क्या है उत्तराखंड का 'ऑपरेशन कालनेमि', कैसे राज्य में नकली साधुओं के खिलाफ अब चलाया जाएगा अभियान
Operation kalanemi in Uttarakhand: उत्तराखंड सरकार ने राज्य में धर्म के नाम पर लोगों को ठगने वाले और संन्यासी का वेश धरकर अपराध करने वाले नकली साधुओं के खिलाफ एक सख्त अभियान की शुरुआत की है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस अभियान को 'ऑपरेशन कालनेमि' नाम दिया है।
इस ऑपरेशन के जरिए ऐसे व्यक्तियों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी जो सनातन धर्म की आड़ में लोगों को धोखा दे रहे हैं। मुख्यमंत्री धामी ने स्पष्ट कहा कि "धर्म के नाम पर पाखंड फैलाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। चाहे वह किसी भी धर्म या समुदाय से क्यों न हो, अगर कोई व्यक्ति साधु-संत का वेश धारण कर लोगों को धोखा देता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।"

क्यों पड़ा नाम 'कालनेमि'?
मुख्यमंत्री धामी ने कालनेमि नाम का उल्लेख करते हुए कहा कि जैसे रामायण में राक्षस कालनेमि ने साधु का वेश धारण कर भ्रमित करने की कोशिश की थी, ठीक वैसे ही आज समाज में कई 'कालनेमि' जैसे ढोंगी मौजूद हैं जो संतों की तरह दिखने का ढोंग कर समाज को गुमराह कर रहे हैं और विशेषकर महिलाओं को ठगने जैसे अपराध कर रहे हैं। बता दें कि कालनेमि रामायण में एक मायावी राक्षस था। उसका पिता मारीच था जोकि असुरराज रावण का मामा था।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी 'ऑपरेशन कालनेमि' को लेकर क्या कहा?
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने फेसबुक पर 10 जुलाई को जानकारी देते हुए कहा,
''देवभूमि उत्तराखंड में सनातन धर्म की आड़ में लोगों को ठगने और उनकी भावनाओं से खिलवाड़ करने वाले छद्म भेषधारियों के खिलाफ ऑपरेशन कालनेमि शुरू करने के अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए। प्रदेश में कई ऐसे मामले सामने आए हैं जहां असामाजिक तत्व साधु-संतों का भेष धारण कर लोगों, विशेषकर महिलाओं को ठगने का कार्य कर रहे हैं। इससे न सिर्फ लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हो रही हैं, बल्कि सामाजिक सौहार्द और सनातन परंपरा की छवि को भी नुकसान पहुंच रहा है। ऐसे में किसी भी धर्म का व्यक्ति यदि ऐसे कृत्य करता हुआ मिलता है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। जिस प्रकार असुर कालनेमि ने साधु का भेष धारण कर भ्रमित करने का प्रयास किया था, वैसे ही आज समाज में कई "कालनेमि" सक्रिय हैं जो धार्मिक भेष धारण कर अपराध कर रहे हैं। हमारी सरकार जनभावनाओं, सनातन संस्कृति की गरिमा की रक्षा और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। आस्था के नाम पर पाखंड फैलाने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।''
पुलिस-प्रशासन को अलर्ट रहने का आदेश
मुख्यमंत्री धामी ने पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी बढ़ाएं, धार्मिक स्थलों और मेलों में सक्रिय ऐसे ढोंगी बाबाओं की पहचान करें, और समय रहते कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करें। इसके लिए स्थानीय नागरिकों से सहयोग लेने की बात भी कही गई है ताकि जमीनी स्तर पर सच सामने आ सके।
उत्तराखंड का 'ऑपरेशन कालनेमि' एक ऐसा प्रयास है जो धार्मिक आस्था की रक्षा, सामाजिक समरसता बनाए रखने और नकली साधु के भेष में छिपे अपराधियों को बेनकाब करने की दिशा में उठाया गया साहसी कदम है। मुख्यमंत्री धामी का यह संदेश साफ है कि धर्म के नाम पर पाखंड फैलाने वालों के लिए अब उत्तराखंड में कोई जगह नहीं है।












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