भवानीपुर से ममता के खिलाफ उम्मीदवार नहीं उतारेगी कांग्रेस! अधीर रंजन बोले- AICC लेगी फैसला
कोलकाता, सितंबर 06। पश्चिम बंगाल की तीन विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव में सबसे अहम सीट भवानीपुर बनने जा रही है, क्योंकि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इस सीट से चुनाव लड़ेंगी। रविवार को इसकी आधिकारिक घोषणा की गई। ममता बनर्जी के खिलाफ एक तरफ तो बीजेपी सबसे स्ट्रॉन्ग कैंडिडेट की तलाश में है तो वहीं कांग्रेस पार्टी ने ममता के खिलाफ उम्मीदवार नहीं उतारने का फैसला लिया है। हालांकि अभी इसकी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से यही दावा किया जा रहा है कि कांग्रेस पार्टी ममता के खिलाफ उम्मीदवार नहीं उतारेगी।

AICC लेगी अंतिम फैसला- अधीर रंजन चौधरी
ममता बनर्जी के खिलाफ कैंडिडेट नहीं उतारने की खबरों पर कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा है कि मेरी राय में कांग्रेस पार्टी को शिष्टाचार दिखाते हुए ममता बनर्जी के खिलाफ कैंडिडेट नहीं उतारना चाहिए, हालांकि ये मेरी निजी राय है, इस पर अंतिम फैसला AICC को ही करना है।
30 सितंबर को होगा मतदान
आपको बता दें कि बंगाल में जिन तीन विधानसभा सीटों के लिए मतदान होना है, उनमें भवानीपुर के अलावा मुर्शिदाबाद जिले की शमसेरगंज और जंगीपुर विधानसभा सीट भी शामिल है। इन सीटों पर 30 सितंबर को मतदान होगा और 3 अक्टूबर को नतीजे घोषित किए जाएंगे। राज्य निर्वाचन आयोग ने शनिवार को पूरा शेड्यूल जारी किया था। इसके बाद रविवार को ममता बनर्जी को भवानीपुर सीट से उम्मीदवार घोषित किया गया।
नंदीग्राम से चुनाव हार गई थीं ममता बनर्जी
आपको बता दें कि भवानीपुर सीट ममता बनर्जी की परंपरागत सीट है और वो इसी सीट से चुनाव लड़ती आई हैं, लेकिन 2021 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने नंदीग्राम से चुनाव लड़ा था, क्योंकि उन्हीं की पार्टी के नेता शुभेंदु अधिकारी ने बीजेपी ज्वॉइन कर ली थी और बीजेपी ने उन्हें नंदीग्राम से उम्मीदवार बनाया था। नंदीग्राम से ममता बनर्जी चुनाव हार गई थी। बीजेपी भी अब यही कोशिश कर रही है कि नंदीग्राम की तरह भवानीपुर से भी किसी मजबूत कैंडिडेट को चुनाव लड़वाया जाए, क्योंकि अगर ममता यहां से चुनाव हार गईं तो उनका सीएम पद पर बना रहना मुश्किल हो जाएगा।
आपको बता दें कि विधानसभा चुनाव के दौरान रुद्रनील घोष भवानीपुर सीट से बीजेपी के उम्मीदवार थे और इस सीट से टीएमसी के शोभनदेव चटोपाध्याय कैंडिडेट थे। रूद्रनील घोष को शोभनदेव के हाथों हार मिली थी।












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