'बचवा काहे देईं जमीन...', दादी ने बताई व्यथा, क्या है काशी द्वार योजना जिसका PM मोदी के चुनाव पर भी पड़ा असर
लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी का प्रदर्शन काफी खराब रहा। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं द्वारा खराब प्रदर्शन को लेकर लगातार मंथन किया जा रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के आसपास की सीटों पर भी भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार चुनाव नहीं जीत पाए। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कांग्रेस प्रत्याशी अजय राय से मात्र डेढ़ लाख वोटों के मामूली अंतर से चुनाव जीते।

वाराणसी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 साल में काशी विश्वनाथ कॉरिडोर, हाईवे, रिंग रोड समेत अनगिनत योजनाओं की सौगात काशीवासियों को दी। इसका लाभ वाराणसी समेत आसपास के जनपदों के लोगों को भी मिल रहा है, फिर भी वोट प्रतिशत कम होना भाजपा के लिए चिंता का विषय बन गया है।
पीएम के वोटों का ग्राफ गिरने और वाराणसी से सटे मछलीशहर, चंदौली, जौनपुर, गाजीपुर लोकसभा सीटों पर भाजपा के हारने के कई कारण हैं। इन्हीं में से एक वजह भूमि अधिग्रहण भी है, जिसके चलते काफी संख्या में किसानों के वोट इंडी गठबंधन की तरफ चले गए।
वाराणसी में गांव की जमीन पर हाईटेक सिटी बसाई जानी है। इसमें कोई शक नहीं कि विकास होगा लेकिन इससे किसानों को भी काफी नुकसान होगा। यही वजह है कि किसान आंदोलन कर रहे हैं। इस कड़ी में हम किसानों की राय जानने के लिए वाराणसी के पिंडरा इलाके में पहुंचे।
इसके पहले की खबर में हमने किसान नेता संतोष पटेल से बात कर किसानों के मूलभूत समस्याओं के बारे में चर्चा किया था। साथ ही किसानों द्वारा किस तरीके से चुनाव में भाजपा का विरोध किया गया इसका भी जिक्र था।
अब लिए इस सीरीज की अगली खबर में हम जानते हैं कि आखिर काशी द्वारा योजना क्या है? योजना का किसानों द्वारा विरोध क्यों किया जा रहा है? इस कड़ी में वन इंडिया टीम काशी द्वारा योजना में जाने वाले गांव के कुछ महिलाओं से बात की।
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कई पीढ़ियां यहां गुजरी हम कैसे इस भूमि को छोड़ें
बसनी (चनौली) गांव की रहने वाली 85 वर्षीय प्रभावती देवी नामक बूढी महिला से वन इंडिया रिपोर्टर प्रवीण कुमार यादव ने बात की। बूढी दादी ने जो कुछ बताया उसे सुनकर वाकई यह लगा कि किसानों को योजना से काफी दर्द पहुंचने वाला है।
उन्होंने कहा कि जिस गांव में मैं दुल्हन बनकर आई थी। उस गांव को सरकार अब अधिग्रहित करना चाहती है। सरकार द्वारा यहां पर शहर के लोगों को बसाया जाना है। बड़ी-बड़ी कालोनियां बनेंगी। लेकिन जिस जमीन पर हम खेती करते हैं और हमारा पूरा परिवार इस पर आश्रित हम उसे कैसे छोड़ सकते हैं।
जहां जाएंगे वहां कौन होगा अपना?
दादी ने यह भी सवाल उठाया की सरकार हम यहां से हटाना चाहती है तो हम जाएंगे कहां? उन्होंने यह भी कहा कि जिस स्थान पर जाएंगे वहां कोई अपना नहीं रहेगा। दिन और रात में यदि कोई समस्या हो जाएगी तो किससे मदद मांगी जाएगी।
दादी के बाद भी कुछ हद तक सही लगती है। क्योंकि वाकई अगर उनके दर्द को समझें समझे तो पता चलता है कि जिस स्थान पर हम रहते हैं (खास तौर पर गांव में) वहां अपने जाने पहचाने वाले और सुख-दुख में शामिल होने वाले लोग भी रहते हैं।
किसी भी विपरीत परिस्थिति में या घटना दुर्घटना होने पर तत्काल पूरा गांव पहुंच जाता है। ऐसे में इसमें कोई दो राय नहीं है की योजना लागू हो जाने के बाद यदि किसानों को वहां से हटाया जाता है तो केवल किसानों की जमीन भी नहीं बल्कि उनकी एक बसी बसाई दुनिया उजड़ जाएगी।
यह वही दुनिया है जिसे हम समाज के नाम से जानते हैं। इसी समाज और अपनी मिट्टी को किसान किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ना चाहते हैं। यही कारण है कि अपनी भूमि बचाने के लिए किसान सरकार के विरोध में एकजुट हो गए हैं।
लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान इसका असर भी देखने को मिला। साथ ही किसानों का कहना है कि यदि योजना को निरस्त नहीं किया गया तो आगामी चुनाव में भी किसान सरकार का खुलकर विरोध करेंगे।
आईए जानते हैं क्या है काशी द्वारा योजना
दरअसल, वाराणसी एयरपोर्ट के समीप सरकार द्वारा एक टाउनशिप बनाई जानी है। इस योजना पर सरकार द्वारा 6964.18 करोड रुपए खर्च किए जाने हैं। योजना में किसानों को 4961.17 करोड रुपए मुआवजा दिया जाएगा और बाकी रुपए विकास कार्यों पर खर्च किए जाएंगे।
इस योजना के लिए पिंडरा, समोगरा, कैथौली, पुअरा रघुनाथपुर, जद्दुपुर, चक इंदर, बसनी, बहुतरा, बेलवा और पिंडराई आदि कुल 10 गांव से 1572 खसरों से योजना के लिए जमीन ली जानी है। इसमें कुछ भूमि ग्राम समाज की भी है।
शहर से इतनी दूर बसेगी टाउनशिप
वाराणसी मुख्यालय से इस योजना की दूरी करीब 18 से 20 किलोमीटर है। एयरपोर्ट के समीप या टाउनशिप बनवाई जाएगी। जब कि इस योजना की दूरी वाराणसी रेलवे स्टेशन, श्री काशी विश्वनाथ मंदिर और बाबा काल भैरव मंदिर से करीब 25 किलोमीटर है।
फिलहाल इस योजना का किसानों द्वारा विरोध किया जा रहा है। यह सीरीज की पिछली खबर में हमने आपको बताया था कि किस तरीके से किसानों द्वारा लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान योजना का विरोध करते हुए सरकार का विरोध शुरू हो गया। इसका असर भी रिजल्ट आने पर साफ तौर पर देखा गया।












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