शास्त्रीय संगीत के महानायक Chhannulal Mishra बीमार, वाराणसी BHU में चल रहा इलाज, हालत अभी स्थिर
Pandit Chhannulal Mishra health: शास्त्रीय संगीत की दुनिया का बड़ा नाम पंडित छन्नूलाल मिश्र इन दिनों अस्पताल में भर्ती हैं। 89 साल की उम्र में अचानक तबीयत बिगड़ने से उन्हें शनिवार रात बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्पताल लाया गया। डॉक्टरों की टीम लगातार उनकी निगरानी कर रही है।
जानकारी के मुताबिक गुरुवार को वह मिर्जापुर स्थित अपनी बेटी नम्रता मिश्र के घर पर थे। अचानक सीने में दर्द हुआ और परिवार ने तुरंत उन्हें नजदीकी अस्पताल पहुंचाया। शुरुआती जांच में हार्ट अटैक के लक्षण पाए गए जिसके बाद वाराणसी रेफर कर दिया गया।

बीएचयू के सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक में भर्ती किए गए पंडित जी को आईसीयू में रखा गया है। डॉक्टरों का कहना है कि स्थिति अभी नियंत्रण में है मगर उम्र और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं को देखते हुए पूरी सतर्कता बरती जा रही है।
तबीयत गिरी और अचानक आया हार्ट अटैक
बेटी नम्रता मिश्र ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से पिता का शुगर लेवल ज्यादा था। साथ ही हीमोग्लोबिन भी गिरा हुआ था। इन कारणों से अचानक तबीयत गिरी और हार्ट अटैक आया। परिवार का कहना है कि डॉक्टर पूरी कोशिश कर रहे हैं।
पंडित जी के बीएचयू में भर्ती होने की खबर मिलते ही वाराणसी और मिर्जापुर के कई जनप्रतिनिधि अस्पताल पहुंचे। एमएलसी धर्मेंद्र राय, सुरेश सिंह और चंदौली के सांसद वीरेंद्र सिंह ने देर रात अस्पताल जाकर हालचाल लिया और डॉक्टरों से बातचीत की।
आजमगढ़ के हरिहरपुर से शुरू हुई संगीत यात्रा
3 अगस्त 1936 को आजमगढ़ जिले के हरिहरपुर गांव में जन्मे छन्नूलाल मिश्र को बचपन से ही संगीत का संस्कार मिला। उनके दादा तबला वादक थे और पिता बद्री प्रसाद मिश्र ने शास्त्रीय गायन की प्रारंभिक शिक्षा दी। यहीं से उनकी यात्रा की शुरुआत हुई।
सिर्फ नौ साल की उम्र में उस्ताद गनी अली साहब ने उन्हें खयाल सिखाया। इसके बाद किराना घराने के उस्ताद अब्दुल गनी खान और पंडित ठाकुर जयदेव सिंह से उन्हें गहराई से तालीम मिली। धीरे-धीरे ठुमरी, दादरा, चैती और कजरी में उनकी पहचान बनी।
2014 के लोकसभा चुनाव में बने थे पीएम मोदी के प्रस्तावक
करीब चार दशक पहले वह बनारस आ गए। यहां रहकर उन्होंने संगीत साधना को और धार दी। शास्त्रीयता और लोक संगीत का अनोखा संगम बनाकर उन्होंने अपनी गायकी को नई ऊंचाई दी। उनका प्रसिद्ध गीत "खेले मसाने में होली" आज भी लोगों की जुबां पर है।
सम्मानों की बात करें तो उन्हें 2000 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार मिला। इसके बाद 2010 में पद्मभूषण और 2020 में पद्मविभूषण से सम्मानित किया गया। साल 2014 के लोकसभा चुनाव में वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्तावक भी बने।
पंडित जी की चार बेटियां हैं। बड़ी बेटी संगीता का निधन कोरोना काल में हुआ। अनिता और ममता की शादी हो चुकी है। सबसे छोटी बेटी नम्रता केबीपीजी कॉलेज मिर्जापुर में संगीत विभाग की प्रोफेसर हैं और पंडित जी इसी बेटी के साथ रहते हैं।
हालांकि परिवार में संपत्ति विवाद भी लंबे समय से चल रहा है। भाई और बेटियों के बीच इस खींचतान ने उन्हें काफी परेशान किया। यही कारण है कि पिछले कुछ सालों से वह सार्वजनिक कार्यक्रमों से लगभग दूर हो गए हैं।
पहुंचे सपा सांसद भी मिलने पहुंचे अस्पताल
पंडित छन्नू लाल के बीमारी की सूचना मिलने के बाद समाजवादी पार्टी के नेताओं ने बीएचयू अस्पताल में पहुंचकर उनके स्वास्थ्य के बारे में परिजनों और डॉक्टर से जानकारी ली। चंदौली लोकसभा से सपा सांसद वीरेंद्र सिंह भी उनका हाल-चाल जानने अस्पताल पहुंचे।
इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर बीएचयू ट्रामा सेंटर में भ्रष्टाचार का आरोप लगाया और कार्रवाई की भी मांग की है। बताया जा रहा है कि वार्ड में खाली पड़े बेड के बारे में पूछने पर एक डॉक्टर से सांसद की कहासुनी भी हुई थी।












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