Valentine Days 2023 : मरने के बाद पूजे जाते हैं 'आशिक माशूक', प्यार की मिसाल है काशी की यह मजार

काशी की मरियम और ईरान के यूसुफ की प्रेम की कहानी की गवाह है बनारस में स्थित आशिक माशूक की मजार। जीते जी लोगों ने उन्हें मिलने नहीं दिया और मरने के बाद उनकी पूजा की जाती है।

Lover Varanasi

दुनिया में प्यार मोहब्बत से जुड़ी कई घटनाएं और कहानियां सुनी और सुनाई जाती हैं। शीरी-फरहाद, लैला-मजनू, हीर-रांझा, रोमियो-जूलियट, सोहनी-महिवाल की अमर प्रेम कहानी तो लोगों की जुबान पर रहती है, लेकिन ऐसी ही कहानी वाराणसी के एक मजार की भी है। बताया जाता है कि जीते जी दोनों को दुनिया ने मिलने नहीं दिया और अब उनकी मौत के बाद मजार पर पूजा की जाती है। यहां हर साल Valentine Days के दिन काफी संख्या में प्रेमी युगल पहुंचते हैं और मेले जैसा माहौल देखने को मिलता है। आशिक मासूक नामक यह मजार वाराणसी जिले के सिगरा इलाके के सिद्धगिरीबाग में स्थित है।

मेले में हुई प्रेमी युगल की मुलाकात

मेले में हुई प्रेमी युगल की मुलाकात

ऐसी मान्यता है कि वाराणसी के सिद्धगिरीबाग में स्थित आशिक माशूक की मजार में वाराणसी की रहने वाली प्रेमिका और ईरान के रहने वाले प्रेमी को दफन किया गया है। ऐसा कहा जाता है कि करीब 400 साल पहले ईरान के यूसुफ वाराणसी में मेले में शामिल होने के लिए आए थे। वाराणसी के अलईपुरा में मेले में यूसुफ की मुलाकात वाराणसी के रहने वाले मरियम से हो गई। मेले में भी पहली मुलाकात के दौरान ही युसूफ और मरियम ने एक दूसरे को दिल दे दिया। बात आगे बढ़ी तो दोनों एक दूसरे से मुलाकात करते रहे और युसूफ भी वाराणसी में ही रुक गया। धीरे-धीरे दोनों की प्रेम कहानी की चर्चा अन्य लोगों के बीच भी होने लगी।

बदनामी के डर से परिवार बना विलेन

बदनामी के डर से परिवार बना विलेन

बताया जा रहा है कि दोनों के मोहब्बत के चर्चे पूरे शहर में धीरे-धीरे चलने लगे थे। इसके बारे में कानो कान दोनों के मोहब्बत की खबर मरियम के वालिद तक पहुंची। पहले तो मरियम के वालिद मरियम को समझाने का प्रयास किए लेकिन मरियम और युसूफ का प्रेम काफी आगे बढ़ गया था, ऐसे में वहां से वापस लौटना मुमकिन नहीं था। बताया जाता है कि समझाने के बाद भी मरियम जब अपने वालिद की बात नहीं मानी तो बदनामी के डर से मरियम के वालिद उसे अपने घर से अपने रिश्तेदार के घर भेजने की योजना बनाए। संभवत मरियम के वालिद का प्लान था कि रिश्तेदार के घर जाने के बाद मरियम यूसुफ को भूल जाएगी। लेकिन यह बात यूसुफ को भी पता चल गई।

नहीं आता था तैरने और गंगा में लगा दिया छलांग

नहीं आता था तैरने और गंगा में लगा दिया छलांग

बताया जाता है कि मरियम के वालिद गंगा नदी के उस पर जिला का वर्तमान समय में चंदौली जिले के नाम से जाना जाता है वहां मरियम को भेजने के लिए जा रहे थे। जानकारी होने के बाद यूसुफ भी गंगा नदी के किनारे पहुंचा। ऐसा कहा जाता है कि जब युसूफ गंगा नदी के किनारे पहुंचा तो उस दौरान मरियम को लेकर उसके वालिद गंगा नदी के उस पार जा चुके थे। इस दौरान मरियम को छोड़ने के लिए उसकी मौसी भी वहां गई थी और गंगा किनारे पहुंचाकर वहीं पर वह खड़ी थी। मरियम की मौसी इस युसूफ से कहा कि 'नदी में एक चप्पल दिखाई दे रहा है, वह चप्पल मरियम का है। यदि मरियम से प्यार है तो वह चप्पल लेकर आओ।' कहा जाता है कि यूसुफ को तैरने नहीं आता था लेकिन अपने प्रेमिका का चप्पल गंगा नदी में बहता हुआ देखकर उसने नदी में छलांग लगा दिया। छलांग लगाने के बाद देखते ही देखते वह गंगा नदी के गहरे पानी में समा गया।

मरियम भी नदी में कूद कर दे दी जान

मरियम भी नदी में कूद कर दे दी जान

प्रेमी यूसुफ के गंगा नदी में कूदने और मौत की जानकारी मिलने के बाद उसकी प्रेमिका मरियम भी रिश्तेदार के घर से भाग कर आई और गंगा नदी में छलांग लगा दी। छलांग लगाने के बाद मरियम भी गंगा नदी के गहरे पानी में समा गई और उसे भी नहीं बचाया जा सका। ऐसा कहा जाता है कि कुछ दिनों बाद एक ऐसा करिश्मा हुआ जिसे देखकर सभी लोग हैरान रह गए। दरअसल कुछ दिन पूर्व युसूफ गंगा नदी में कूदा था और उसके बाद उसकी मौत की सूचना मिलने के बाद मरियम को दी थी लेकिन चौंकाने वाली बात यह थी की मरियम के गंगा नदी में कूदने के कुछ दिन बाद दोनों की एकसाथ तैरती हुई लाश गंगा नदी में दिखाई दी। बताया जाता है कि दोनों एक दूसरे को अपने बाहों में भरे थे, ऐसा देखकर मरियम के परिवार के लोग और अन्य स्थानीय लोग आश्चर्य में पड़ गए।

लाख कोशिश के बाद भी नहीं कर पाए अलग

लाख कोशिश के बाद भी नहीं कर पाए अलग

ऐसा बताया जाता है कि यूसुफ और मरियम की लाश एक दूसरे से जुड़ी हुई थी और मरियम के परिवार के लोग दोनों की लाश को एक दूसरे से अलग करने का काफी प्रयास किए लेकिन सफल नहीं हो पाए। ऐसे में गंगा नदी से निकाल कर बाहर लाई गई दोनों की लाश को एक साथ लाया गया और वाराणसी जिले के सिद्धगिरीबाग में दफना दिया गया। जिस स्थान पर दोनों को सुपुर्द ए खाक किया गया था उसी स्थान पर मजार बना दी गई। वर्तमान समय में वैलेंटाइन डे पर इस मजार के पास मेला लगता है इसके अलावा आज भी लोग शादी करते समय मजार के समीप शादी का कार्ड रख देते हैं। ऐसा कहा जाता है कि शादी का कार्ड वहां रखने से दुल्हन और दूल्हे की जोड़ी अमर हो जाती है। इसके अलावा वैलेंटाइन डे पर भी प्रेमी-प्रेमिका इसी मजार पर पहुंचकर अपने प्रेम की कसम खाते हैं। ऐसे में वर्तमान समय में वैलेंटाइन डे वीक चल रहा है और वाराणसी की हजार काफी जगमग नजर आ रही है।

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