

पूर्व सीएम की बुजुर्ग साली फुटपाथ पर मिलीं
बुद्धदेब भट्टाचार्य की साली का नाम डॉक्टर इरा बसु है और उन्होंने वायरोलॉजी में पीएचडी कर रखी है। वह आज भी धारा-प्रवाह अंग्रेजी और बांग्ला बोलती हैं। वह प्रदेश स्तर की एथलीट रह चुकी हैं और टेबल टेनिस और क्रिकेट की भी धुरंधर खिलाड़ी रह चुकी हैं। इरा बसु बुद्धदेब भट्टाचार्य की पत्नी मीरा भट्टाचार्य की बहन हैं, लेकिन उन्हें पिछले 2 साल से फुटपाथ पर ही रहकर गुजारा करना पड़ रहा है। जब उनके मौजूदा हालत की जानकारी सोशल मीडिया पर वायरल हुई तो प्रशासन की ओर से गुरुवार को एंबुलेंस भेजकर बरानगर पुलिस स्टेशन लाया गया। फिर उन्हें मेडिकल चेकअप और इलाज के लिए कोलकाता के एक अस्पताल ले जाया गया।

कौन हैं इरा बसु ?
इरा बसु के दिन पहले ऐसे नहीं थे। वो उत्तर 24 परगना जिले में प्रियनाथ गर्ल्स हाई स्कूल में लाइफ साइंस की टीचर थीं। उन्होंने उस स्कूल को 1976 में ज्वाइन किया था और 28 जून, 2009 को उसी स्कूल से 34 साल नौकरी के बाद रिटायर हुई थीं। ये वह समय था, जब बुद्धदेब बाबू ही बंगाल के मुख्यमंत्री थे और उसके दो साल बाद तक इसी पद पर रहे। उस वक्त इरा बरानगर में ही रहती थीं, लेकिन बाद में खरदाह के लिचु बगान इलाके में शिफ्ट हो गईं। वहां से अचानक वह गायब हो गईं और फिर कोलकाता के नजदीक ही डनलप की सड़कों पर देखी जाने लगीं।

किसने किया इरा बसु का ये हाल ?
लगता है कि आर्थिक तंगी ने उनकी यह हालत बना दी है। इतने हाई प्रोफाइल परिवार से रिश्ते और खुद की इतनी बेहतर बैकग्राउंड के बावजूद वह भिखारी का जीवन जीने को मजबूर हैं। एक टीचर के तौर पर उनके कार्यकाल के बारे में प्रियनाथ स्कूल की हेड मिस्ट्रेस कृष्णाकली चंदा ने कहा है, 'इरा बसु यहीं पढ़ाती थीं। उनकी रिटायरमेंट के बाद हमने कोशिश की कि उन्हें उनका पेंशन मिले और उनसे कहा कि सभी कागजात जमा करें। लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया और इसलिए उन्हें कोई पेंशन नहीं मिलता है।'

अभी भी बुलंद हैं विचार
बुद्धदेब भट्टाचार्य के परिवार से अपने ताल्लुकातों के बारे में वो कहती हैं, 'जब मैंने स्कूल टीचर के रूप में अपना करियर शुरू किया तो मैं उनका कोई फायदा नहीं उठाना चाहती थी। मैंने इसे अपने दम पर किया। मुझे वीआईपी पहचान नहीं चाहिए, हालांकि कई लोग हमारे पारिवारिक संबंधों के बारे में जानते हैं।' पिछले 5 सितंबर यानी शिक्षक दिवस के दिन डनलप के एक संगठन की ओर से उन्हें सम्मानित भी किया गया है और उन्हें माला पहनाकर मिठाई भी खिलाई गई। इस मौके पर उन्होंने कहा था, 'सभी टीचर अभी भी मुझसे प्यार करते हैं और कई स्टूडेंट को मैं याद हूं। कई तो मुझसे गले मिलकर रो पड़ते हैं।' हैरानी की बात है कि जिंदगी में इतने उतार-चढ़ाव के बावजूद इतनी उम्र में भी वह अंदर से बहुत ही मजबूत हैं और उसी तरह से वह अपने विचारों से भी नहीं डिगी हैं। ( इरा बसु की तस्वीरें सौजन्य: यूट्यूब)












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