बंगाल की सियासत में 'प्रभु जगन्नाथ' की एंट्री, दीघा मंदिर उद्घाटन से दीदी ने दिया बीजेपी के हिंदुत्व का जवाब
Digha Jagannath Temple: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया और रोचक मोड़ देखने को मिल रहा है। समंदर किनारे बसे पर्यटन स्थल दिघा में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने जगन्नाथ मंदिर का उद्घाटन किया जिसने राजनीति में एक नया मोड़ ला दिया है।
जगन्नाथ मंदिर का ये उद्धाटन समारोह एक सामान्य कार्यक्रम नहीं है बल्कि एक गहरी राजनीतिक चाल है। जगन्नाथ मंदिर बंगाल के लिए एक क्षेत्रीय धार्मिक पहचान है जिसका इनोग्रेशन सीएम ममता बनर्जी ने किया। ये राज्य की सांस्कृतिक पहचान होने के साथ-साथ राज्य की राजनीति का जटिल ताना-बाना भी है।

उड़ीसा के प्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर की प्रतिकृति के रूप में बना यह मंदिर बंगाल की राजनीतिक जमीन पर एक सांस्कृतिक बयान की तरह उभरता है।
Digha Jagannath Temple: जगन्नाथ बनाम राम की राजनीति
प. बंगाल में हिंदुत्व को आगे रख कर बीजेपी ममता बनर्जी पर ध्रुवीकरण का आरोप लगाती रही है। राज्य में भाजपा ने राम नवमी को लेकर ममता सरकार पर हावी रही और राम मंदिर के जरिये अपने राष्ट्रीय हिंदुत्व एजेंडे को आगे बढ़ाते रही। वहीं जब तृणमूल कांग्रेस ने क्षेत्रीय संस्कृति को महत्तव देते हुए जगन्नाथ का चयन किया तो इसे महज संयोग नहीं है।
यहां समझने वाली बात ये है कि भगवान जगन्नाथ बंगाली और ओडिया दोनों के लिए काफी महत्तव रखते हैं। यह सांस्कृतिक पुल उड़ीया भाषी आबादी के साथ-साथ बंगाली श्रद्धालुओं के मन को भी छूता है।
जगन्नाथ की उत्पत्ति आदिवासी शबर समुदाय से जुड़ी मानी जाती है। इस पंथ में शैव, शाक्त, वैष्णव, जैन और बौद्ध परंपराओं का सुंदर समावेश हुआ है। बंगाल के चैतन्य महाप्रभु ने इस परंपरा को भक्ति आंदोलन के माध्यम से नई ऊँचाई दी। उनका भगवान जगन्नाथ के प्रति समर्पण भाव और कीर्तन पर बल ने इसे आम जनमानस तक पहुँचाया।
Digha Jagannath Temple: एक मंदिर दो निशाना
बीजेपी ने हिंदुत्व को मुद्दा बनाकर ममता बनर्जी को हमेशा हिंदु विरोधी बताती रही है इसका जवाब में टीएमसी ने क्षेत्रीय बहुध्रुवीयता को महत्तव देते हुए नई चाल चली है। टीएमसी ने इस मंदिर निर्माण के जरिये न केवल बंगाल की सांस्कृतिक विरासत को पुनर्स्थापित करने की कोशिश की है, बल्कि भाजपा के हिंदुत्व एजेंडे को एक क्षेत्रीय और समावेशी हिंदू पहचान के जरिये चुनौती भी दी है।
यह वही राजनीति है जो एक ओर धार्मिक भावनाओं को छूती है, लेकिन दूसरी ओर भाजपा के "मुस्लिम तुष्टीकरण" के आरोपों का जवाब भी बनती है। जगन्नाथ मंदिर का उद्घाटन एक धार्मिक अनुष्ठान से कहीं अधिक है । यह एक सांस्कृतिक पहचान के साथ-साथ एक राजनीतिक चाल है। चुनावी मौसम में यह मंदिर तृणमूल कांग्रेस की रणनीति का एक अहम हिस्सा बन गया है - जहाँ भक्ति, संस्कृति और राजनीति की त्रिधारा बह रही है।












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