उत्तराखंड विधानसभा में हुई तदर्थ भर्तियों को लेकर बवाल, सीएम समेत मंत्रियों पर उठाए विपक्ष ने सवाल

विधानसभा की करीब 73 तदर्थ भर्तियों को लेकर विपक्ष मुखर

देहरादून, 27 अगस्त। उत्तराखंड में सरकारी नौकरियों को लेकर सियासी संग्राम थमने का नाम नहीं ले रहा है। यूकेएसएसएससी पेपर लीक प्रकरण सामने आने के बाद प्रदेश की कई भर्तियां शक के दायरे में हैं। ऐसा ही एक और मामला अब विपक्षी कांग्रेस ने उठाकर धामी सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। कांग्रेस ने उत्तराखंड विधानसभा की करीब 73 लोगों की तदर्थ भर्तियों को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। जिसके बाद से नियुक्ति पाने वालों के नामों की सूची सोशल मीडिया पर वायरल हो गई।

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    कांग्रेस का आरोप-अपनों और चहेतों को नौकरी दिलाने के लिए नियम कानून सब ताक पर रख दिए

    उत्तराखंड में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष करन माहरा ने विधानसभा की भर्तियों की जांच की मांग उठाई है। जिसके बाद से नियुक्ति पाने वालों के नामों की सूची सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार ने अपनों और चहेतों को नौकरी दिलाने के लिए नियम कानून सब ताक पर रख दिए। कांग्रेस का आरोप है कि भर्ती के नाम पर हजारों अभ्यर्थियों से आवेदन मांगे गए, लेकिन वह भर्ती परीक्षा आयोजित नहीं हुई। सीधे पिछले दरवाजे से मंत्रियों, सत्तारूढ़ दल के वरिष्ठ नेताओं के करीबियों को नौकरियों पर रख लिया गया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष करन माहरा ने ऐसे सभी मंत्रियों और वरिष्ठ नेताओं के नाम भी सार्वजनिक किए हैं। वायरल सूची में सीएम के ओएसडी की पत्नी से लेकर मंत्रियों के कई जानकारों के नाम शामिल बताए जा रहे हैं। इसके साथ ही सरकार में मंत्री रेखा आर्य, सतपाल महाराज और मदन कौशिक के ओएसडी के परिवार के लोगों को नौकरी दिए जाने का भी दावा किया जा रहा है।

    आम आदमी पार्टी ने भी इस प्रकरण पर सरकार और सीएम को घेरना शुरू कर दिया

    उत्तराखंड गठन से अब तक विधानसभा में हुई भर्तियां विवादों में रहीं है। कांग्रेस सरकार में तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल के कार्यकाल में 158 भर्तियां भी विवादों में रहीं। आरोप है कि भर्तियां भी नियमों.कायदों को ताक पर रख कर की गईं। राजनेताओं के करीबियों, चेहेतों के सिर्फ एक आवेदन पर नौकरियां दे दी गईं। कांग्रेस के बाद अब आम आदमी पार्टी ने भी इस प्रकरण पर सरकार और सीएम को घेरना शुरू कर दिया है। आम आदमी पार्टी के गढ़वाल मीडिया प्रभारी रविंद्र सिंह आनंद ने विधानसभा में हुए भर्ती घोटाले एवं बैक डोर एंट्री पर सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के इशारे पर विधानसभा में बैक डोर एंट्री हुई है, क्योंकि इसमें धामी के ओएसडी की पत्नी को नौकरी दिए जाने की बात सामने आई है, साथ ही सरकार में मंत्री रेखा आर्य, सतपाल महाराज और मदन कौशिक के ओएसडी के परिवार के लोगों को नौकरी दिए जाने की बात भी उजागर हुई है। उन्होंने कहा बिना मुख्यमंत्री की संलिप्तता के यह कार्य नहीं हो सकता। इसलिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को इसकी जिम्मेदारी लेते हुए नैतिकता के आधार पर इस्तीफा दे देना चाहिए। उन्होंने कहा एक और जीरो टॉलरेंस की बात करने वाली भारतीय जनता पार्टी की सरकार लगातार भर्ती घोटालो में घिरती जा रही है एवं उसका चाल, चरित्र और चेहरा जनता के सामने आ गया है।

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