उत्तराखंड: CDS जनरल विपिन रावत के वो 5 सपने, जो रह गए अधूरे
उत्तराखंड में जन्में रावत रिटायरमेंट के बाद रहना चाहते थे देहरादून में
देहरादून, 9 दिसंबर। सीडीएस जनरल विपिन रावत के आकस्मिक निधन से पूरा उत्तराखंड राज्य गमगीन है। विपिन रावत का उत्तराखंड से लगाव कई मायने में खास है। जनरल का पैतृक गांव सैंण (बिरमोली) द्वारीखाल ब्लाॅक है। इसके अलावा उत्तरकाशी के थाती गांव में सीडीएस बिपिन रावत का ननिहाल है। जहां वह बचपन में अपनी मां के साथ आया करते थे। उन्होंने देहरादून में कैंब्रियन हॉल स्कूल और भारतीय सैन्य अकादमी देहरादून से शिक्षा ली। आईएमए में उन्हें सर्वश्रेष्ठ स्वोर्ड ऑफ ऑनर सम्मान से भी नवाजा गया था। जनरल ने रिटायरमेंट के बाद भी समय उत्तराखंड में ही बिताने की तैयारी कर ली थी। इसके लिए वे देहरादून में घर बनवा रहे थे। जनरल विपिन रावत का उत्तराखंड से खास लगाव था, ऐसे में उत्तराखंड को लेकर उनके कई ऐसे सपने थे, जो पूरे नहीं हो पाए।

पैतृक गांव सड़क पहुंचाने का किया प्रयास
सीडीएस जनरल विपिन रावत अपने पैतृक गांव सैंण में सड़क पहुंचाने के प्रयास में लगे थे, जिसके लिए उनके प्रयास से उनके गांव सैंण तक 4 किमी की सड़क बनाने का काम चल रहा है। यमकेश्वर विधानसभा की विधायक ऋतु खंडूडी भूषण ने बताया कि सीडीएस के गांव के लिए बन रही सड़क का 3 किमी तक काम पूरा हो चुका है। अब एक किमी तक सड़क निर्माण बचा हुआ है। उन्होंने बताया कि गांव और स्थानीय लोग चाहते थे कि सड़क का निर्माण कार्य पूरा होने पर सीडीएस को गांव बुलाया जाए। इसके लिए सीडीएस भी हमेशा गंभीर रहते थे। उन्होंने बताया कि जब जनरल गांव आए थे तब सड़क को लेकर उन्होंने गंभीरता से काम किया था।

देहरादून में बनाना चाहते थे घर
जनरल विपिन रावत सीडीएस से रिटायर होने के बाद देहरादून में बसना चाहते थे। इसके लिए वे प्रेमनगर के पौंधा रोड पर मकान बनवा रहे थे। प्राप्त जानकारी के अनुसार हाल ही में उनकी पत्नी मधुलिता रावत ने पूजन कर निर्माण कार्य शुरू करवाया था। जनरल पहाड़ प्रेमी थे, ऐसे में उन्होंने पहाड़ पर रहकर अपना जीवन बिताने का मन बना लिया था। इसके लिए उन्होंने देहरादून की शांत वादियां और पहाड़ी एरिया चुना था।

रिटायर होने के बाद आना था ननिहाल गांव
सीडीएस विपिन रावत 19 सितंबर 2019 को अपने ननिहाल थाती गांव आए थे। तब रावत ने रिटायर के बाद थाती गांव आने का वादा किया था। उत्तरकाशी जनपद मुख्यालय से करीब 25 किमी दूर थाती गांव में सीडीएस बिपिन रावत का ननिहाल है। जहां वह बचपन में अपनी मां के साथ आया करते थे। वर्ष 2004 में भी वह यहां आए थे। इसके बाद 19 सितंबर 2019 को सीडीएस विपिन रावत अपनी पत्नी मधुलिका रावत के साथ थाती गांव पहुंचे थे। ग्रामीणों ने बताया कि रावत ने वादा किया था कि रिटायर होने के बाद वह जरूर गांव आएंगे और गांव के लोगों के लिए काम करेंगे। वे दोनों जब गांव आए थे तो उनके लिए उड़द दाल के पकौड़े व स्वाले बनाए गए थे।
Recommended Video

पहाड़ों में मेडिकल और कॉलेज खोलने की थी कोशिश
सीडीएस रावत पहाड़ों में हायर एजुकेशन और चिकित्सा सुविधाओं के लिए खास चिंतित रहते थे। रावत ने उत्तरकाशी के धनारी क्षेत्र में बड़ा अस्पताल। खोलने की पैरवी की थी, साथ ही उन्होंने जनप्रतिनिधियों से अच्छे इंजीनियरिंग व मेडिकल कॉलेज खोलने की मांग की थी। उनका कहना था कि पहाड़ में कॉलेज खुलेंगे तो हमारे नौजवान यहां से पलायन नहीं करेंगे। सीडीएस रावत दो बार गंगोत्री धाम भी आए थे। 6 नवंबर 2018 में वह गंगोत्री आए थे। इसके बाद 19 सितंबर 2019 में भी आए थे। इस दौरान उन्होंने अपनी पत्नी मधुलिका के साथ धाम में पूजा-अर्चना भी की थी।

आईएमए की पीओपी में होना था शामिल
तमिलनाडु के कुन्नूर में हुए हेलीकाप्टर हादसे में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत की आकस्मिक मौत होने की खबर से देहरादून स्थित भारतीय सैन्य अकादमी की पीओपी का कार्यक्रम को लेकर संशय बना हुआ है। आईएमए में 11 दिसंबर को पासिंग आउट परेड में इस बार राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के साथ सीडीएस बिपिन रावत को भी शिरकत करनी थी। जिसको लेकर आईएमए प्रबंधन पूरी तरह से तैयारियों में जुटा था, लेकिन अचानक हादसे में जनरल की मौत के बाद कार्यक्रम को लेकर संशय बना हुआ है।












Click it and Unblock the Notifications