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Varanasi Flood: जलस्तर 71.73 मीटर पहुंचा, 24 मोहल्ले डूबे, 327 हेक्टेयर फसल बर्बाद, 5 हजार लोग विस्थापित

Varanasi flood: पुरातन नगरी काशी इन दिनों गंगा के रौद्र रूप से जूझ रही है। गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है और अब यह खतरे के निशान से काफी ऊपर बह रहा है। हालात ये हैं कि जिन सड़कों पर कभी गाड़ियां दौड़ती थीं, अब वहां बाढ़ के पानी में नावें चलाई जा रही हैं।

शहर के घाट तो पहले ही डूब चुके थे अब मोहल्लों और गलियों में भी गंगा का पानी प्रवेश कर गया है। वरुणा नदी भी उफान पर है जिसके चलते सैकड़ों मकान जलमग्न हो चुके हैं। शहर के कई इलाकों में हालात ऐसे हैं कि लोग अपना घर छोड़कर राहत शिविरों में शरण ले लिए हैं।

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रविवार दोपहर से रविवार शाम तक गंगा के जलस्तर में करीब 7 सेमी की वृद्धि दर्ज की गई है। केंद्रीय जल आयोग के मुताबिक गंगा फिलहाल 71.73 मीटर पर बह रही है, जबकि खतरे का निशान 71.26 मीटर है। संभावना है कि आने वाले दिनामें हालात अभी और बिगड़ सकते हैं।

डूब गए घाट, गलियों में हो रहे शवदाह

वाराणसी के सभी 84 घाट पूरी तरह जलमग्न हो चुके हैं। मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट पर अब अंतिम संस्कार भी मुश्किल हो गया है। लोगों को शवों को नाव से ले जाना पड़ रहा है। लोग मणिकर्णिका घाट की गली में शव लेकर पहुंच रहे हैं।

उसके बाद नाव से नाविक समाज के लोग शव और उसके साथ कुछ लोगों को मणिकर्णिका घाट पर ले जा रहे हैं। उसके बाद वहां छत पर शवदाह हो रहा है। जगह भी कम होने के चलते समस्‍या हो रही है।

ग्रामीण क्षेत्र भी प्रभावित, फसलें जलमग्न

बाढ़ का असर सिर्फ शहरी इलाकों तक सीमित नहीं है। जिला प्रशासन द्वारा जारी अपडेट के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में 327 हेक्टेयर से अधिक फसलें डूब गई हैं। रामपुर ढाब, मुस्तफाबाद, राजापुर और बर्थरा जैसे गांवों में किसान पूरी तरह बर्बाद हो चुके हैं।

कुल 1469 किसान बाढ़ से प्रभावित हैं जिन्हें अब सरकारी सहायता का इंतजार है। कई गांवों में तो खेत ही नहीं घर भी पानी में समा चुके हैं। प्रशासन द्वारा वहां नावों के माध्यम से राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है।

24 मोहल्ले जलमग्न, 5 हजार से अधिक लोग विस्थापित

शहर के सलारपुर, सरैया, कोनिया, हुकुलगंज और अस्सी जैसे 24 मोहल्लों में पानी भर गया है। निचले इलाकों में हालात ज्यादा खराब हैं। कई घरों में कमर तक पानी भर चुका है, जिससे बिजली सप्लाई भी बाधित हो चुकी है।

जिला आपदा प्रबंध प्राधिकरण द्वारा जारी अपडेट के अनुसार अब तक 1182 परिवार विस्थापित हो चुके हैं, जिनमें से 605 परिवार राहत शिविरों में रह रहे हैं और बाकी ने अपने स्तर पर सुरक्षित स्थानों पर शरण ली है। कुल 5361 लोग इस समय अपने घरों से बाहर रहने को मजबूर हैं।

जिले में 46 राहत शिविर चिन्हित किए गए हैं जिनमें 20 वर्तमान में पूरी तरह क्रियाशील हैं। यहां रह रहे लोगों के लिए लंच पैकेट, दूध, फल, दवाएं और स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था की गई है।

अब तक 17137 लंच पैकेट, 632 दूध पैकेट और 454 राहत किट वितरित किए जा चुके हैं। प्रशासन द्वारा 42 नावें और एनडीआरएफ की 8 मोटरबोट बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत पहुंचाने में जुटी हुई हैं।

पीएम ने ली जानकारी, प्रशासन ने जारी की हेल्पलाइन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी जिले की स्थिति पर चिंता जताते हुए डीएम से हालात की जानकारी ली है। उन्होंने राहत और बचाव कार्यों को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया है।

प्रशासन ने बाढ़ से संबंधित किसी भी इमरजेंसी के लिए कंट्रोल रूम नंबर - 0542-2508550, 2504170, 9140037137 जारी किए हैं। जरुरत पड़ने पर लोग इन नंबरों पर फोन कर मदद प्राप्त कर सकते हैं।

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