'मरकर' जिंदा हुआ शख्स पीएम मोदी को वाराणसी से देगा चुनौती!
Varanasi

क्या है पूरा मामला
रामअवतार यादव आजमगढ़ जिले के सगरी ब्लाक के गोराईपटटी गांव में रहते हैं। सरकारी कागजों में वह 8 साल तक मृत रहे। जानकारी के मुताबिक, दस्तावेजों में ये गलती तो सुधार ली गई, लेकिन उन्हें अपना हक अभी तक नहीं मिला। दरअसल, रामअवतार की एक बीघा जमीन को उनके ही रिश्तेदारों ने 2005 में उनको सरकारी दस्तावेजों में मृत दिखाकर अपने नाम करवा ली थी।
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कागजों में नाम दर्ज, लेकिन कब्जा अभी तक नहीं मिला
लंबी लड़ाई के बाद 2013 में उनका नाम खतौनी व परिवार रजिस्टर में फिर से दर्ज हुआ। जमीन पर सरकारी दस्तावेज में तो उनके नाम दर्ज हो गया, लेकिन कब्जा अभी तक नहीं मिला है। उन्होंने अपनी समस्याओं की ओर ध्यान खींचने के लिए यह तरीका अपनाया है। बता दें, राजस्व दस्तावेज में मृत रामअवतार के पास आधार कार्ड और मतदाता पहचान पत्र भी है।

रामअवतार की मदद कर रहा मृतक संघ
बता दें कि सरकारी दस्तावेजों में मृत घोषित कर दिए गए जिंदा लोगों की मदद के लिए मृतक संघ बनाया है। इस स संघ के संस्थापक लाल बिहारी यादव हैं। लाल बिहारी यादव ने बताया कि जब वह 21 साल के थे तभी उनके रिश्तेदारों ने उन्हें मुर्दा घोषित कर दिया। लालबिहारी ने अपने को जिंदा होने का सबूत देने के लिए राष्ट्रपति चुनाव लड़ने से लेकर बच्चे के अपहरण तक की घटना को अंजाम दिया। 18 साल की लंबी लड़ाई के बाद 30 जून 1994 को उन्हें जीवित घोषित कर दिया गया था। लाल बिहारी ने अपने जैसे लोगों को न्याय दिलाने के लिए 2014 में मृतक संघ की स्थापना की।












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