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क्या है यूनिफॉर्म सिविल कोड और Article 44, उत्तराखंड में लागू होने पर क्या होगा ? सबकुछ जानिए

देहरादून, 24 मार्च: उत्तराखंड विधानसभा चुनाव प्रचार के आखिरी दिन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वादा किया था कि अगर बीजेपी की सरकार फिर से चुनी जाती है तो वे राज्य में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करेंगे। वादे के मुताबिक नई सरकार ने इसका ऐलान कर दिया है और इसके लिए एक एक्सपर्ट कमिटी गठित करने की बात कही गई है। लागू होने पर उत्तराखंड देश का एक तरह से पहला राज्य होगा, जहां 72 साल पहले लागू हुए भारत संविधान के नीति निदेशक तत्वों के मुताबिक इस प्रावधान को तैयार करके उसपर अमल किया जाएगा।

आर्टिकल 44 क्या है ?

आर्टिकल 44 क्या है ?

संविधान निर्माताओं ने भारत को एक धर्मनिरपेक्ष (पंथनिरपेक्ष) राष्ट्र बनाया है, जिससे उम्मीद की गई है कि यहां बिना भेदभाव के एक देश और एक नियम लागू होगा। संविधान में यूनिफॉर्म सिविल कोड की व्यवस्था इसके 4 भाग में आर्टिकल 44 के तहत ही की गई है। आर्टिकल 44 कहता है कि 'राज्य (राष्ट्र) भारत के पूरे क्षेत्र में नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता को लागू करने का प्रयास करेगा।' आर्टिकल 44 संविधान के नीति निदेशक तत्वों का हिस्सा है, जिसमें राज्य (राष्ट्र) के लिए कुछ विशेष कर्तव्य निर्धारित किए गए हैं।

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    Uttarakhand CM Dhami ने Uniform Civil Code लागू करने का ऐलान किया | वनइंडिया हिंदी
    यूनिफॉर्म सिविल कोड क्या है ?

    यूनिफॉर्म सिविल कोड क्या है ?

    भारत में यूनिफॉर्म सिविल कोड अलग-अलग धर्मग्रंथों और रीति-रिवाजों पर आधारित प्रमुख धर्मों के व्यक्तिगत कानूनों (पर्सनल लॉ) की जगह राष्ट्र के प्रत्येक नागरिकों पर लागू होने वाले एक समान नागरिक संहिता में बदलने का प्रावधान है। यह कानून राज्य (राष्ट्र) को विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने और प्रतिपालन या मेंटेंस जैसे मसलों में सभी धर्म के लोगों को एक देश के नागरिक की तरह बिना किसी भेदभाव किए बर्ताव करने की व्यवस्था देता है।

    अबतक क्यों नहीं लागू हो पाया है समान नागरिक संहिता ?

    अबतक क्यों नहीं लागू हो पाया है समान नागरिक संहिता ?

    कहने के लिए भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है, लेकिन यह बहुत बड़ा विरोधाभास है कि यहां नागरिकों के धर्म देखकर उनके विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने और प्रतिपालन या मेंटेंस जैसे मसले तय किए जाते रहे हैं। एक देश के नागरिकों के ये मसले उनके धर्म के आधार पर अलग-अलग पर्सनल लॉ से तय होते आए हैं। यही नहीं, यह मुद्दा देश की राजनीति का एक बहुत ही बड़ा विवादित विषय बना रहा है।

    यूनिफॉर्म सिविल कोड की जगह अभी क्या व्यवस्था है ?

    यूनिफॉर्म सिविल कोड की जगह अभी क्या व्यवस्था है ?

    भारत ऐसा धर्मनिरपेक्ष देश है, जहां नागरिकों से जुड़े इन मामलों के लिए के लिए अलग-अलग कानूनों का सहारा लिया जाता है। जैसे ये कानून हैं- हिंदू विवाह कानून, हिंदू उत्तराधिकार कानून, भारतीय क्रिश्चियन विवाह कानून, पारसी विवाह और तलाक कानून। मुस्लिम पर्सनल लॉ उनके धार्मिक शरिया कानून पर आधारित है, जिसमें एकतरफा तलाक और बहुविवाह जैसी प्रथाएं शामिल हैं। सिर्फ गोवा देश का ऐसा राज्य है, जहां कॉमन फैमिली लॉ लागू है। यानी यह देश का एकमात्र ऐसा राज्य है, जहां यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू है। इसके अलावा एक स्पेशल मैरेज ऐक्ट, 1954 भी है, जो नागरिकों को विशेष धार्मिक पर्सनल लॉ से अलग सिविल विवाह करने की अनुमति देता है।

    उत्तराखंड में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू होने पर क्या होगा ?

    उत्तराखंड में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू होने पर क्या होगा ?

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने यूनिफॉर्म सिविल कोड का मसौदा तैयार करने के लिए एक्सपर्ट कमिटी बनाने की बात कही है। जब यह नया कानून प्रदेश में लागू होगा तो राज्य की नजर में उसके सभी नागरिकों के लिए विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने और प्रतिपालन या मेंटेंस जैसे नियम एक समान होंगे और उनके बीच इस मामले में किसी तरह का कोई भेदभाव नहीं रहेगा और इस तरह से संविधान निर्माताओं ने जो कल्पना की थी, वैसे भारत का सपना साकार होगा। (शादी की तस्वीरें- सांकेतिक)

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