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उत्तरकाशी में बादल फटने से कितनी स्पीड से आया था वो सैलाब, धराली गांव 'टाइम बम' पर क्यों है?

इन दिनों पहाड़ों पर कुदरती कहर बरप रहा है। उत्तराखंड के उत्तरकाशी जनपद के गांव धराली के एक दिन बाद अब 6 अगस्त 2025 (बुधवार) को हिमाचल प्रदेश के किन्नौर के तंगलिंग में बादल फटा है। उधर, उत्तरकाशी में बादल फटने के बादप पानी के साथ आए मलबे के सैलाब की अत्यधिक स्पीड और धराली गांव के 'टाइम बम' पर बैठे होने जैसी बातें भी सामने आई हैं।

Uttarkashi

धराली में पहले भी फट चुके हैं बादल

5 अगस्त 2025 की दोपहर को उत्तरकाशी के गांव धराली, हर्षिल और सुक्खी गांव में एक के बाद एक करके बादल फटने की तीन घटनाएं हुई हैं। गांव धराली में यह बादल चौथी बार फटा है। साल 2025 से पहले 1864, 2013 और 2014 में भी गांव धराली बादल फटने से तबाही का खौफनाक मंजर देख चुका है।

गांव धराली को दूसरी जगह बसाने की सलाह

दैनिक भास्कर अखबार में छपी एक खबर में दावा किया गया है कि गांव धराली में बादल फटने की शुरुआती तीनों घटनाओं के बाद भूगर्भ वैज्ञानिक ने राज्य सरकार को सलाह दी थी कि सुरक्षा के लिहाज से गांव धराली को कहीं और बसाया जाए। लेकिन सलाह के बावजूद इसे दूसरी जगह बसाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए।

क्यों 'टाइम बम' है धराली गांव?

उत्तरकाशी के गांव धराली के 'टाइम बम' पर बैठे होने की सारी केमेस्ट्री उसके भूगोल में छिपी है। मतलब यह कि गांव धराली की बसावट ऐसी जगह पर है, जो प्राकृतिक आपदाओं, खासकर बादल फटने की घटनाओं की चपेट में सबसे ज्यादा आती है। आपदा के लिहाज से गांव धराली एक तरह से 'टाइम बम' पर बैठा है।

क्या कह रहे हैं भूगर्भ वैज्ञानिक?

मीडिया से बातचीत में भूगर्भ वैज्ञानिक प्रो. एसपी सती का मानना है कि गांव धराली हिमालय की ऐसी दरार में बसा है, जो भूकंप के लिए लिहाज से भी अति संवेदनशील जोन है। दरार का मतलब यह है कि मुख्य हिमालय को ट्रांस हिमालय (4 हजार मीटर की ऊंचाई पर) से जोड़ने वाली मुख्य सेंट्रल थर्स्ट वाली जगह।

गांव धराली में 43 KM प्रतिघंटा की स्पीड से आया था सैलाब

बादल फटने के बाद गांव धराली में जो सैलाब आया उसे विशेषज्ञ मड स्लाइड भी कह रहे हैं। वायरल वीडियो में भी देखा जा सकता है कि पहाड़ी नाले से कोई मलबा तेजी से आया और गांव धराली को महज 34 सेकंड में तबाह कर गया।

इंडिया टुडे की पड़ताल में ग्राउंड रिपोर्ट व विशेषज्ञों से बातचीत में सामने आया कि खीरगंगा नाला 12 हजार 600 फीट की ऊंचाई (समुद्र तल से) वाली जगह से 8 हजार 300 फीट की ऊंचाई पर स्थित भागीरथी नदी में आकर मिलता है। 5 अगस्त 2025 की दोपहर को बादल फटने के बाद गांव धराली में जो सैलाब (मड स्लाइड) आया, उसकी स्पीड 43 किलोमीटर प्रति घंटा थी, जो पहाड़ी क्षेत्र के लिहाज से बहुत ज्यादा है। उसकी वजह से ही गांव धराली मलबे में दब गया।

700 की आबादी वाला गांव है धराली

उत्तराखंड के मुख्य सचिव आनंद वर्धन के अनुसार, गांव धराली के 150 घरों में करीब 700 लोग निवास करते हैं। 5 अगस्त 2025 की आपदा में 50 घर, 30 होटल और 25 होम स्टे पूरी तरह से तबाह हो चुके हैं। 100 लोग लापता बताए जा रहे हैं।

उत्तरकाशी में बादल फटने के बाद गांव धराली में तबाही के मंजर का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि पहाड़ से सैलाब आने के बाद 10 मीटर चौड़ी खीर नदी 30 मीटर चौड़ी हो गई। बादल फटने के वक्त इलाके में बम धमाके जैसी तेज आवाज सुनाई दी थी।

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