भाजपा के नए नारे 'धामी में है दम, मोदी जी है संग' के क्या हैं सियासी मायने, जानिए

धामी में है दम, मोदी जी है संग का भाजपा ने दिया नारा के तलाशे जा रहे सियासी मायने

देहरादून, 30 दिसंंबरा उत्तराखंड में भाजपा इतिहास रचने और दोबारा सत्ता पाने के लिए इस बार युवा नेतृत्व देने का दावा कर रही है। जिसके लिए सीएम पुष्कर सिंह धामी केे चेहरे पर चुनाव लड़ने का दावा किया जा रहा है। लेकिन मीडिया में भाजपा के नए विज्ञापन में दिए गए नारे से एक बार फिर ये संकेत मिल रहे हैं कि बिना पीएम मोदी के चेहरे के भाजपा की नैया पार लगना मुश्किल है। भाजपा के नए नारे धामी में है दम, मोदी जी है संग के सियासी मायने क्‍या हैंं आइए जानते हैं।

मोदी लहर में मिला था प्रचंड बहुमत

मोदी लहर में मिला था प्रचंड बहुमत

उत्तराखंड में भाजपा ने इस बार 60 पार का लक्ष्य रखा है। 2017 में भाजपा ने मोदी लहर में 57 सीटें जीती थी, जो कि मोदी लहर का मैजिक माना गया है। उत्तराखंड में पहली बार किसी पार्टी को प्रचंड बहुमत मिला। ऐसे में मोदी मैजिक को भाजपा के रणनीतिकारों ने सत्ता में आने के लिए जरूरी मान लिया है। 2017 से 2021 में भाजपा की प्रचंड बहुमत सरकार में त्रिवेंद्र सिंह रावत के नेतृत्व में कई बड़े ​फैसले लिए जिनमें से कई फैसलों पर प्रचंड बहुमत का स्वाभिमान बताकर विरोध भी हुआ। जिसके परिणामस्वरूप मार्च में त्रिवेंद्र सिंह रावत को हटा दिया गया। इसके बाद तीरथ सिंह रावत को कुर्सी सौंपी गई। लेकिन वे भी 4 माह में ही हटा दिए गए। इसके बाद चुनावी साल को देखते हुए युवा चेहरे पर दांव खेलने का दावा करते हुए पुष्कर सिंह धामी को लाया गया।

धामी के नेतृत्व में चुनाव, चेहरा मोदी का

धामी के नेतृत्व में चुनाव, चेहरा मोदी का

चुनावी साल में भाजपा ने पुष्कर सिंह धामी के चेहरे पर ही चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है। हाल ही में जब पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत से एक चैनल के कार्यक्रम में पूछा गया तो उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी पुष्कर सिंह धामी के चेहरे पर चुनाव लड़ रही है। लेकिन भाजपा का नया नारा ये बताने के लिए काफी है कि भाजपा के किसी भी चेहरे में बिना मोदी के संग के दम है, ये कहना मुश्किल है। सीएम पुष्कर सिंह धामी की सरकार का 5 माह का कार्यकाल पूरा हो चुका है। इस दौरान सरकार 400 से ज्यादा फैसले लेने का दावा कर रही है।

मोदी की लोकप्रियता को भुनाना मजबूरी

मोदी की लोकप्रियता को भुनाना मजबूरी

भाजपा पूरे दम खम से पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में 2022 के मैदान में उतरी हुई है। लेकिन भाजपा के रणनीतिकार अच्छे से जानते हैं कि एक साल में 3 सीएम बदलने के भाजपा के निर्णय को जनता नकारात्मक सोच के साथ देख रही है। ऐसे में धामी छवि को दमदार बताना और धामी को धाकड़ बल्लेबाज, गेंदबाज और ऑलराउंडर बताकर भाजपा हाईकमान अपने फैसले को सही ठहराने में जुटी है। भाजपा के सामने इस समय दूसरी बड़ी चुनौती कांग्रेस चुनाव अभियान समिति के प्रमुख हरीश रावत भी है। जो कि हर सर्वे में सबसे लोक​प्रिय बने हुए हैं। धामी को हरदा से तुलना करना और हरदा की लो​क​प्रियता को कम करने के लिए भी भाजपा के लिए मोदी की लो​कप्रियता को दिखाने के अलावा कोई दूसरा ऑप्‍शन्‍स भी नहीं है। भाजपा में मोदी और अमित शाह की जोड़ी के आने के बाद से उत्तराखंड ही नहीं पूरे देश में भाजपा ने कई रिकॉर्ड और इतिहास बनाया है। लोकसभा चुनाव में भी पहली बार भाजपा ने क्लीन स्वीप किया। पांचों सीट पर भाजपा ने कब्जा किया। यही वजह है कि बिना मोदी के संग के भाजपा को सत्ता की चाबी मिलना मुश्किल है।

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