UP Varanasi: काशी में रथ पर निकले भगवान जगन्नाथ, रथयात्रा मेले में उमड़ी लाखों की भीड़
UP Varanasi News: वाराणसी में मंगलवार से रथ यात्रा मेला शुरू हो गया। मंगलवार को इस मेले में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया।
UP Varanasi: वाराणसी में तीन दिवसीय रथयात्रा मेला का शुभारंभ मंगलवार को हो गया। वाराणसी के रथ यात्रा इलाके में फूल मालाओं से सजे रथ पर सवार होकर भगवान जगन्नाथ अपनी बहन सुभद्रा और भाई बलराम के साथ भक्तों को दर्शन देने के लिए निकले।
रथयात्रा मेला में शामिल होने के लिए वाराणसी के साथ ही आसपास के जनपदों से भी काफी संख्या में लोग पहुंचे थे। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा के चाक-चौबंद इंतजाम देखने को मिले। मेले में आने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ को ध्यान में रखते हुए मेला लगने से पहले ही रूट डायवर्जन प्लान जारी कर दिया गया था।

मालूम हो कि वाराणसी में होने वाली यह रथयात्रा उड़ीसा के पुरी में होने वाली रथ यात्रा की तरह ही आयोजित की जाती है। अंतर केवल इतना है कि पूरी में आयोजित होने वाला रथयात्रा मेला 14 दिन चलता है जबकि वाराणसी का यह रथयात्रा मेला केवल 3 दिन का होता है।
इसके अलावा काशी और पुरी की रथयात्रा में खास अंतर की बात की जाए तो काशी में भगवान जगन्नाथ के साथ उनके बड़े भाई बलराम और बहन सुभद्रा को भी डोली में बैठाया जाता है और यात्रा निकाली जाती है। जबकि पुरी में डोली के जगह रथ का इस्तेमाल किया जाता है।
1802 में शुरू हुई थी रथयात्रा: वाराणसी में 3 दिनों तक आयोजित होने वाला रथयात्रा मेला 221 साल से होता चला रहा है। जगन्नाथपुरी को छोड़कर वाराणसी आए पुजारी तेजोनिधि ब्रह्मचारी द्वारा काशी में 1790 में जगन्नाथ मंदिर का निर्माण कराया गया था। मंदिर का निर्माण कराए जाने के बाद रथ यात्रा निकाले जाने के बारे में भी विचार किया गया।
उसके बाद मंदिर निर्माण के करीब 12 वर्षों बाद 1802 में काशी में रथ यात्रा निकाले जाने की शुरुआत हुई। उसके बाद से रथयात्रा मेला का हर साल आयोजन किया जाता है। यह भी कहा जाता है कि रथयात्रा मेले के बाद ही वाराणसी में मेले और त्योहारों का दौर शुरू हो जाता है।
राजातालाब में भी दो दिवसीय मेले का शुभारंभ: इसके अलावा वाराणसी के भैरवतालाब में आयोजित दो दिवसीय ऐतिहासिक रथ यात्रा मेले का शुभारंभ मंगलवार को शाम 4 बजे राजातालाब के रानीबाजार में काशी नरेश घराने के महाराजा कुंवर डॉ. अनंत नारायण सिंह ने किया। इस दौरान उनके साथ उनके पुत्र अनिरुद्ध नारायण सिंह भी मौजूद रहे।
इस दौरान रानीबाजार से कचनार, बीरभानपुर, हरपुर व राजातालाब होते हुए ग्रामीण श्रद्धालु रथ को खींचते हुए भैरवतालाब स्थित लक्ष्मी नारायण मंदिर के समीप मेला स्थल पहुंचे। जहां हर-हर महादेव के नारों के बीच वाहन पर पहुंचे महाराज कुंवर अनंत नारायण सिंह भगवान जगन्नाथ के दर्शन कर रथ पर सवार ब्राह्मणों को दक्षिणा देकर वापस चले गए।












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