चुनाव में किया दरकिनार तो अब चुनाव निपटते ही त्रिवेंद्र सिंह रावत क्यों हो गए खास, जानिए क्या है मामला

सीएम और प्रदेश अध्यक्ष की त्रिवेंद्र से हो चुकी है मुलाकात

देहरादून, 24 फरवरी। उत्तराखंड भाजपा में इन दिनों अंदरखाने नए-नए समीकरण बनते हुए नजर आ रहे हैं। इनमें सबसे खास भूमिका में नजर आ रहे हैं पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत। ​त्रिवेंद्र सिंह रावत मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद सक्रिय राजनीति में होने के बाद भी विधानसभा चुनाव से किनारा कर चुके थे। चुनाव न लड़ने के ऐलान के साथ ही त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सबको चौंका दिया था। लेकिन इसे पार्टी हाईकमान की ओर से एक बड़ा संकेत माना जा रहा था, कि​​ त्रिवेंद्र सिंह रावत को चुनाव न लड़ाकर पार्टी स्पष्ट संकेत दे रही है कि भाजपा में सभी पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में ​ही एकजुट होकर चुनाव लड़ें। हालांकि डोईवाला सीट पर अंतिम समय में अपने मनपसंद प्रत्याशी बृजभूषण गैरोला को टिकट दिलाकर त्रिवेंद्र सिंह रावत ने अपने विरोधियों को अपनी ताकत का एहसास करा दिया। इतना ही नहीं जिन-जिन सीटों पर भाजपा को बगावत का सामना करना पड़ा, उन सीटों पर कई जगह त्रिवेंद्र सिंह रावत पार्टी के संकटमोचक की तरह ही नजर आए।

Why did Trivendra Singh Rawat become special as soon as the election was over, know what is the matter

सीएम और प्रदेश अध्यक्ष लगा चुके हैं हाजिरी
अब चुनाव निपट गया है तो त्रिवेंद्र सिंह रावत के आवास पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से लेकर प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक हा​​जिरी लगा रहे हैं। इन मुलाकातों के भी राजनीतिक गलियारों में खासा चर्चा है। दावा किया जा रहा है कि 2022 के चुनाव परिणाम के रिजल्ट जो भी हों त्रिवेंद्र सिंह रावत अहम भूमिका में होंगे। जिस तरह के फीडबैक सियासी दलों को मिल रहे हैं, उनमें निर्दलीय या अन्य दलों के साथ गठजोड़ की संभावना बनती हुई नजर आ रही है। इन सब ​परिस्थितियों में त्रिवेंद्र सिंह रावत की भूमिका अहम हो सकती है। इसके साथ ही 2017 में जीतकर आए अधिकतर विधायक त्रिवेंद्र सिंह रावत के काफी करीबी रहे हैं। जो कि एकजुट होने के लिए त्रिवेंद्र को मजबूत कड़ी मानते हैं। त्रिवेंद्र सिंह रावत ने करीब 4 साल सरकार चलाई। इस बीच कांग्रेसी गोत्र के विधायकों में से कुछ ​विधायकों ने त्रिवेंद्र का खुलकर विरोध किया, लेकिन भाजपा के पुराने चेहरे त्रिवेंद्र के साथ पूरा सहयोग करते रहे। जो कि त्रिवेंद्र सिंह रावत के साथ हर बार कंधे से कंधा मिलाते नजर आए थे। इनमें कैबिनेट मंत्री धन सिंह रावत और मदन कौशिक भी शामिल रहे हैं। एक बार फिर दोनों एक साथ त्रिवेंद्र सिंह रावत के आवास पर मंथन करते हुए नजर आए हैं।

केन्द्रीय नेतृत्व के करीबी हैं त्रिवेंद्र
त्रिवेंद्र सिंह रावत केन्द्रीय नेतृत्व के भी काफी करीबी माने जाते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के भी सबसे करीबी नेताओं में त्रिवेंद्र सिंह रावत का नाम आता है। बतौर प्रभारी और सह प्रभारी त्रिवेंद्र सिंह रावत अमित शाह के साथ संगठन में भी काम कर चुके हैं। इसके साथ ही महाराष्ट्र के गवर्नर भगत सिंह कोश्यारी के भी त्रिवेंद्र सिंह सबसे खास नेताओं में रहे हैं। जो कि संगठन से लेकर सरकार तक मजबूत पकड़ रखते हैं। इस तरह त्रिवेंद्र सिंह रावत की भूमिका प्रदेश की राजनीति में अहम मानी जाती है। ऐसे में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक का ​त्रिवेंद्र सिंह रावत से ​मिलना आने वाले परिणाम से पहले फील्डिंग सजाने से भी जोड़ा जा रहा है। इसके साथ ही जिस तरह के आरोप भितरघात को लेकर ​मदन कौशिक पर लगे हैं। उसके कारण कौशिक प्रदेश के सीनियर नेताओं से भी सहयोग मांग रहे हैं, जिससे पार्टी किसी तरह की बड़ी कार्रवाई करने से पहले प्रदेश के सीनियर नेताओं से राय जरुर लेगी। ऐसे में त्रिवेंद्र सिंह रावत की भी अहम भूमिका होगी।

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